'जहरीली दाल' के आयात की सरकार करेगी जांच, लोकसभा में उठा मुद्दा

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ग्लाइफोसेट को कैंसर के संभावित कारणों में शामिल किया है। इस समय अमेरिका की मशहूर एग्रो केमिकल कंपनी मॉन्सेंटो पर ग्लाइफोसेट आधारित खरपतवारनाशक बनाने को लेकर सैकड़ों मुकदमे चल रहे हैं।

जहरीली दाल के आयात की सरकार करेगी जांच, लोकसभा में उठा मुद्दा

नई दिल्ली। खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि वह ऐसी आयातित दालों के विषय को देखेंगे जिन पर ग्लाइफोसेट नामक केमिकल का उपयोग हुआ हो। सोमवार को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान बीजेडी के भतृहरि महताब ने इस विषय को उठाया था। उन्होंने कहा था कि देश में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, म्यांमार समेत कुछ अफ्रीकी देशों से दालों का आयात हो रहा है। इनमें से कुछ दाल ऐसी है जिसे उगाते समय ग्लाइफोसेट नाम के खरपतवारनाशक का इस्तेमाल किया गया है।

ग्लाइफोसेट को मनुष्यों के लिए हानिकारक माना जाता है। बीजेडी नेता ने मांग की कि देश की आयात नीति को सख्त बनाया जाना चाहिए ताकि जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस पर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा, "हम इस विषय को देखेंगे। किसी भी स्थिति में लोगों का स्वास्थ्य खतरे में नहीं आना चाहिए।"

ग्लाइफोसेट की वजह से मॉन्सेंटो पर चल रहा है मुकदमा

गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ग्लाइफोसेट को कैंसर के संभावित कारणों में शामिल किया है। इस समय अमेरिका की मशहूर एग्रो केमिकल कंपनी मॉन्सेंटो पर ग्लाइफोसेट आधारित खरपतवारनाशक बनाने को लेकर सैकड़ों मुकदमे चल रहे हैं। मॉन्सेंटो ने 1970 के दशक में राउंडअप नामका खरपतवारनाशक बनाया था जिसमें मुख्य तत्व ग्लाइफोसेट था। हालांकि मॉन्सेंटो इस बात से इनकार करता रहा है कि ग्लाइफोसेट और कैंसर में कोई संबंध है।

अमेरिकी शहर सैन फ्रांसिस्को की अदालत इस समय ड्वेन जॉनसन नाम के एक शख्स की अपील पर सुनवाई कर रही है जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि ग्लाइफोसेट वाले राउंडअप का इस्तेमाल करने की वजह से उन्हें घातक कैंसर हो गया है। जॉनसन को लसिका ग्रंथियों से जुड़ा कैंसर है, जिससे जल्द ही उनकी मौत हो सकती है।



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