लहसुन सब्ज़ी है या मसाला, अदालत में पहुंचा मामला

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लहसुन तो हम सब लोग सब्जियां बनाने में और खाने में उपयोग करते हैं, लेकिन क्या हम लोगों पता है कि लहसुन सब्जी है या मसाला। इस गंभीर सवाल का जवाब इसलिए जानना जरूरी है क्योंकि ये सवाल हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि वह बताएं कि लहसुन सब्जी है या मसाला? राज्य सरकार से यह सवाल हाई कोर्ट में दायर एक पीआईएल पर किया गया है। सरकार को एक हफ्ते के अंदर हाई कोर्ट में जवाब दायर करना है।

जोधपुर के भदवासिया आलू, प्याज और लहसुन विक्रेता संघ द्वारा यह याचिका हाई कोर्ट में दायर की गई थी। हाई कोर्ट के इस सवाल के पीछे तर्क यह है कि अगर लहसुन सब्जी है तो किसान उसे सब्जी मार्केट में बेचे और अगर मसाला है तो उसे अनाज मार्केट में बेच सके। सब्जी मार्केट में लहसुन बेचने पर टैक्स नहीं है जबकि अनाज मार्केट में लहसुन बेचने पर टैक्स लगता है।

जोधपुर के आलू-प्याज़ और लहसुन विक्रेता संघ के अध्यक्ष बंसीलाल सांखला ने बताया, "पिछले 40 साल से लहसुन को हम सब्ज़ी मंडी में बेचते आए हैं। आज तक कोई दिक्कत नहीं है। ये जरूर है कि सब्ज़ी मंडी अब छोटी पड़ गई है, लेकिन सरकार को जगह को बड़ा करने के बारे में सोचना चाहिए न कि व्यापारियों को परेशान करने के बारे में।"

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आलू, प्याज और लहसुन विक्रेता संघ की याचिका की तरफ से कहा गया कि सरकार ने लहसुन को सब्जी और मसाला दोनों श्रेणी में रख दिया है। सब्जी के रूप में लहसुन के बिकने पर जीएसटी नहीं लगता और मसाले के रूप में बेचा जाए तो जीएसटी लगता है। ऐसे में उन्हें लहसुन को किस श्रेणी में रखना है और बेचना है।

अपर महाधिवक्ता श्याम सुंदर ने कोर्ट में कहा कि राज्य सरकार ने लहसुन के कंद अनाज मार्केट में बेचने के लिए राजस्थान कृषि उत्पादन बाजार एक्ट 1962 में अगस्त 2016 में संशोधन किया था। यह संशोधन किसानों के हित में था।

राजस्थान सरकार के 2016 के नए कानून के मुताबिक लहसुन को अनाज मंडी में बेचा जाना चाहिए लेकिन 2016 से पहले तक इसे सब्ज़ी मंडी में बेचा जाता था। विक्रेताओं के मुताबिक सब्ज़ी मंडी में बेचने पर बिचौलिए छह प्रतिशत कमीशन देते हैं, लेकिन अनाज मंडी में बिचौलिए केवल दो फीसदी कमीशन देते हैं, यही लहसुन बेचने वालों की परेशानी की वजह है।

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दुनिया में 4500 वर्ष पहले लहसुन के इस्तेमाल का है प्रमाण, माना गया है सब्जी

अमरीकी कृषि विभाग के शोध के मुताबिक लहसुन का इस्तेमाल तकरीबन 5000 साल पुराना है। इस बात के इतिहास में प्रमाण है कि बेबिलोनिया के लोग 4500 साल पहले इसका इस्तेमाल करते थे। संयुक्त राष्ट्र की 2007 की एक रिपोर्ट में मुताबिक चीन में लहसुन की सबसे ज्यादा खेती होती है। लहसुन के कुल उत्पादन का 66 फीसदी हिस्सा चीन में उगाया जाता है। लहसुन की खेती में दक्षिण अफ्रीका और भारत दूसरे और तीसरे नंबर पर है। आपको जानकर आश्चर्य होगा की अमरीका का स्थान चौथा है। विश्व में इन सभी जगह की रिपोर्ट में भी लहसुन को एक सब्ज़ी ही माना गया है।

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वेजिटेबल साइंटिस्ट भी मानते हैं सब्जी

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में वेजिटेबल साइंटिस्ट डॉ. प्रीतम कालिया के मुताबिक, लहसुन मूलत: सब्ज़ी है, लेकिन इसका इस्तेमाल मसाले के तौर पर भी किया जाता है। इसको प्रोसेस कर मसाले के तौर पर ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

डॉ प्रीतम के मुताबिक, "लहसुन को बेचे जाने को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए क्योंकि ये हमेशा से सब्ज़ी मंडी में ही बिकता आया है। अनाज मंडी में इसे बेचा नहीं जाता। हमेशा से इसे सब्ज़ी के साथ सब्ज़ी के तौर पर खाया जाता है। चाहे आप इसकी चटनी बनाएँ या फिर दूसरी सब्ज़ी में डालें। इसकी खेती सब्ज़ी के रूप में ही की जाती है।"

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First Published: 2017-12-06 19:31:06.0

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