ई-कॉमर्स बाजार में महिलाओं की बढ़ती भूमिका

ई-कॉमर्स बाजार में महिलाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्योंकि, महिलाएं ई-कॉमर्स बाजार की क्षमता का प्रतिनिधित्व करती हैं। कुछ सालों पहले इंडियन ई-कॉमर्स के भीतर महिला केंद्रित ब्रांड बनाने को ज़्यादा वैल्यू नहीं दी जाती थी, क्योंकि कंपनियों ने भारतीय शहरी और ग्रामीण घरेलू महिलाओं की खरीदारी क्षमता को कम आंक लिया था।

ई-कॉमर्स बाजार में महिलाओं की बढ़ती भूमिकासाभार इंटरनेट

चंडीगढ़। शुरुआत में जब इंडिया का ई-कॉमर्स तेज़ी से आगे बढ़ रहा था तब पुरुषों को प्रथम ग्राहक के रूप में देखा जाता था। आज भी ऑनलाइन शॉपिंग में ज्यादातर प्रोफाइल 24-34 साल के पुरुषों की ही है। हालांकि, जिस तरह लगातार आर्थिक और सांस्कृतिक भावनाओं में सामाजिक विचार बदल रहे हैं, हमें उम्मीद है कि भविष्य में महिला कंज्यूमर्स का भी ई-कॉमर्स में आधा हिस्सा होगा। यह कहना है पंचकूला निवासी क्वांटिफाइड कॉमर्स के संस्थापक अगम बेरी का। अगम बेरी ने चंडीगढ़ में आयोजित एक सेमिनार के दौरान ई-कॉमर्स मार्केट में शहरी और ग्रामीण महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे बताया।

महिला सशक्तिकरण: टेंट के कारोबार ने महिलाओं को बनाया सशक्त

अगम बेरी ने बताया, औसत ग्राहक प्रोफाइल होने से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि ज्यादातर घरों में महिलाएं ही घरेलू खर्च नियंत्रित करती हैं। बहुसंख्यक में न सही लेकिन बड़ी संख्या में महिलाओं द्वारा ही घरेलू खर्चों के फैसले लिए जाते हैं। उदाहरण के लिए, भारत में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं कम से कम 44 फीसदी घरेलू खपत को नियंत्रित या प्रभावित करती हैं। शहरी इलाकों में तो ये संख्या और भी ज़्यादा हैं। नीलसन के एक स्टडी में 92 फीसदी महिलाओं ने दावा किया कि वे घरेलू खपत में मुख्य भूमिका निभाती हैं। यही नहीं नॉन-वर्किंग महिलाओं ने भी यही दावा किया। तो अगर एक भारतीय महिला नौकरी नहीं भी करती है पर इसकी पूरी संभावना है की वह घरेलू जरूरतों पर निर्णय ले रही है।

महिला सशक्तिकरण चाहते हैं तो करनी होगी पुरुषों की मदद


बेरी ने बताया भारत में ज्यादातर ई-कॉमर्स की शॉपिंग स्मार्ट फोन्स के द्वारा ही की जा रही है। 80 फीसदी भारतीय स्मार्ट फोन्स का इंटरनेट चलाने के लिए करते हैं। वो महिलाएं जिनकी व्यक्तिगत आय ज़्यादा नहीं है वो अपने फोन के बजाय अपने पुरुष मित्र या घर के सदस्यों का फोन इस्तेमाल करती हैं। ग्रामीण इलाकों में तो आज भी महिलाओं और पुरुषों की जिम्मेदारियों पर पारम्परिक नजरिया (पुराने विचार) हावी है। लेकिन, यह सोच तेजी से बदल रही है, क्योंकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं पितृ सत्तात्मक दायरों से आगे बढ़ कर और अधिक आत्मनिर्भर हो रही हैं।

अपने अवशिष्ट आय में बढ़ोतरी के चलते, भविष्य में महिलाएं भारत के बढ़ते ई-कॉमर्स बाजार में काफी योगदान देने वाली हैं। आज 30 फीसदी ऑनलाइन शॉपर्स महिलाएं हैं, जिनमें ग्रामीण महिलाओं की संख्या कम है। लेकिन, जैसे जैसे जितनी ज़्यादा ये महिलाएं मध्यम वर्ग का हिस्सा बनेगी वैसे-वैसे आने वाले कुछ सालों में यह संख्या भी बढ़ने की उम्मीद है। वर्ष 2021 तक भारत में इंटरनेट प्रयोग करने वालों की संख्या 829 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। भले ही महिलाएं इस संख्या का 30 फीसदी हैं फिर भी यह 250 मिलियन लोगों का उपभोक्ता आधारित होगा।

थाने व कोर्ट में हल नहीं होते जो मामले, 70 वर्षीय सुमित्रा सुलझाती हैं उन्हें


बेरी ने बताया कि क्वांटिफाइड कॉमर्स एक इंडियन वर्टिकली-इंटीग्रेटेड कंपनी है जो एक क्षेत्र के भीतर डिजिटली नेटिव ब्रांड्स बनाती है, जैसे महिलाओं पर केंद्रित उत्पाद। जबकि पुरुष-प्रधान इलेक्ट्रॉनिक्स सबसे बड़ा सेक्टर है। ब्यूटी सबसे तेज़ी से बढ़ता सेक्टर है। उन्होंने कहा कि ई-कॉमर्स बाजार में महिलाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्योंकि, महिलाएं ई-कॉमर्स बाजार की क्षमता का प्रतिनिधित्व करती हैं। कुछ सालों पहले इंडियन ई-कॉमर्स के भीतर महिला केंद्रित ब्रांड बनाने को ज़्यादा वैल्यू नहीं दी जाती थी, क्योंकि कंपनियों ने भारतीय शहरी और ग्रामीण घरेलू महिलाओं की खरीदारी क्षमता को कम आंक लिया था।

जैविक खाद बेचकर आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं


Share it
Share it
Share it
Top