वो नृत्यांगना जिसने दुनिया भर में दिलायी शास्त्रीय नृत्य को पहचान, गूगल डूडल के जरिए उन्हें कर रहा याद 

वो नृत्यांगना जिसने दुनिया भर में दिलायी शास्त्रीय नृत्य को पहचान, गूगल डूडल के जरिए उन्हें कर रहा याद 

वो शास्त्रीय नृत्यांगना जिसने पांच साल की छोटी सी उम्र में तय कर लिया था कि वो नृत्यांगना बनेंगी, आज उन्हीं का जन्मदिन है, गूगल, डूडल बनाकर उन्हें याद कर रहा है।

डूडल में मृणालिनी छतरी पकड़े और पृष्ठभूमि में कुछ नृत्यांगनाएं नृत्य करती नजर आ रही हैं। मृणालिनी का जन्म 11 मई 1918 को केरल में हुआ था। उन्होंने अपनी नृत्य कला की शुरुआत स्विट्जरलैंड से की जहां डैलक्रूज स्कूल में वह नृत्य की पश्चिमी तकनीक से वाकिफ हुईं।

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इसके बाद वह शिक्षा प्राप्त करने शांतिनिकेतन गईं जहां रबींद्रनाथ टैगोर की छत्रछाया में उन्होंने अपने जीवन का मतलब समझा। वह थोड़े समय के लिए अमेरिकन एकेडमी ऑफ ड्रामैटिक आर्ट्स भी गईं और वापस लौटने पर मीनाक्षी सुंदरम पल्लिई से दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम, गुरू ठकाजी कुंजु कुरूप से कथकली और अमूबी सिंह से मणिपुरी के गुर सीखे।

अपनी ऑटोबायोग्राफी द वायस ऑफ हार्ट में मृणालिनी ने खुलासा किया है कि पांच साल की उम्र में ही उन्होंने अपनी मां से कह दिया था कि मैं एक डांसर हूं। उन्होंने देश और विदेश दोनों में अपने नृत्य से लोगों का दिल जीता और उनकी इस लोकप्रियता का ही नतीजा है कि सर्च इंजन ने उन्हें डूडल बना याद किया है।

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मृणालिनी ने भारतीय भौतिक विज्ञानी विक्रम साराभाई से विवाह, किया जिन्हें भारतीय अंतरक्षि कार्यक्रम का जनक माना जाता है। उनका एक बेटा कार्तिकेय साराभाई और एक बेटी मलिका साराभाई है।

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