आपातकाल जैसे हालात, किसानों की बात सरकार सुनना ही नहीं चाहती

आपातकाल जैसे हालात, किसानों की बात सरकार सुनना ही नहीं चाहतीसड़कों पर उतरे किसान।

राजस्थान विधानसभा को घेरने के लिए हजारों की संख्या में किसान जयपुर की ओर कूच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार का रूख सही नहीं रहा तो आंदोलन उग्र रुप भी ले सकता है।

राजस्थान की सरकार के खिलाफ किसानों ने बिगुल फूंक दिया है। राजस्थान विधानसभा को घेरने के लिए हजारों की संख्या में किसान जयपुर की ओर कूच कर रहे हैं। उग्र आंदोलन के मद्देनजर राजस्थान सरकार ने दो दिन पहले ही किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमराराम सहित पेमाराम और 80 से ज्यादा किसान नेताओं को 28 फरवरी तक जेल में डाल दिया है।

कर्जमाफी को लेकर हजारों किसान सड़क पर उतर आए हैं। आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है। सैकड़ों किसानों को गिरफ्तार भी किया गया है। गुरुवार को विधानसभा में किसानों की गिरफ्तारी का मामला गूंजा। शुक्रवार को भी प्रदेश के कई जिलों में किसानों ने सड़क जाम कर दिया है। किसान संगठनों की मांग है कि गिरफ्तार नेताओं को अगर छोड़ा नहीं गया तो शनिवार को पूरे प्रदेश की सड़कें जाम की जाएंगी।

वहीं गुरुवार को विधानसभ में विपक्ष ने कहा कि किसानों के शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाया जा रहा है। राजस्थान के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्णय के बाद किसानों को महापड़ाव की अनुमति नहीं थी।

इसके बावजूद किसानों ने आंदोलन किया। उन्हें 20 फरवरी को समझाया गया था। लेकिन उनके नहीं मानने पर 179 लोगों को न्यायिक हिरासत में लिया गया है। इनमें से 17 को जमानत दी गई है। इस बारे में किसान सभा के कोषाध्यक्ष गुरुचरण सिंह ने कहा "आपातकाल जैसा दौर चल रहा है। किसानों की बात सरकार सुनना तक नहीं चाहती। सरकार ने हमारे कार्यालय समेत पूरे प्रदेश को छावनी में बदल दिया। किसान सड़कों पर सो रहे हैं। सरकार को औरतों पर भी रहम नहीं है।"

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वहीं, संयुक्त सचिव संजय माधव ने एक प्रेस कॉफ्रेंस में कहा कि प्रदेश में लाखों किसान जयपुर कूच पर निकले थे. भाजपा सरकार ने किसानों को रोक तो दिया है, लेकिन यही किसान भाजपा को अगले चुनाव में विधानसभा में आने के रास्ते को रोक देगी।

बता दें कि विधानसभा के बाहर किसानों ने गुरुवार को महापड़ाव की घोषणा कर रखी थी। जिसके चलते देशभर से किसान जयपुर आ रहे हैं। शुक्रवार को भी किसान धरने पर बैठे हैं। पुलिस उन्हें रोकने का प्रयास कर रही है। सड़कों पर गाड़ियों की कई किलोमीटर लम्बी कतारें लगी हुई हैं।

बीकानेर के किसान प्रतिनिधि भारत कासवं ने बताया “किसान अभी सड़कों डटे हुए हैं। अाज अगर गिरफ्तार नेताओं और किसानों को नहीं छोड़ा गया तो शनिवार को पूरे प्रदेश में चक्काजाम लगाया जाएगा। हम सरकार के सामने झुकेंगे नहीं।”

हटवाड़ा रोड पर किसान भवन बना छावनी

हटवाड़ा रोड पर किसान भवन बना छावनी विधानसभा के बाहर किसानों ने गुरुवार को महापड़ाव की घोषणा कर रखी थी। ऐसे में प्रदेश के कई इलाकों से आए किसानों का जमघट हटवाड़ा के यहां अखिल भारतीय किसान सभा के कार्यालय पर सैकड़ों की संïख्या में किसान जमा हो गए। पुलिस ने किसान भवन को चारों ओर से घेरकर किसानों को विधानसभा जाने से रोक दिया। यहीं पर किसानों ने सभा की और गिरफ्तारी दी। किसान सभा के कोषाध्यक्ष गुरुचरण सिंह मोड ने कहा कि सरकार ने आपातकाल जैसा दौर चला रखा है। किसान हो या फिर जनता को अपनी बात रखने और सरकार का विरोध करने का अधिकार है। सरकार हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है।

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ढाई करोड़ किसान परेशान-कांग्रेस

विधानसभा में कांग्रेस के गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि प्रदेश का ढाई करोड किसान परेशान है। उसको फसल का दाम नहीं मिल रहा है। भाजपा ने सुराज संकल्प यात्रा के दौरान किसानों को उनकी मांगे पूरी करने का आश्वासन दिया था। सरकार ने 2017 में किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं दिलाकर करीब 32 अरब रुपए का नुकसान किया है। कर्जमाफी के नाम पर सरकार ने किसानों से छलावा किया।

सीकर में किसानों के आंदोलन के बाद सरकार ने सिर्फ कमेटी कमेटी बनाने का खेल किया। अधूरी कर्जमाफी की घोषणा से आहत किसानों ने आंदोलन करना चाहा तो सरकार ने उसे भी कुचलने का काम किया। आज सरकार ने किसानों का जयपुर में प्रवेश बंद कर दिया है। जगह-जगह नाकाबंदी कर किसानों को गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अघोषित आपातकाल जैसे हालात पैदा कर दिए हैं।

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