रवांडा से होगी भारत के खुशबूदार रिश्तों की शुरूआत 

Ajay MishraAjay Mishra   1 Nov 2017 7:58 PM GMT

रवांडा से होगी भारत के खुशबूदार रिश्तों की शुरूआत रवांडा में मौजूद कन्नौज एफएफडीसी के अधिकारी अधिकारी व अन्य लोग। 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कन्नौज। भारत के खुशबूदार रिश्ते अब विदेशों से और बेहतर होंगे। यहां की तकनीक इजाद कर फसलों से वह लाभ कमाएंगे। रवांडा से प्रशिक्षण लेने के लिए कुछ लोग आए भी थे और आगे भी आते रहेंगे। दो सदस्यीय अधिकारियों का दल एक सप्ताह बाद खेती की बारीकियां बताने के बाद लौट भी आया है।

कन्नौज में सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) है। मुख्य रूप से यहां पर इत्र और पान-मसाला बनाने में प्रयोग करने वाली फसलों को उगाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही अगरबत्ती आदि का भी।

एफएफडीसी के प्रधान निदेशक शक्ति विनय शुक्ल बताते हैं, ‘‘एक सप्ताह का टूर कर मैं रवांडा से लौटा हूं। रवांडा की राजधानी किगाली में है जो यहां से करीब 4,000 किमी दूर है। वहां नेशनल एग्रीकल्चरर एक्सपोर्ट डवलमेंट बोर्ड (एनएईबी) के सीईओ एबी कयोन्गा से मुलाकात हुई। हम लोगों को ईएसएस स्वाइल लि. की ओर से रवांडा बुलाया गया था।’’

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प्रधान निदेशक आगे बताते हैं, ‘‘रवांडा की महिला किसान लिंडा कलिम्बा ने 117 एकड़ जमीन में लेमनग्राम, जिलेनियम व पचैली की खेती षुरू की है। इनसे निकलने वाला तेल परफ्यूम और पान-मसाला आदि बनाने में काम आता है। जिलेनियम गुलाब का विकल्प है।’’

कुछ महीने पहले एफएफडीसी में एक प्रशिक्षण दिया गया था। उसमें रवांडा के ही डिजरे नाम के एक व्यक्ति को प्रशिक्षक बनाया गया। जो वहां तकनीकि रूप से फसलों की देखभाल करता है। उस प्रशिक्षक से मुलाकात भी हुई और उसने अच्छा बताया। प्रधान निदेषक आगे यह भी कहते हैं कि विदेश जाने का मकसद रिसर्च करना, किस-किस क्षेत्र में ट्रेनिंग देना, खेती कैसे करना, डिस्टिलेशन यूनिट और आगे क्या-क्या करना इस पर विचार हुआ।’’

इसके अलावा मिलकर अच्छा काम करने पर भी चर्चा हुई। वहां के लोगों ने ट्वीट भी किया कि एफएफडीसी के अफसरों के आने से काफी जानकारी मिली है। हम लोग मिलकर विजिट कर अच्छा काम करेंगे।

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प्रधान निदेशक ने बताया कि ‘‘रवांडा में यूकेलिप्टस, गेंदा और टीटरी के पौधे आदि भी थे। लेकिन वहां के लोग इसके बारे में नहीं जानते थे। हम लोगों ने बताया कि इससे ऑयल निकलता है। इसका काम शुरू करो।’’

उन्होंने आगे बताया कि ‘‘वहां के सीनियर, मिडिल लेवल मैनेजर और यूथ यहां आएंगे। सुगंधित पौधे हो सकते हैं इस संबंध में रिसर्च करेंगे। प्रषिक्षण भी दिया जाएगा। हर क्षेत्र में भविष्य में टेस्टिंग बनाने की आवष्यकता है जो वहां नहीं है। कैसे फसल होगी टेस्टिंग, बोर्ड बनाना। हर स्तर पर एक एमओयू साइन होने को है। इसका प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा।”

ये है रवांडा की खासियतें

विजिट पर जाने वाले एफएफडीसी के सहायक निदेशक एपी सिंह बताते हैं, ‘‘रवांडा में जीनोसाइड हुआ था, इसका मतलब एक वर्ग का जीन खत्म कर दिया गया था। इससे करीब 20 लाख लोग मार दिए गए थे। वर्ष 1994 में देश बना है। रमांडा में कोई भी व्यक्ति बेकार नहीं है और न ही रहने दिया जाता है। सफाई बहुत रहती है चाहे निजी जगह हो या सार्वजनिक। अगर कोई पैदल सड़क पार कर रहा है तो दूर ही दूसरा वाहन चालक रोक देता है। बाइकें टैक्सी के रूप में काम करती हैं। पीछे बैठने वाली सवारी को भी हेल्मेट लगाना पड़ता है। चालक को यूनिफार्म भी पहननी पड़ती है।’’

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