बार-बार बदलना पड़ रहा देश का सबसे ऊंचा तिरंगा, तेज हवाएं बनी वजह

Shefali SrivastavaShefali Srivastava   28 March 2017 4:25 PM GMT

बार-बार बदलना पड़ रहा देश का सबसे ऊंचा तिरंगा, तेज हवाएं बनी वजहऊंचे झंडे लगाने से पहले ऊंचाई  पर प्रतिकूल मौसम और तेज हवाओं जैसी परेशानियों से बचाव के बारे में अध्ययन नहीं किया जाता 

लखनऊ। देश का सबसे ऊंचा तिरंगा जिसे पिछले दिनों अटारी बॉर्डर पर फहराया गया था, इन दिनों खराब मौसम की मार झेल रहा है। काफी ऊंचाई में होने की वजह से तेज हवाएं इसको नुकसान पहुंचा रही है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इसे अब तक दो बार बदला जा चुका है।

देश के सबसे ऊंचा झंडा जमीन से 355 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। 120x80 फीट नाप वाले इस झंडे की कीमत एक लाख प्रति पीस है। वहीं पांच फीट बेस के साथ इसका वजन 125 किलो है। इसे पहली बार इस साल पांच मार्च को फहराया गया था। तब इसकी काफी चर्चा हुई थी, लाहौर से यह झंडा देखा जा सकेगा, यह भी कहा गया था फिलहाल इसकी स्थापना करने वाली पंजाब सरकार के अधीन ट्रस्ट चिंता में है।

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इसकी स्थापना के प्रभारी अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पास इस समय केवल 12 अतिरिक्त झंडे हैं। यह ट्रस्ट अब इसके उपायों के बारे में विचार कर रहा है और सिर्फ विशेष आयोजन या फिर पूर्ण रूप से पैराशूट फैब्रिक वाले झंडों पर विचार कर रहा है।

अगर हमें एक महीने में पांच झंडे बदलने पड़ते हैं तो इसका मतलब है एक साल में 60 झंडे। यानी हमें पूरे साल झंडा फहराए रखने के लिए 60 लाख रुपए खर्च करने पड़ेंगे। इसे देखते हुए मैंने एक प्रस्ताव रखा है कि हम केवल विशेष मौके पर ही जैसे स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और होली, दिवाली जैसे त्योहार में ही इसे फहराएंगे। यह मसला नई गठित कमेटी के साथ मीटिंग में डिस्कस किया गया है।
राजीव शेखरी, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर, अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट

पैराशूट फैब्रिक वाले तिरंगे की लागत करीब चार लाख तक होती है, साथ ही तीन महीने की गारंटी भी होती है।

वर्तमान में जो झंडा है उसमें पैराशूट मटीरियल कपड़े के साथ सीमित क्षेत्रों में स्टिच्ड है और झंडे के बाहरी कोनों पर ही लगा हुआ है। पंजाब सरकार द्वारा गठित नई कमेटी के अधिकारियों के अनुसार, ‘अगले चरण पर जल्द ही विचार किया जाएगा।’

अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर राजीव शेखरी कहते हैं, ‘अगर हमें एक महीने में पांच झंडे बदलने पड़ते हैं तो इसका मतलब है एक साल में 60 झंडे। यानी हमें पूरे साल झंडा फहराए रखने के लिए 60 लाख रुपए खर्च करने पड़ेंगे। इसे देखते हुए मैंने एक प्रस्ताव रखा है कि हम केवल विशेष मौके पर ही जैसे स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और होली, दिवाली जैसे त्योहार में ही इसे फहराएंगे। यह मसला नई गठित कमेटी के साथ मीटिंग में डिस्कस किया गया है।’

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तिंरगे के लिए ढांचा तैयार करने वाले होशियारपुर स्थित भारत इलेक्ट्रिकल्स के कमल कोहली कहते हैं, ‘हालांकि यह देश का सबसे ऊंचा तिरंगा है फिर भी इस बारे में कोई अध्ययन नहीं किया गया कि उस ऊंचाई में प्रतिकूल मौसम में इसे कैसे सही सलामत रखा जाएगा। अब हम पूरी तरह से पैराशूट फैब्रिक पर आधारित झंडे के निर्माण पर विचार कर रहे हैं। इसके लिए मैन्यूफैक्चरर्स से बात भी कर ली है। इसकी लागत चार लाख तक आएगी और तीन महीने की गारंटी भी होगी। फिर भी इसे आजमाया जा सकता है।’

सरकार के इस पूरे प्रोजेक्ट में करीब 3.5 करोड़ रुपए की लागत आई थी।

रांची और हैदराबाद में तिरंगे भी खुद को मौसम से नहीं बचा पाए

इसके पहले झारखंड की राजधानी रांची के पहाड़ी मंदिर पर देश के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने 23 जनवरी, 2016 को 293 फुट ऊंचे खंभे पर तिरंगा फहराया था। 66 फीट लंबा और 99 फीट चौड़ा यह तिरंगा स्थायी रूप से लगाया था लेकिन हवाओं की तेज रफ्तार की वजह से यह झंडा बहुत दिन तक टिक नहीं पाया, जिसके बाद इसको उतारना पड़ा। रांची से पहले हैदराबाद के हुसैन सागर लेक के पास संजीवा पार्क में 291 फीट ऊंचा तिरंगा लगाया गया है।

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