विश्व परिवार दिवस: परिवार को सुपोषित करने के लिए आंगनवाड़ी केन्द्रों पर मना सुपोषित दिवस

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बुधवार को सभी आँगनवाड़ी केन्द्रों पर सुपोषित दिवस मनाया। परिवार के सभी सदस्यों की समान पोषण की जरूरत पर बल देते हुए आंगनवाड़ी केन्द्रों में आये परिवार के सदस्यों को पोषण की महत्ता के बारे में बताया गया।

Jigyasa MishraJigyasa Mishra   15 May 2019 2:37 PM GMT

विश्व परिवार दिवस: परिवार को सुपोषित करने के लिए आंगनवाड़ी केन्द्रों पर मना सुपोषित दिवस

आरा (बिहार)। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बुधवार को सभी आँगनवाड़ी केन्द्रों पर सुपोषित दिवस मनाया जिसके अंतर्गत तीन वर्ष से छः वर्ष तक के बच्चों के माता-पिता को आंगनवाड़ी केंद्र बुलाकर पोषण के विषय में विस्तार से जानकारी दी गयी।

मंत्रालय के इस कदम को बच्चों ने गीत-संगीत के माध्यम से साकार किया जिसमे उन्होंने बाल-गीत के अलावा साफ़-सफाई की महत्ता के बारे में जानकारी भी दी। आंगनवाड़ी सेविका द्वारा अन्नप्राशन दिवस एवं गोदभराई के विषय में परिवारों को जागरूक किया गया। साथ ही महीने भर केंद्र में होने वाली विभिन्न गतिविधियों के बारे में भी सेविका द्वारा जानकारी दी गयी एवं लोगों से आग्रह किया गया कि इन तमाम गतिविधियाँ में वह अपनी सहभागिता भी सुनिश्चित करायें।

स्वस्थ भारत प्रेरक नीरज सिंह ने बताया, "बच्चों के बेहतर पोषण में माता के साथ पिता को भी जिम्मेदारी उठाने की ज़रुरत है। उन्हें सिर्फ एक ही तरह के आहार सेवन करने से बच कर, आहार में विविधता लाने कि ज़रुरत है। विविध आहार के कारण विटामिन, प्रोटीन, कार्बोहायड्रेट के साथ अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति होती है। बाल पोषण के लिए एक घन्टे के भीतर शुरूआती स्तनपान ज़रूर कराएं और साथ ही 6 माह तक सिर्फ़ स्तनपान कराएं, ऊपर से पानी भी शिशु को नहीं दें।" उन्होंने बताया कि अनुपूरक आहार के विषय में भ्रांतियों को भी दूर किया गया एवं परिवार के सदस्यों को बताया गया कि बच्चे के 6 माह होने के बाद उन्हें ऊपरी आहार देना जरुरी है। इससे बच्चे में पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक विकास होने में मदद मिलती है एवं बच्चा निरोगी भी रहता है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी आईसीडीएस रश्मि ने कहा, "सुपोषित दिवस आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य परिवार के पोषण में सुधार लाना है। कभी-कभी माता अपने बच्चों को बेहतर पोषण प्रदान करने की चिंता में अपने पोषण को नजरअंदाज कर जाती है। लेकिन एक स्वस्थ समाज निर्मित करने के लिए परिवार के सभी सदस्यों के पोषण में सुधार लाना जरुरी है।"

परिवार के सभी सदस्यों की समान पोषण की जरूरत पर बल देते हुए आंगनवाड़ी केन्द्रों में आये परिवार के सदस्यों को पोषण की महत्ता के बारे में बताया गया। बच्चों के पिता को बेटा एवं बेटी के पोषण पर समान रूप से ध्यान देने की बात कही गयी एवं उन्हें समझाया गया कि विशेषकर किशोरियों को किशोरों की तुलना में अधिक पोषण की जरूरत होती है। इसलिए किशोरियों के खान-पान का ध्यान रखते हुए सप्ताह में आंगनवाड़ी केन्द्रों पर दी जाने वाली आयरन की गोली खाने की बात बताई गयी।

अलाइव एंड थराइव के सहयोग से पटना मेडिकल महाविद्यालय एवं अस्पताल (पीएमसीएच), पटना में चिकित्सकों एवं नर्सों की मातृ, शिशु एवं छोटे बच्चों के पोषण पर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गयी। कार्यशाला के माध्यम से मातृत्व के प्रथम 1000 दिन में पोषण की महता पर विस्तार से जानकारी दी गईइस अवसर पर संस्थान के शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ ए के जायसवाल ने कहा, "मातृ, शिशु एवं छोटे बच्चों के पोषण में सुधार लाने के लिए चिकित्सकीय सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आवश्यक है। इसके लिए अस्पताल में स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में शिशुओं के साथ उनकी माताओं के पोषण पर भी ध्यान दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि इससे मातृ तथा शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में सहायता मिलेगी।"

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