कर्ज माफी के नियमों के सताए किसान का दर्द, ‘सरकार 40 एकड़ जमीन के बदले एक शीशी जहर ही दे दो’

कर्ज माफी के नियमों के सताए किसान का दर्द, ‘सरकार 40 एकड़ जमीन के बदले एक शीशी जहर ही दे दो’तख्ती लेकर खड़ा किसान।

स्वयं प्रजेक्ट डेस्क

लखनऊ। महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को राहत देते हुए क़र्ज़ माफी की घोषणा तो कर दी है लेकिन वे किसान चिंतित हैं जिन्हें सरकार की घोषणा का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे ही परेशान एक किसान अपने बीबी और बच्चों के साथ तख्ती लगाकर सड़क किनारे खड़े होकर अपनी तकलीफ बता रहा है। तख्ती पर मराठी में लिखा है, ‘40 एकर वावर विकणे आहे, कीमत फकत विषाची शीशी’ मतलब 40 एकड़ ज़मीन बेचनी है, कीमत सिर्फ जहर की शीशी।

कपास के लिए मशहूर महाराष्ट्र के अकोला जिले के अकोट में शिवाजी चौराहे के पास तख्ती लिए शशिकांत गैधार (38 वर्ष) सरकार से अपनी ज़मीन के बदले जहर की मांग कर रहे हैं। शशिकांत ने सरकार से कर्ज लिया हैं, लेकिन क़र्ज़ मांफी में बनाए गए नियम के कारण उनको इसका लाभ नहीं मिलेगा। इसी से परेशान होकर उन्होंने यह कदम उठाया।

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शशिकांत बताते हैं, "सरकार 2009 से 2016 तक में क़र्ज़ लिए उन किसानों का क़र्ज़ माफ किया जा रहा है, जिन्होंने क़र्ज़ लेने के बाद पैसे वापस नहीं किए है। मैं सरकार से शुरू से ही कर्ज लेता रहा हूं, लेकिन मैं समय-समय पर वापस करता रहा। आज मेरे ऊपर सरकार के साढ़े पांच लाख का कर्ज़ है। सरकार के नियम के कारण मेरा एक रुपए भी माफ नहीं होगा। इसी से परेशान होकर मैं तख्ती लगाकर सड़क किनारे खड़ा हूं।"

सिटिजन रिसोर्श एंड एक्शन इनीशिएटिव की तरफ से दायर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता में तीन जजों वाली एक बेंच किसानों की स्थिति और उसमें सुधार की कोशिशों पर सुनवाई कर रही है। इसी याचिका पर सरकार ने बताया है कि सरकार के मुताबिक हर साल 12 हजार किसान अपनी जिंदगी खत्म कर रहे हैं।

सरकार के अनुसार कर्ज में डूबे और खेती में हो रहे घाटे को किसान बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। 2015 में सबसे ज्यादा 4,291 किसानों ने महाराष्ट्र में आत्महत्या की जबकि 1,569 आत्महत्याओं के साथ कर्नाटक इस मामले में दूसरे स्थान पर है। सरकार 2013 से किसानों की आत्महत्या के आंकड़े जमा कर रही है। सरकार ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा, "2015 में कृषि क्षेत्र से जुड़े 12,602 लोगों ने आत्महत्या की। इसमें से 8,007 किसान थे और 4,595 लोग कृषि श्रमिक थे। 2015 में भारत में कुल 133623 लोगों ने आत्महत्या की जिसमें से 9.4 प्रतिशत किसान थे।"

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शशिकांत गैधार बताते हैं, "मौसम विभाग ने हमें जानकारी दी की इस बार बारिश होगी, लेकिन पिछले एक महीने में एक बूंद बारिश नहीं हुई। अभी यहां तापमान चालीस डिग्री से ज्यादा है। मौसम विभाग के कहने पर हमने कपास की खेती की, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण अब तक कपास निकला ही नहीं है। बैंक इन दिनों क़र्ज़ नहीं दे रहा है, जितने पैसे मेरे पास थे, हमने कपास और संतरे की खेती में खर्च कर दिया। इस बार बारिश नहीं होने से हमारी खेती बर्बाद हो रही है।"

शशिकांत गैधार आगे बताते हैं, "अभी घर पर खाने तक के पैसे नहीं है। साहूकारों पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। उनका लाइसेंस जब्त कर लिया गया है। अब मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा है। ‘राजा राम हो या रावण, सीता तो जनता ही है, राम वनवास छोड़ देते हैं और रावण उन्हें भगा ले जाता है।"

महाराष्ट्र के सफल किसानों में से एक आशुतोष देशमुख बताते हैं, "सरकार ने जो कर्ज माफी किया है, उससे सिर्फ कुछ किसानों को ही फायदा होगा। 2009 से 2016 तक क़र्ज़ लिए उन किसानों का क़र्ज़ सरकार माफ कर रही है, जिन्होंने क़र्ज़ लेने के बाद एक भी पैसे नहीं लौटाए। महाराष्ट्र में ज्यादातर किसान क़र्ज़ लेकर खेती करते हैं और खेती बेहतर होने पर पैसे लौटा देते हैं। सरकार सिर्फ डेढ़ लाख का ही कर्ज माफ कर रही है।"

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कर्ज मांफी को लेकर जब महाराष्ट्र के किसान सड़क पर उतरने लगे तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आनन-फानन में कर्ज मांफी की घोषणा कर दी। फडणवीस ने कहा था, "कृषि मांफी योजना का लाभ प्रदेश के 89 लाख किसानों को होगा और करीब 40 लाख किसान कर्ज मुक्त हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने उन किसानों के लिए भी राहत की बात की जो लगातार पैसे चुका रहे है। ऐसे किसानों को सरकार 25 फीसदी तक लाभ देने वाली है।"

महाराष्ट्र के अमरावती जिले के किसान आशुतोष देशमुख कहते हैं, ‘यह सरकार बस आकड़ों से खेल रही है। सरकार भले कह रही हो कि लाखों किसानों को फायदा होगा लेकिन ज़मीन पर ऐसा कुछ नहीं होने वाला है। सरकार के अनुसार एक ज़मीन पर केवल एक किसान को माफ किया जायेगा। अब दो भाई हैं, उनकी जमीन बंट गयी है तो उसमें से सिर्फ एक भाई का ही लोन मांफ होगा। सरकार सातवाँ वेतन आयोग लागू की है तो क्या उसमें भी यह प्रावधान है कि एक परिवार में सिर्फ एक परिवार को सातवें वेतन के हिसाब से पैसा मिलेगा।’

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किसान संगठन से जुड़े लक्ष्मी कान्त कौठारकर बताते हैं, ‘सरकार ने जिस तरह कर्ज मांफ किया है उससे किसानों को कोई खास फायदा नहीं हुआ है। यहां के ज्यादातर किसान डेढ़ लाख से ज्यादा कर्ज वाले है। सरकार सिर्फ डेढ़ लाख तक ही माफ कर रही है, जिससे किसानों को कुछ खास फायदा होता नहीं दिख रहा है। कर्ज माफी किसानों के साथ मजाक है। सरकार बड़े किसानों को जिनपर डेढ़ लाख से ज्यादा का क़र्ज़ है उन्हें सिर्फ पच्चीस हज़ार की छूट दे रही है। अभी कोई आंकड़ा नहीं है हमारे पास लेकिन हम इस तरह के किसानों की संख्या एकत्रित कर रहे है जिन्हें कर्ज मांफी का फायदा नहीं मिलेगा।

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