Top

क्या आलू के दाम घटने वाले हैं? कोल्ड स्टोरेज एक महीना पहले खाली कराए जाने का क्या असर होगा?

पिछले कुछ दिनों में आलू के दाम तेजी से बढ़े हैं, पिछले साल खराब मौसम की वजह से आलू उत्पादन पर असर पड़ा था, त्योहारों के दौरान कीमतों को काबू करने के कई कोशिशें हो रही हैं, क्या होगा इनका असर?

Divendra SinghDivendra Singh   30 Oct 2020 12:50 PM GMT

क्या आलू के दाम घटने वाले हैं? कोल्ड स्टोरेज एक महीना पहले खाली कराए जाने का क्या असर होगा?

प्याज, टमाटर के साथ ही पिछले कुछ महीनों में आलू भी काफी महंगा बिक रहा है। देश के कई इलाकों में फुटकर में आलू 60 रुपए किलो तक बिक गया है। बुवाई और त्योहारी सीजन में आलू के रेट कम करने और महंगाई को काबू में करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने कई कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार भूटान से 30 टन आलू मंगवा रही है तो यूपी एक महीना पहले ही कोल्ड स्टोरेज खाली करवाने के आदेश दे दिए गए हैं। कोल्ड स्टोरोज खाली करने के सवाल पर किसानों और व्यापारियों का कहना है कि इससे उनका नुकसान हो जाएगा।

भारत में आलू को सब्जियों को राजा और गरीबों की सब्जी भी कहा जाता है लेकिन पिछला लगभग पूरा साल आलू महंगा बिका है, क्योंकि पिछले साल बारिश के चलते आलू का उत्पादन ही कम हुआ था। इस साल हरी सब्जियां बाढ़ और अतिवृष्टि में चली गईं तो आलू की मांग भी बढ़ गई, जिसका असर रेट पर नजर आया है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार (30, अक्टूबर) को कहा कि त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को महंगाई का सामना न करना पड़े इसलिए भूटान से आलू मंगवाया गया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि जल्द भूटान से 30 हजार टन आलू भारत पहुंच जाएगा। उधर यूपी सरकार ने सभी कोल्ड स्टोरेज को 31 अक्टूबर तक खाली करने के निर्देश दिए हैं। वहीं पंजाब में आलू की अगैती फसल लगभग तैयार है,जिसके अगले हफ्ते आ जाने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, उद्यान मनोज सिंह ने प्रदेश के सभी कोल्ड स्टोरेज को 31 अक्टूबर के बाद कूलिंग मशीनें न चलाने और स्टोर में रखे पुराने आलू निकासी के निर्देश दिए हैं। जबकि हर साल 30 नवंबर तक कोल्ड स्टोरेज से आलू निकासी होती थी।

फर्रुखाबाद के मदर इंडिया कोल्ड स्टोर में 30 अक्टूबर तक 35 हजार पैकैट आलू रखा हुआ है। कोल्ड स्टोर के निदेशक पुनीत रस्तोगी गाँव कनेक्शन को बताते हैं, "जब किसानों को आलू का रेट मिलेगा तभी तो वो आलू ले जाएगा, हम ऐसे ही तो कोल्ड स्टोर बंद नहीं कर देंगे। हर साल 30 नवंबर तक कोल्ड स्टोर खाली होते थे, लेकिन इस बार सरकार ने 31 अक्टूबर तक ही खाली करने को कह दिया है। किसान आ रहे हैं लेकिन बहुत कम आ रहे हैं, अभी नया आलू दस दिसम्बर तक आएगा।"


उद्यान विभाग, उत्तर प्रदेश के अनुसार, प्रदेश में 1911 निजी कोल्ड स्टोर हैं, जिनकी भंडारण क्षमता 156.86 लाख मिट्रिक टन हैं।

पुनीत रस्तोगी आगे कहते हैं, "सरकार ने कहा है 31 अक्टूबर के बाद कोल्ड स्टोर में कूलिंग मशीनें बंद कर दें, इससे तो किसान और कोल्ड स्टोर दोनों का नुकसान होगा। किसान जब आलू निकालते हैं, तभी पैसे देते हैं। अभी 35 हजार पैकेट आलू रखा हुआ है। अगर कूलिंग मशीन बंद कर देंगे तो कितना नुकसान हो जाएगा।"

इस बार मौसम की वजह से आलू की बुवाई पिछड़ गई है, नवंबर में आने वाला नया आलू दिसम्बर के पहले सप्ताह तक बाजार में आएगा। पिछले बुवाई सत्र 2019-20 में भी मौसम की मार से किसानों को नुकसान हुआ था, जिसका असर इस बार भी बुवाई पर पड़ रहा है। सितम्बर 2019 में बुवाई के समय और फरवरी 2020 में आलू खुदाई के समय बारिश और ओलावृष्टि से काफी फसल बर्बाद हुई थी। इस वजह से इस बार बीज के दाम भी काफी बढ़ गए और आलू भी महंगा बिक रहा है।

देश में आलू की कीमतों को कम करने के लिए केंद्र भूटान से 30,000 टन आलू आयात किया जाएगा। उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल ने एक प्रेस कॉन्फेंस में ये जानकारी। आलू की कीमतों को लेकर पीयूष गोयल ने कहा, "आलू के आयात पर जो 30 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगती थी उस 10 लाख मीट्रिक टन का एक कोटा दिया गया है जो 31 जनवरी 2021 तक मात्र 10 प्रतिशत में आलू लाया जा सकता है। इसके तहत भूटान से 30,000 टन आलू आने वाला है, वहां बात हो गई है और इसके साथ ही विदेश से करीब 10 लाख टन आलू लाकर हम आलू के दाम भी नियंत्रित रख पाएंगे।"

ये भी पढ़ें: अधिक तापमान और महंगे बीज से आलू किसानों की बढ़ीं मुश्किलें

कानपुर के सरसौल के आलू किसान भंवर पाल सिंह सरकार के इस निर्णय से खुश नहीं हैं। किसानों को लग रहा है कि अगर कोल्ड स्टोर से आलू निकाला तो वो जल्द ही खराब हो जाएगा। किसान भंवर पाल सिंह कहते हैं, "पिछले साल आलू किसानों का बहुत नुकसान हो गया था, जो आलू बचा है अभी तो उसका अच्छा दाम मिलना शुरू हुआ है, अगर कोल्ड स्टोर से पूरा आलू निकाल लेंगे तो आलू खराब हो जाएगा और सस्ते में आलू बेचना पड़ेगा। हर साल नवंबर तक आलू निकाला जाता था, लेकिन इस बार 31 अक्टूबर तक निकालने को कह दिया है। इस बार वैसे भी आलू पिछड़ गया है, दिसम्बर तक नया आलू आएगा।"

इस बार आलू की बुवाई भी पिछड़ गई है, जो आलू दीवाली तक आता वो दिसम्बर तक आएगा।फोटो: गाँव कनेक्शन

उत्तर प्रदेश में आगरा, फिरोजाबाद, हाथरस, कन्नौज, फर्रूखाबाद, अलीगढ़, बदायूं, मैनपुरी, इटावा, मथुरा, कानपुर नगर, बाराबंकी, हरदोई, फतेहपुर, उन्नाव और गाजीपुर आलू के प्रमुख उत्पादक जिले हैं। जहां पर एक बड़े क्षेत्रफल में आलू की खेती होती है।

उद्यान एवं प्रसंस्करण विभाग, उत्तर प्रदेश के निदेशक डॉ. एसबी शर्मा कहते हैं, "20 नवंबर तक ज्यादातर किसान आलू की बुवाई कर लेते हैं, ऐसे में अगर 31 अक्टूबर तक आलू निकाल लेते हैं, तो उनका नुकसान नहीं होगा। क्योंकि बुवाई से दस-पंद्रह दिन पहले वैसे भी आलू बाहर रखना होता है।"

वो आगे कहते हैं, "पिछले साल खराब मौसम की वजह से आलू का बहुत नुकसान हुआ था, आलू की पैदावार भी कम हुई थी, इसी वजह से आलू महंगा हुआ है। एक महीने में नया आलू आ जाएगा तो आलू का दाम वैसे ही नीचे आ जाएगा। अभी खरीफ की कटाई और रबी की बुवाई का समय है, इसलिए दूसरी सब्जियां भी बाजार में कम ही आ रही हैं, आलू की खपत ज्यादा बढ़ गई है।"

ये भी पढ़ें: दोगुने से ज्यादा कीमत में बिक रहा है आलू बीज, ये है वजह

उपभोक्ता मामले मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार 29 अक्टूबर को आगरा में 50 रुपए किलो खुदरा, जबकि 2600 रुपए प्रति कुंतल थोक का भाव रहा। इसी तरह प्रयागराज में 40 रुपए किलो खुदरा, 2500 रुपए कुंतल थोक, वाराणसी में 40 रुपए खुदरा, 3050 रुपए कुंतल थोक, लखनऊ में 40 रुपए किलो खुदरा, 3250 रुपए थोक, कानपुर में 40 रुपए खुदरा और 3500 रुपए कुंतल थोक भाव रहा।


बाराबंकी जिले के फतेहपुर तहसील के बिहुरा गाँव के किसान राम सागर वर्मा जो आलू की बड़े पैमाने पर खेती करते हैं राम सागर वर्मा बताते हैं, "शासन द्वारा 31 अक्टूबर तक आलू के स्टोर को पूरी तरह से खाली करने का आदेश हो गया है, जिससे हम किसानों को नुकसान होगा 15, 20 नवंबर तक आलू की बुवाई हुआ करती थी और और लास्ट नवंबर तक पुराना आलू खाया जाता था लेकिन 31 अक्टूबर को जब सारा आलू बाहर निकाल दिया जाएगा स्टोर से बाहर निकलने के बाद 10 से 15 दिन के अंदर या तो आलू खा लिया जाए या फिर सड़ जाएगा ऐसे में 15 नवंबर के बाद सरकार बाजार में आलू कहां से लाएगी जबकि नया आलू लगभग दिसंबर में आना शुरू होता है।

कन्नौज के जिला उद्यान अधिकारी मनोज चतुर्वेदी बताते हैं, "हमारे यहां कोल्ड स्टोरेज में अब ज्यादा आलू नहीं बचा है। जो किसान धान की कटाई के बाद खेत में आलू के बीज के रूप में प्रयोग करेगा। अब स्टोर में बड़े किसानों का ही आलू रह गया है, व्यापारियों का आलू अब नहीं बचा है। कन्नौज में 135 कोल्ड स्टोरेज हैं। इसमें 1387372.93 मीट्रिक टन आलू रखने की क्षमता है। वर्ष 2020-21 के लिए 937437.23 मीट्रिक टन आलू रखा गया था। 27 अक्तूबर तक 843693.51 मीट्रिक टन आलू की निकासी हो चुकी है। 90 फीसदी से अधिक आलू किसान व व्यापारी निकाल चुके हैं। अब कोल्ड स्टोरेज में 93743.72 मीट्रिक टन आलू ही बचा है।"

ये भी पढ़ें: क्यों महंगा हुआ प्याज? आगे और भी बढ़ सकते हैं दाम?

आलू की फसल में देरी होने से इस बार बाजार में आलू भी देर से आएंगे, हर बार दीवाली तक आलू की नई फसल बाजार में आ जाती थी। इस बार बाजार में आलू के बीज का रेट काफी ज्यादा रहा और अगर ऐसा ही रहा तो आलू का दाम और भी ज्यादा बढ़ सकते हैं। आलू के बीज का दाम अधिक होने से कई छोटे किसान आलू की बुवाई ही नहीं कर पाएं।

यूपी के बाराबंकी जिले के बेलहरा में रहने वाले किसान राजेश भी उन्हीं किसानों में से हैं, जो महंगे बीज की वजह से अब तक बुवाई नहीं कर पाएं, वो बताते हैं, "आलू का बीज इतना महंगा होने के कारण हम जैसे छोटे किसान अबकी बार आलू की खेती नहीं कर रहे हैं आलू की खेती में बीज खाद मिलाकर एक बीघे में करीब सात से आठ हजार रुपए का खर्च आ रहा है जो हम छोटे किसानों के लिए बहुत बड़ी रकम है।"


किसानों को लग रहा है कि अगर उन्हाेंने आलू निकाल लिया तो वो सड़ने लग जाएगा, अगर बाजार में नया आलू आ गया तो पुराना आलू कोई नहीं पूछेगा। उत्तर प्रदेश कोल्ड स्टोरेज संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल कहते हैं, "31 अक्तूबर तक कोल्ड स्टोरेज खाली करने का आदेश गलत है। शासन के नियम के मुताबिक इस तारीख तक तो कोल्ड में मशीनें चलनी चाहिए। इसके बाद अगर मशीन चलती हैं तो किसानों से अतिरिक्त किराया भी लिया जा सकता है, लेकिन यह कोल्ड मालिक पर निर्भर करता है कि वह अतिरिक्त भाड़ा लेता है या नहीं। प्रदेश अध्यक्ष आगे बताते हैं कि सरकार कीमतों को नियंत्रण करने के लिए यह प्रयास कर रही है, लेकिन एक साथ आलू बाहर निकाल दिया गया तो जल्द खराब हो जाएगा। और लोगों को पता हो जाएगा कि इतना ही आलू है, इसलिए कीमतों में और बढ़ोत्तरी होगी। 31 अक्तूबर को कोल्ड मालिक सम्बंधित किसान या व्यापारी को नोटिस ही दे सकता है, उसमें एक महीने का समय होता है। किसी का आलू ऐसे नहीं फेंका जा सकता है।"

देश में सबसे ज्यादा आलू उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में होता है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक ये दोनों राज्य देश के कुल आलू उत्पादन में करीब 50 फीसदी के आसपास योगदान करते हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश, गुजरात और बिहार का नंबर आता है। भारत, चीन के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा आलू उत्पादन करने वाला देश भी है। उत्तर प्रदेश से ही दूसरे कई राज्यों में आलू जाता है।

देश की सबसे बड़ी मंडियों में से एक दिल्ली की आजादपुर मंडी के आलू व्यापारी रवि भूषण कहते हैं, "इस बार शुरू से ही आलू का रेट ज्यादा रहा है, जब आलू की फसल आनी थी, तब बारिश हाे गई, इसी वजह से साल भर वही रेट रहा। अभी हिमाचल प्रदेश और पंजाब का आलू सबसे पहले आ जाएगा, जबकि वहां भी आलू इस बार पिछड़ गया है। जहां नया आलू आया, दाम वैसे ही गिरने लगेंगे।"

इनपुट: अजय मिश्रा, वीरेंद्र सिंह

ये भी पढ़ें: आवश्यक वस्तु अधिनियम: 65 साल पुराने कानून में संशोधन से किसानों और उपभोक्ताओं का क्या होगा फायदा?


Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.