जीएसटी : महिलाओं के बजट पर पड़ेगा असर, जानें, रोज़मर्रा की ज़रूरत के सामान पर लगेगा कितना टैक्स

जीएसटी : महिलाओं के बजट पर पड़ेगा असर, जानें, रोज़मर्रा की ज़रूरत के सामान पर लगेगा कितना टैक्समहिलाओं को महंगाई की चिंता, बजट पर पड़ेगा असर। फोटो- नाजनीन

लखनऊ। पिछले कुछ दिनों में सबसे ज्यादा सुना जाने वाला शब्द जीएसटी है। जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) के चर्चे हर किसी की जुबान पर हैं।आम आदमी ये जानने की कोशिश में है कि उसपर जीएसटी का असर किस तरह से पड़ेगा। अर्थशास्त्रियों की मानें तो हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इस्तेमाल होने वाली ज़्यादातर चीज़ें जीएसटी लगने के बाद महंगी हो जाएंगी और इससे सबसे ज़्यादा असर पड़ेगा महिलाओं के बजट पर।

घर के राशन से लेकर फल-सब्ज़ियों, क्रीम, शैंपू, शेविंग क्रीम जैसे सामान भले ही सिर्फ महिलाएं इस्तेमाल न करती हों लेकिन इनकी ज़रूरत के हिसाब से इन्हें बाज़ार से लाना और इनका बजट बनाना ज़्यादातर घरों में महिलाओं की ही ज़िम्मेदारी होती है। अब जब जीएसटी लागू होने वाला है तो महिलाओं की चिंता भी बढ़ रही है।

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हालांकि कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जिन्हें जीएसटी के बारे में कुछ नहीं पता और इसके बारे में उन्हें ज़्यादा चिंता भी नहीं है लेकिन कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जिन्हें डर है कि जीएसटी के बाद कुछ महीनों के लिए ही सही लेकिन उनके बजट की गाड़ी पटरी से उतरेगी ज़रूर। हमने कुछ महिलाओं से बात की और जाना कि आखिर जीएसटी को लेकर उनकी क्या राय है और वो आने वाले महीने में किस तरह से अपना बजट मैनेज करेंगी -

ऐसा सुनने में आ रहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद पैकेट बंद खाने का सामान महंगा हो जाएगा।
कंचन श्रीवास्तव, गृहणी

लखनऊ के गोमती नगर में रहने वाली कंचन श्रीवास्तव कहती हैं, “ऐसा सुनने में आ रहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद पैकेट बंद खाने का सामान महंगा हो जाएगा। पैकेट में आने वाला आटा, बेसन, दाल सब महंगा हो जाएगा और खुला हुआ सामान जीएसटी के दायरे से बाहर रहेगा।”

वह कहती हैं कि मैं अपने परिवार के लोगों की सेहत का ख्याल रखते हुए हमेशा पैकेट बंद राशन ही खरीदती थी। मुझे ऐसा लगता है कि खुले सामान में मिलावट होने के चांसेज ज़्यादा रहते हैं। मैंने इसके लिए अपना एक बजट तय किया था।

कंचन बताती हैं कि जब एक-दो चीजें महंगी होती हैं तो हम मैनेज कर लेते हैं लेकिन अब जब रोज़ की ज़रूरत की ज़्यादातर चीज़ें महंगी हो जाएंगी तो परेशानी तो होगी हो। ऐसे में मज़बूरी में मुझे खुला सामान ही लेना पड़ेगा। मुश्किल तो यह भी है कि कोई भी सरकार हमें इस बात की गारंटी नहीं देती कि हमें वो मिलावट रहित सामान दिलाएगी।

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लखनऊ की एलडीए 2 कॉलोनी में रहने वाली प्रिया सक्सेना जीएसटी के बारे में बात करते हुए कहती हैं, “अक्सर कहा जाता है कि महिलाओं के लिए तो बस ब्यूटी प्रोडक्ट्स सस्ते हो जाएं, उन्हें और कुछ नहीं चाहिए नहीं लेकिन ऐसा नहीं है। बच्चों की ज़रूरत के सामान से लेकर राशन, कपड़े, दवाएं हर चीज़ का हिसाब-किताब हमें ही देखना पड़ता है।”

प्रिया बताती हैं कि मेरे पति प्राइवेट नौकरी करते हैं। उनकी सैलरी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। बस महंगाई बढ़ रही है। इसका असर बेशक हमारे बजट पर पड़ेगा। हम अपनी सुख-सुविधाओं की चीज़ों में तो कटौती कर सकते हैं लेकिन ज़रूरत की चीज़ों में नहीं। मुझे ऐसा लगता है कि जीएसटी लागू होने के बाद हमारा खर्चा निश्चित तौर पर बढ़ेगा और इसका असर हमारी बचत पर पड़ेगा। पहले हम महीने में जो बचत करते थे अब उसमें ही कमी करनी पड़ेगी।

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बरेली कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग की प्रोफेसर रीना अग्रवाल बताती हैं कि हालांकि जीएसटी से रोज़मर्रा की ज़रूरत की कुछ चीज़ें महंगी होंगी लेकिन इनका बहुत ज़्यादा असर महिलाओं के बजट पर नहीं पड़ेगा। हाल ही में सरकारी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ मिला है जिससे उनकी सैलरी बढ़ी है तो उन पर ज़्यादा फर्क नहीं पड़ेगी, लेकिन जो लोग प्राइवेट नौकरी में हैं उनको या मज़दूर वर्ग को मुश्किल हो सकती है।

केंद्र सरकार की यह नीति है कि लोगों के पैसे का सर्कुलेशन होता रहे, लोग उसे बचाकर न रखें। जीएसटी लागू होने से लोगों की बचत कम होगी। जिनकी आमदनी नहीं बढ़ी है, उनका भी खर्च बढ़ेगा। ऐसे में उनको अपनी बचत में ही कटौती करनी पड़ेगी।
रीना अग्रवाल, प्रोफेसर, अर्थशास्त्र विभाग, बरेली कॉलेज

महिलाओं की ज़रूरत की इन चीज़ों पर लगेगा इतना टैक्स

5 प्रतिशत टैक्स स्लैब

खाने वाला तेल, चीनी, कॉफी, चाय, फिश फिलेट, ब्रांडेड पनीर, फ्रोजन सब्जियां, मसाले, रस, क्रीम, साबूदाना, पिज्जा ब्रेड, पैक्ड पनीर, स्किम्ड मिल्ड पाउडर जैसी चीज़ों पर सिर्फ 5 प्रतिशत का टैक्स लगेगा।

12 प्रतिशत टैक्स स्लैब

12 फीसदी टैक्स स्लैब में कुछ ब्यूटी प्रोडक्ट्स, अचार, मस्टर्ड सॉस, टॉपिंग स्प्रैड, इंस्टेंट फूड मिक्स, मक्खन, घी, बादाम, पैक्ड नारियल पानी, चटनी, मुरब्बा सॉस, फ्रूट जूस, भुजिया, नमकीन, फ्रोजन मीट प्रोडक्ट्स, बटर, पैकेज्ड ड्राई फ्रूट्स, टूथ पाउडर, अगरबत्ती जैसे ज़रूरी आइटम्स को रखा गया है।

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18 प्रतिशत टैक्स स्लैब

टूथपेस्ट, हेयर ऑयल, साबुन, पास्ता, कॉर्न फ्लैक्स, सूप, जैम, आइसक्रीम, इंस्टैंट फूड मिक्सेज, मिनरल वॉटर, फ्लेवर्ड रिफाइंड शुगर, पास्ता, पेस्ट्रीज और केक, प्रिजर्व्ड वेजिटेबल्स पर 18 फीसदी टैक्स लगाए जाने का निर्णय किया गया है।

28 प्रतिशत टैक्स स्लैब

चौंकने वाली बात यह है कि हेयर शैम्पू, डिश वॉशर, हेयर क्लिपर्स जैसी ज़रूरी चीज़ों को लग्ज़री आइटम श्रेणी में रखते हुए इन पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है। महिलाओं के लिए अहम मानी जाने वाली और कई महिलाओं के रोजगार का साधन कही जाने वाली सिलाई मशीन को भी लग़्जरी आइटम मानते हुए इस पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है।

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इन पर नहीं लगेगा टैक्स

खुला पनीर, बटर मिल्क, दही, शहद, फल और सब्जियां, फ्रेश मीट, फिश चिकन, अंडा, दूध, खुला आटा, खुला बेसन, खुली दालें, खुला मैदा, खुले अनाज, ब्रेड, प्रसाद, नमक, फूल झाड़ू, गुड़, पापड़, बिंदी, सिंदूर, चूड़ियां और हैंडलूम जैसे रोजमर्रा के सामान जीएसटी से बाहर रखे गए हैं।

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