भारत में 12 कीटनाशकों पर तत्काल पाबंदी, जहरीले राउंडअप के खिलाफ भी उठी आवाज

साल 2013 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की पूर्व प्रोफेसर अनुपमा वर्मा की अगुवाई में गठित कमेटी ने वर्ष 2015 में 18 में से 12 कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने, जबकि 6 अन्य को क्रमवार बैन करने की अनुशंसा की थी

भारत में 12 कीटनाशकों पर तत्काल पाबंदी, जहरीले राउंडअप के खिलाफ भी उठी आवाज

नई दिल्ली/लखनऊ। देश के किसानों और आम लोगों के लिए अच्छी ख़बर है। आपकी सेहत को खराब करने वाले, बीमारियां देने वाले 12 कीटनाशकों पर तत्काल प्रभाव से पाबंदी लगा दी गई है। जबकि दूसरे 6 अन्य कीटनाशकों पर दिसंबर 2020 से पाबंदी लगेगी।

बेनोमिल, फेनारिमोल, कार्बाराइल, मिथॉक्सी एथाइल मरकरी क्लोराइड, थियोमेटॉन समेत जिन 12 कीटनाशकों पर तुरंत प्रतिबंध लगाया गया है वो खाने और जमीन के साथ सतही और भूगर्भ जल को दूषित कर रहे थे। पशु-पक्षियों पर इसके घातक परिणाम दिख रहे थे। हालांकि इसमें वो कीटनाशक ग्लायफोसेट शामिल नहीं है, जिसके लिए अमेरिका में मोंसेंटो को एक कैंसर मरीज को 200 करोड़ का हर्जाना देना पड़ा।


"देर से ही सही लेकिन सरकार ने एक सार्थक कदम उठाया है। कीटनाशकों ने हमारे खाना और हवा सब जहरीला कर दिया है। हमारी मांग है कि 12 ही नहीं पूरे 104 कीटनाशकों पर पूर्ण प्रतिबंध लगे। अमेरिका में ग्लायफोसेट (GLYPHOSATE) के खिलाफ आए कोर्ट ने निर्णय पर सरकार को तुरंत संज्ञान लेकर आगे कार्रवाई करनी चाहिए।' कविथा कुरुगंति फोन पर गांव कनेक्शन को बताती हैं। किसान स्वराज (आशा) की सदस्य कविथा कुरुगंति कीटनाशकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता हैं।

साल 2013 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की पूर्व प्रोफेसर अनुपमा वर्मा की अगुवाई में गठित कमेटी ने वर्ष 2015 में 18 में से 12 कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने, जबकि 6 अन्य को क्रमवार बैन करने की अनुशंसा की थी। इसके बाद वर्ष 2016 में कृषि मंत्रालय ने इस पर नोटिफिकेशन जारी किया, लेकिन इसी के साथ एक और कमेटी जेएस संधू की अगुवाई में गठित कर दी गई। इतना ही नहीं, इसके बाद अक्टूबर 2017 में एसके मेहरोत्रा कमेटी का गठन हुआ था। उसी प्रक्रिया में सरकार ने अब ये निर्णय लिया है।

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ऐसे कीटनाशक बिक रहे हैं, जो दूसरे एक या एक से ज्यादा देशों में प्रतिबंधित हैं

भारत में अब बेनोमिल, कार्बाराइल, डायाजिनोन, फेनारिमोल, फेंथियॉन, लिनुरान, मिथॉक्सी एथाइल मरकरी क्लोराइड, थियोमेटॉन, मेथिल पार्थियॉन, सोडियम सायनाइड, ट्राइडीमार्फ और ट्राईफ्लूरालिम की बिक्री, निर्माण और निर्यात-आयात नहीं होगा। जबकि 31 दिसंबर 2020 के बाद ट्रायाजोफस, ट्राइक्लोरोफोन, एलाचलोर, डिचलोरवस, फोरेट, फोस्फामिडॉन को देश में प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।

भारत में 100 से ज्यादा ऐसे कीटनाशक बिक रहे हैं, जो दूसरे एक या एक से ज्यादा देशों में प्रतिबंधित हैं। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कीटनाशक उत्पादक देश है। विश्व भर में प्रति वर्ष लगभग 20 लाख टन कीटनाशक का उपयोग किया जाता है। टॉक्सिक लिंक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 108 टन सब्जियों को बचाने के लिए 6000 टन कीटनाशक का प्रयोग किया जाता है। जबकि कुल कीटनाशकों में से करीब 60 फीसदी का उपयोग कपास में होता।


वर्ष 2018 के बाद यूरोपीय संघ के 28 देशों में तितलियों और मधुमक्खियों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटनाशकों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। यूरोपीय देश इससे पहले भी कई कीटनाशकों का इस्तेमाल रुकवा चुके हैं, जो भारत में धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जाते हैं।

भारत में करीब 250 तरह के कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें से 18 क्लास वन (सबसे घातक) हैं। इनका अंधाधुंध और गैर जरूरी इस्तेमाल किसानों के लिए जानलेवा और पर्यावरण के लिए घातक साबित हो रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2015 में 7062 लोगों की मौत कीटनाशकों से हुई थी। सीएसई के मुताबिक, भारत में औसतन कीटनाशकों से जुड़े 10 हजार मामले हर साल सामने आते हैं।

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सरकारों के रवैये की लगातार आलोचना होती रही

हरित क्रांति के बाद भारत में कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल हुआ। कीटनाशकों पर पाबंदी को लेकर सरकारों के रवैये की लगातार आलोचना होती रही है। भारत में पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा को लेकर काम करने वाली संस्था सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट (सीएसई) के सीनियर प्रोग्राम मैनेजर फूड एंड टॉक्सिस, अमित खुराना ने पिछले दिनों गांव कनेक्शन को बताया था, "कीटनाशकों के निर्माण से लेकर बिक्री और उसके इस्तेमाल के लिए सरकार के जो नियम कायदे हैं, वो बहुत कमजोर हैं।"

भारत समेत पूरी दुनिया में इस बात को लेकर भी बहस होती रही है कि कीटनाशकों से कैंसर होते हैं कि नहीं। पंजाब-हरियाणा जहां कीटनाशकों के अति इस्तेमाल से कैंसर ट्रेन चलानी पड़ी और केरल में जहां इंडोसल्फान में हजारों लोगों को जिंदगियां बर्बाद कर दीं, वहां भी ऐसे कीटनाशकों पर प्रतिबंध को लेकर सिविल सोयासटी को लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी।


सुप्रीम कोर्ट में कीटनाशकों के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली कंविता गुरुगंति कहती हैं, "ग्लायफोसेट को लेकर सैन फ्रांसिस्को की अदालत का फैसला मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि ग्लायफोसेट अमेरिका में भी प्रतिबंधित नहीं है। अमेरिकी नागरिक भले ये मुकदमा जीत गया, लेकिन भारत में इतने सबूत जुटा पाना आम किसान (नागरिक) के लिए आसान नहीं होगा, इसलिए सरकार को अमेरिका के इस केस को नजर में रखते हुए कानून बनाना चाहिए।"

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दुनिया की दिग्गज उर्वरक और फर्टीलाइजर कंपनी मॉनसेंट का उत्पाद राउंडअप केमिकल भारत समेत पूरी दुनिया में खरपतवार के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। खरतवार पर इसके छिड़काव से वो पूरी तरह जल जाते हैं। लेकिन इसका छिड़काव करने वाले किसान, जमीन और आगामी फसलों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। राउंटअप में ग्लायफोसेट नामक हानिकारक कैंसर देने वाला रसायन पाया जाता है।

अमेरिका के सैन फ्रांस्सिको में रहने वाले ग्राउंडकीपर (खेल के मैदान की रखवाली करने वाले) ड्वेन जॉनसन के मुताबिक वो अपने स्कूल में 2012 के बाद से लगातार राउंडअप का इस्तेमाल कर रहे थे। 2014 में उन्हें कैंसर हुआ। 2016 में उन्होंने कंपनी पर मुकदमा करते हुए उसे कैंसर के लिए जिम्मेदार बताया था, जिसमें उन्हें जीत हासिल हुई।

गांव कनेक्शन ने पिछले दिनों कीटशानकों के परिणामों को लेकर विशेष सीरीज की थी, जिसमें बताया गया था कैसे भारत में धडल्ले से कीटनाशक बेचे जा रहे हैं और कैसे आप के खाने को जहरीला बनाया जा रहा है।


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