देवरिया, मुजफ्फरपुर और भी हैं, लेकिन अभी घटना के इंतजार में है प्रशासन !

देवरिया और मुजफ्फरपुर तो बानगी मात्र है। जांच की जाए तो न जाने कितनी मासूम जिंदगियां घुटती मिल जाएंगी। हम चेतते तब हैं जब मामला हाथ से निकला जाता है, अनहोनी हो चुकी रहती है।

देवरिया, मुजफ्फरपुर और भी हैं, लेकिन अभी घटना के इंतजार में है प्रशासन !हरदोई के शेल्टर होम में जांच करते डीएम पुलकित खरे

लखनऊ। देवरिया के विंध्यवासिनी बालिका गृह से भागी एक बच्ची ने महिला पुलिस थाने में जाकर अंदर की करतूतों को पर्दाफाश कर दिया। लेकिन वहां का क्या जहां से लड़कियां भाग नहीं पातीं या डर के मारे में अपने साथ हो रही ज्यादतियों का विरोध नहीं कर पातीं। देवरिया और मुजफ्फरपुर तो उदाहरण मात्र है। जांच की जाए तो न जाने कितनी मासूम जिंदगियां घुटती मिल जाएंगी। हम चेतते तब हैं जब मामला हाथ से निकला जाता है, अनहोनी हो चुकी रहती है।

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पिछली सरकार में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोती नगर के नारी संरक्षण गृह में तीन संवासियों के गर्भवती होने पर खूब बवाल मचा था। प्रमुख सचिव (महिला एवं परिवार कल्याण) रेणुका कुमार सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के माध्यम से प्रदेशभर में 58 राजकीय संरक्षण गृह संचालित होते हैं। जबकि निजी संस्थाओं के जरिए 175 संरक्षण गृह चल रहे हैं। इनमें से कुछ संरक्षण गृह बंद भी हो चुके हैं।

हरदोई के शेल्टर होम से गायब मिली 19 महिलाएं

शासनादेश आने के बाद हरदोई जिले के डीएम पुलकित खरे जब बेनीगंज के शेल्टर होम जांच करने पहुंचे तो वहां से 19 महिलाएं गायब मिलीं। ये खुलासा तब हुआ जब उन्होंने रजिस्टर देखा। शेल्टर होम के रजिस्टर में 21 महिलाओं के नाम दर्ज थे, लेकिन वहां केवल 2 महिलाएं ही मौजूद थीं। जिसके बाद डीएम ने शेल्टर होम को मिल रही अनुदान राशि पर रोक लगाने की सिफारिश की है।


इस शेल्टर होम का संचालन आयशा ग्रामोद्योग समिति द्वारा किया जाता है। इस बारे में डीएम पुलकित खरे ने बताया कि हमने शेल्टर होम को मिल रहे सभी प्रकार के अनुदान को तत्तकाल रोकने की सिफारिश की है। आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।

फैजाबाद में लापरवाही के बाद भी खामोशी

शासन से दिशा निर्देश के बाद सोमवार को फैजाबाद जिले के संरक्षण गृहों की जांच की गई। इस बारे में जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास सिंह ने बताया कि महिला संरक्षण गृह में अभी 50 महिलाएं और तीन बच्चों को रखा गया है जबकि यहां क्षमता 25 महिलाओं की ही है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्षमता से ज्यादा भेड़-बकरियों की तरह इंसानों को क्यों रखा गया है। वहीं किशोर संप्रेक्षण गृह में 139 किशोर रखे गए हैं जबकि इसकी क्षमता भी 50 की ही है। बावजूद इसके प्रोबेशन अधिकारी ने सबकुछ ठीक बताया है।

लखीमपुर में भी मिली खामियां

सोमवार को एसडीएम सुनंदू सुधाकरन और सीओ प्रदीप यादव ने पलिया स्वधार गृह का निरीक्षण किया। डॉ. राजेंद्र प्रसाद नारी संरक्षण गृह पहुंचे अधिकारियों को कई खामियां मिलीं। हालात ऐसे हैं कि वहां दिव्यांग को बतौर गार्ड रखा गया है। सीसीटीवी का मॉनिटर बंद मिला, विजिटर्स का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। वहां के प्रशासन के अनुसार लोगों का आना-जाना शाम बजे तक ही होता है, जबकि आरोप है कि लोग देर शाम तक आते रहते हैं।

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ठक्कर बाबा सेवाश्रम के नाम से संचालित ये स्वाधार गृह नेपाल सीमा के ज्यादा दूर नहीं है। यहां 23 संवासिनी हैं जबकि इसकी क्षमता 20 की ही है। इस बारे में एसडीएम ने बताया कि मिली खामियों को संचालक को चेतावनी दी गई है और मिली खामियों को जल्द दुरुस्त करने को भी कहा। इससे ज्यादा चेतावनी तो देवरिया के संरक्षण गृह को भी दिया गया था।


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