समु्द्री मछुआरों के लिए इसरो की पहल, प्राकृतिक आपदाओं से होगी सुरक्षा

कई मछुआरों की जान लेने वाले चक्रवात 'ओख' के बाद केरल सरकार द्वारा इसरो से संपर्क किए जाने के बाद यह प्रणाली विकसित की गई।

समु्द्री मछुआरों के लिए इसरो की पहल, प्राकृतिक आपदाओं से होगी सुरक्षासाभार: इंटरनेट

बेंगलुरू (भाषा)। समुद्र में रहने के दौरान मछुआरों को अब खराब मौसम, ऊंची लहरों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा की स्थिति के बारे में पहले ही जानकारी मिल सकेगी। इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जीपीएस प्रणाली 'नाविक' तैयार की है। इसकी जानकारी इसरो के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने दी।

उन्होंने कहा कि इससे मछुआरों की जीवन रक्षा और पड़ोसी देशों के जलक्षेत्र में उनके प्रवेश को रोकने में मदद मिलेगी। कई मछुआरों की जान लेने वाले चक्रवात 'ओख' के बाद केरल सरकार द्वारा इसरो से संपर्क किए जाने के बाद यह प्रणाली विकसित की गई। पिछले साल दिसंबर में मछली पकड़ने समुद्र में निकले कई मछुआरों की जान इसलिए चली गई क्योंकि उन्हें चक्रवात के बारे में समय पर सूचना नहीं दी जा सकी।

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इसरो के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, अहमदाबाद के उपनिदेशक नीलेश देसाई ने बताया, "कम लागत वाला उपकरण समुद्र में उपलब्ध मछलियों की स्थिति के बारे में भी सूचना मुहैया करा सकता है।" उन्होंने बेंगलुरू स्पेस एक्सपो में एक परिचर्चा में कहा, "गहरे सागर में कोई मोबाइल नेटवर्क नहीं है। उपकरण में एक ब्लूटूथ कनेक्टिविटी होगी और अपनी नाविक संदेश सुविधा के जरिए हम तूफान की आशंका पर अधिक सूचना दे पाएंगे। ब्लूटूथ मोबाइल फोन से जुड़ा होगा जिस पर संदेश प्रदर्शित होंगे।"

अगर चक्रवात की आशंका होगी तो मछुआरों को समय पर सतर्क किया जा सकेगा। केरल चक्रवात के दौरान मछुआरे समय पर समुद्र से नहीं लौट पाए थे। देसाई ने कहा, "यदि मछुआरे अंतरराष्ट्रीय समुद्री रेखा पार करते हैं तो यह उपकरण तब भी सतर्क करेगा।" उन्होंने बताया, तमिलनाडु और गुजरात ने भी इस संबंध में इसरो से संपर्क किया है। दोनों ही राज्यों के मछुआरों को क्रमश: श्रीलंका और पाकिस्तान की समुद्री सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पकड़े जाने की घटनाएं अकसर सामने आती रहती हैं।

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देसाई ने कहा, मछुआरे पड़ोसी देश के जलक्षेत्र में प्रवेश करते हैं तो उन्हें पकड़ लिया जाता है। नाविक प्रणाली उन्हें तभी सतर्क कर देगी जब वे अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के पास होंगे। उन्होंने कहा कि वे उपकरण में ऐसी विशष्टिता भी डाल रहे हैं, जिससे मछुआरे समुद्र से एक केंद्र को संदेश भेज सकेंगे। इसके बाद ये संदेश मछुआरों के परिजनों तक भेजे जा सकेंगे। देसाई ने कहा, दो हजार उपकरण बनाए जा चुके हैं। एक उपकरण की कीमत लगभग 3,500 रुपये है।


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