ख़बर जो सवाल खड़े करती है : भारत में दूध उत्पादन तो खूब हो रहा है लेकिन पीने को नहीं मिल रहा है

Diti BajpaiDiti Bajpai   10 Sep 2017 4:50 PM GMT

ख़बर जो सवाल खड़े करती है : भारत में दूध उत्पादन तो खूब हो रहा है लेकिन पीने को नहीं मिल रहा है337 ग्राम प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता को देश में वर्ष 2022 तक 500 ग्राम करने का लक्ष्य ।

लखनऊ। सरकार वर्ष 2022 तक मौजूदा प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 337 ग्राम को बढ़ाकर 500 ग्राम करना चाहती है, लेकिन देश में दुधारु पशुओं में घटती दूध उत्पादक क्षमता, सरकार की उम्मीदों पर पानी फेर सकती है। भारत में 2020 तक सालाना दूध उत्पादन में 30 लाख टन की कमी आने की संभावना जताई गई है।

एसोचैम द्वारा ‘भारतीय डेयरी उद्योग की विकास संभावना’पर किए गए अध्ययन में कहा गया है, दुनिया में विशालतम दूध उत्पादक होने के बावजूद भारत में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 337 ग्राम प्रतिदिन है। दुनिया के अन्य देशों न्यूजीलैंड में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 9,773 ग्राम, आयरलैंड में 3,260 ग्राम और डेनमार्क में 2,411 ग्राम है। मगर हमारे देश में एक आदमी को औसतन 335 ग्राम ही दूध मिल पाता है। जबकि सामान्य परिस्थितियों में एक बच्चों को दस साल तक की उम्र तक कम से कम एक लीटर दूध पीना चाहिए।

बाराबंकी से 30 किमी दूर बंकी ब्लॉक के जरहरा गाँव के पशुपालक राधे रमन।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से 30 किमी दूर बंकी ब्लॉक के जरहरा गाँव के पशुपालक राधे रमन (34 वर्ष) बताते हैं, “"एक भैंस पर रोजाना 200 रुपए का खर्चा आता है, लेकिन दूध कम होने से लागत तक नहीं निकल पाती है। अब गाय-भैंस को पालना मुश्किल हो गया। भूसे के दाम बढ़ जाते हैं, लेकिन दूध के दाम कभी नहीं बढ़ते है।“ राधे रमन के पास सात भैंस है, जिनसे रोजाना 20 से 25 लीटर दूध का उत्पादन होता है।

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वहीं, पशुधन, मत्स्य और लघु सिंचाई कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल बताते हैं, “खुरपका-मुंहपका बीमारी से का असर दूध उत्पादन पर पड़ता है, इसके लिए सरकार बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चला रही है। इसके अलावा नस्ल सुधार और दूध उत्पादक क्षमता को बढ़ाने के लिए सेक्स सीमन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें बछिया पैदा हो रही है। इससे दूध उत्पादन तो बढ़ेगा तो पशुपालक को भी दूध मिलेगा।"

"उत्तर प्रदेश में प्रति गाय दुग्ध उत्पादन ढ़ाई लीटर और प्रति भैंस दुग्ध उत्पादन साढ़े चार लीटर है। सरकार लगातार दूध उत्पादन क्षमता को बढ़ाने का प्रयास कर रही है ताकि प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता को बढ़ाया जा सके। स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा देने के गोकुल मिशन, ब्रीडिंग की राष्ट्रीय योजना और राष्ट्रीय डेयरी प्लान जैसी योजनाएं चलाई जा रही है।" उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद् के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बलभद्र सिंह आगे बताते हैं, "बरेली के मुरिया मुकरम में पशु उत्थान के लिए वर्ण संकर केंद्र की स्थापना की जा रही है। केंद्र में मुख्य चार नस्ल (हरियाणा, साहीवाल, थारपारकर और गंगातीरी) के भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक से उत्थान किया जाएगा।"

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राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 877 और पंजाब में 1032 ग्राम है। इन राज्यों में दूध उपलब्धता अच्छा होने का कारण बताते हुए डॉ. सिंह कहते हैं, "हरियाणा और पंजाब में उच्च गुणवत्ता के पशु हैं। वहां प्रति गाय दुग्ध उत्पादन चार लीटर और प्रति भैंस दुग्ध उत्पादन आठ लीटर है। पशुओं को नियमित टीकाकरण संतुलित आहार और समय में चारा पानी करते हैं, जिससे उनके यहां उत्पादन ज्यादा और प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता भी अच्छी है। पिछले कुछ वर्षों से नस्ल सुधार पर सरकार भी प्रयास कर रही है।“

भारत में अभी सालाना 16 करोड़ (वर्ष 2015-16) लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है।

"हमारे यहां रोज 15 लीटर दूध होता है। हम लोग पानी नहीं मिलाते लेकिन जिनको दूध बेचते हैं, वो पानी मिलाकर 15 से 20 लीटर कर लेते हैं और मंहगे दामों पर भी बेच देते हैं।" ऐसा बताते हैं, बंकी के पुशपालक शंकर कुमार (65 वर्ष)। शंकर के पास चार भैंस है। शंकर आगे बताते हैं, “इनको खिलाने पिलाने में ज्यादा खर्चा है जहां पहले हमारे गाँव के हर घर में एक पशु था वहीं अब इसको लोग बोझ समझने लगे है।"

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देश में 68 फीसदी दूध मिलावटी

सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) के अध्ययन के अनुसार, देश में 68 फीसदी दूध मिलावटी है। इसमें 33 फीसदी दूध पैकेट में बंद कर बेचने वाली कंपनियों का है। उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन 7.71 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, जो देश के दूध उत्पादन का करीब 18 फीसदी है, फिर भी उत्तर प्रदेश सिंथेटिक (कृत्रिम) दुग्ध उत्पादन में सबसे आगे है। वहीं देश में सर्वाधिक नकली दूध भी उत्तर प्रदेश राज्य में तैयार किया जाता है।

छह करोड़ पशुपालकों की जीविका का साधन

भारत में अभी सालाना 16 करोड़ (वर्ष 2015-16) लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। इसमें 51 प्रतिशत उत्पादन भैंसों से 20 प्रतिशत देशी प्रजाति की गायों से और 25 प्रतिशत विदेशी प्रजाति की गायों से आता है। शेष हिस्सा बकरी जैसे छोटे दुधारू पशुओं से आता है। देश के इस डेयरी व्यवसाय से छह करोड़ किसान अपनी जीविका कमाते हैं।

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हमारी कोशिश पूरी

खुरपका-मुंहपका बीमारी से का असर दूध उत्पादन पर पड़ता है, इसके लिए सरकार बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चला रही है। इसके अलावा नस्ल सुधार और दूध उत्पादक क्षमता को बढ़ाने के लिए सेक्स सीमन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें बछिया पैदा हो रही है। इससे दूध उत्पादन तो बढ़ेगा तो पशुपालक को भी दूध मिलेगा।

एसपी सिंह बघेल, कैबिनेट मंत्री, पशुधन, मत्स्य और लघु सिंचाई

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योजनाओं से मिलेगा बढ़ावा

उत्तर प्रदेश में सरकार लगातार दूध उत्पादन क्षमता को बढ़ाने का प्रयास कर रही है ताकि प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता को बढ़ाया जा सके। स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा देने के गोकुल मिशन, ब्रीडिंग की राष्ट्रीय योजना और राष्ट्रीय डेयरी प्लान जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। बरेली के मुरिया मुकरम में पशु उत्थान के लिए वर्ण संकर केंद्र की स्थापना की जा रही है।

डॉ. बलभद्र सिंह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद्

इन राज्यों की स्थिति निराशाजनक

राज्य प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता

झारखंड 152 ग्राम

उत्तराखंड 434 ग्राम

छत्तीसगढ़ 133 ग्राम

दिल्ली 36 ग्राम

पश्चिम बंगाल 145 ग्राम

त्रिपुरा 109 ग्राम

तमिलनाडु 283 ग्राम

उड़ीसा 124 ग्राम

नागालैंड 89 ग्राम

मिजोरम 57ग्राम

मेघालय 83ग्राम

मणिपुर 76 ग्राम

महाराष्ट्र 239 ग्राम

मध्य प्रदेश 428 ग्राम

केरल 200 ग्राम

कर्नाटक 282 ग्राम

बिहार 219 ग्राम

असम 70 ग्राम

अरुणाचल प्रदेश 105 ग्राम

आंध्र प्रदेश 475 ग्राम

(राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के वर्ष 2015-16 के आंकड़ों के अनुसार)

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