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जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन का रास्‍ता साफ, राज्‍यसभा के बाद लोकसभा में भी बिल पास

जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन का रास्‍ता साफ, राज्‍यसभा के बाद लोकसभा में भी बिल पास

लोकसभा में जम्मू कश्मीर में विशेष अधिकार देने वाला अनुच्छेद 370 को खत्म करने का संकल्प, जम्मू कश्मीर आरक्षण विधेयक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पास हो गया है। इस बिल के पक्ष में 366 वोट पड़े तो इसके विरोध में 66 वोट पड़े हैं। इससे पहले कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि भाजपा ने नियमों का उल्लंघन करते हुए रातोंरात एक राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया है। सत्तापक्ष और विपक्ष के तमाम सांसद इस संकल्प पर अपने विचार रख रहे हैं।

लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने संकल्प पेश करते हुए कहा कि भारत के राष्ट्रपति यह घोषणा करते है उनके आदेश के बाद अनुच्छेद 370 के सभी प्रावधान जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि वर्तमान जम्मू कश्मीर राज्य का पुनर्गठन विधेयक को विचार के लिए रखा जाए, जिसे राज्यसभा की मंजूरी बिल चुकी है। शाह ने कहा कि राज्यसभा के बाद इस विधेयक को यहां लाया गया है। साथ ही उन्होंने जम्मू कश्मीर आरक्षण संशोधन बिल को भी विचार के लिए सदन में रखा।

लोकसभा में लद्दाख से बीजेपी सांसद जामयांग सेरिंग नामग्‍याल ने कहा कि हम किसी भी हालत में कश्मीर के साथ नहीं रहना चाहते थे लेकिन पिछले सरकारों ने हमारे पक्ष को जानने की कोशिश ही नहीं की। इससे हमारी पहचान और भाषा धारा 370 और कांग्रेस की वजह से लुप्त हुई है।

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कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कश्मीर के आवाम की आवाज मोदी सरकार सुन रही है जो धारा 370 के खिलाफ है। धारा 370 की वकालत करने वाले किसी भी नेता ने शहीद उमर फैयाज, शौर्य चक्र विजेता औरंगजेब के साथ खड़े होने की हिम्मत नहीं की। आतंकवाद की पैरवी करने वालों को 370 हटाने से परेशानी है लेकिन देश से प्रेम करने वालों के चेहरे पर चमक है। आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस हमें लोकतंत्र की नसीहत न दे।

कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि आपने जम्मू कश्मीर को 2 हिस्सों में तोड़कर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया। उन्होंने कहा कि कश्मीर को आप अंदरूनी मामले बताते हैं लेकिन संयुक्त राष्ट्र वहां की निगरानी करता है। इस पर अमित शाह ने कहा कि यह कांग्रेस का मत है कि संयुक्त राष्ट्र जम्मू कश्मीर की निगरानी कर सकता है, यह कांग्रेस साफ करे। इस पर सदन में हंगामा शुरू हो गया है।

एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने बिल पर चर्चा के दौरान कहा मेरी बगल में फारूक अब्दुल्ला जी बैठते हैं और उनकी आवाज नहीं सुनाई दे रही है। यह चर्चा उनके बगैर हमेशा अधूरी रहेगी। इसका जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला को न गिरफ्तार किया गया है और न हिरासत में लिया गया है, वह अपनी मर्जी से अपने घर पर हैं। सुले ने कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है तो अमित शाह ने कहा कि मैं डॉक्टर नहीं हूं और तबियत मैं ठीक नहीं कर सकता।

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डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने लोकसभा में अनुच्छेद 370 पर चर्चा के दौरान कहा, 'इस सदन के सदस्य मिस्टर फारूक अब्दुल्ला अनुपस्थित हैं। उन्हें गिरफ्तार किया गया है। हमें इसकी भनक नहीं थी। आपको एक अध्यक्ष के रूप में सदस्यों की सुरक्षा करनी चाहिए। आपको तटस्थ होना चाहिए।'


लोकसभा में सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि सुप्रिया जी के पड़ोसी भी उनके बगल में नहीं और मेरे पड़ोसी भी नहीं हैं। अखिलेश ने कहा कि मंत्री कह रहे थे कि संविधान सभा से पारित कर यह प्रस्ताव लाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश के लिए यह फैसला लिया गया है वहां की जनता का क्या मत है यह तो जान लेना चाहिए, वहां के लोग इस फैसले से खुश हैं या नहीं। फैसले को संविधान सभा से पारित करने के अखिलेश के बयान पर शाह ने कहा कि मैंने ऐसा नहीं कहा है आपने गलत समझा। अमित शाह ने कहा कि संविधान सभा मतलब जम्मू कश्मीर की विधानसभा की ओर से राष्ट्रपति यह प्रस्ताव लेकर आए हैं।

लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान जनता दल यूनाइटेड ने केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। जदयू ने इस दौरान लोकसभा से वॉकआउट कर दिया। जदयू की तरफ से ललन सिंह ने सदन में कहा कि हम एक दूसरे की विचारधारा को जानते हैं, लेकिन धारा 370 पर सरकार के फैसले का विरोध करते हैं।

लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि क्या कांग्रेस PoK को भारत का हिस्सा नहीं मानती है, हम इसके लिए जान देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर का मतलब Pok और अक्साई चीन से भी है क्योंकि इसमें दोनों समाहित हैं। गृह मंत्री ने कहा कि आज के प्रस्ताव और बिल भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखे जाएंगे और यह महान सदन इस पर विचार करने जा रहा है।

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अमित शाह ने पुनर्गठन बिल पर कहा कि हम जम्मू कश्मीर के लिए 2 केंद्र शासित प्रदेश लेकर आ रहे हैं जिसमें लद्दाख और जम्मू कश्मीर होगी। जम्मू कश्मीर में विधानसभा होगी और चुना हुआ मुख्यमंत्री वहां काम करेगा। जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इस पर कानून बनाने का अधिकार इस संसद को है।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि आजादी के बाद दो मुल्क बने और एक भारत और दूसरा पाकिस्तान। इसके बाद 562 रियासतें बनीं जिन्हें कहीं भी जाने की आजादी थी। तीन रियासतों को लेकर संवेदनशील स्थिति बनी जिसमें जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद और जूनागढ़ शामिल था। महात्मा गांधी ने जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह से कश्मीर का भारत में विलय करने की अपील की थी लेकिन राजा असमंजस में थे। पाकिस्तान ने जब कश्मीर पर हमला कर दिया और वह श्रीनगर की तरफ बढ़ने लगे तो राजा के पास पाकिस्तान में विलय करने या भारत के साथ जाने का विकल्प था। राजा ने पाकिस्तानी घुसपैठियों का सामना किया और भारत से मदद मांगी। इसके बाद राजा ने नेहरू की अगुवाई में भारत से संधि पर हस्ताक्षर किए और फौज को कश्मीर बचाने के लिए भेजा गया।

टीएमसी सांसद ने कहा कि इस विभाजन के बाद आतंकवादी घटनाओं में इजाफा हो सकता है क्योंकि मौजूदा हालात अनिश्चितता लेकर आएंगे। सरकार बताए कि ऐसे हालात पनपने पर क्या कदम उठाए जाएंगे। सुदीप ने कहा कि तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को क्यों गिरफ्तार किया गया, हमें इस बारे में जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है। अगर हम इस बिल पर वोटिंग का हिस्सा बनते हैं तो हम भी इसके लिए भागीदारी होंगे और इस वजह से हमने इसके खिलाफ वॉक आउट का फैसला किया है।

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