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झारखण्ड : डेढ़ महीने बाद मनरेगा कर्मियों ने ख़त्म की हड़ताल, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बोले - धन्यवाद

कोरोना काल में मनरेगा कर्मियों की इस हड़ताल से राज्य के गांवों में मनरेगा के चल रहे कार्यों पर सीधा प्रभाव पड़ा। झारखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में छह लाख से ज्यादा मजदूरों को मनरेगा में रोजगार मिलता है।

Kushal MishraKushal Mishra   11 Sep 2020 9:14 AM GMT

झारखण्ड : डेढ़ महीने बाद मनरेगा कर्मियों ने ख़त्म की हड़ताल, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बोले - धन्यवादझारखण्ड में संविदा पर काम कर रहे मनरेगा कर्मी 28 जुलाई से थे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

स्थायी नौकरी और सामाजिक सुरक्षा जैसी मुख्य मांगों को लेकर झारखण्ड में संविदा पर काम कर रहे मनरेगा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आखिरकार 45 दिनों के बाद समाप्त हो गई है। इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मनरेगा कर्मचारी संघ द्वारा हड़ताल तोड़ने पर उन्हें धन्यवाद दिया।

मनमाने ढंग से बर्खास्त किये जाने और सरकार की ओर से संविदा पर काम कर रहे मनरेगा कर्मियों की ओर ध्यान न दिए जाने के कारण ये मनरेगा कर्मी 28 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। इससे पहले इन मनरेगा कर्मियों ने जुलाई के पहले सप्ताह में तीन दिवसीय आन्दोलन भी किया था। मगर सरकार की ओर से कोई ठोस पहल न होने से राज्य के करीब पांच हजार मनरेगा कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर हुए।

डेढ़ महीने बाद मनरेगा कर्मचारी संघ और ग्रामीण विकास विभाग के बीच इनकी मांगों को लेकर सहमति बन गई है। विभाग ने मनरेगा कर्मचारी संघ की तीन प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है। इन प्रमुख मांगों में बर्खास्त किये जाने पर दोबारा अपील करने का मौका देने, सामाजिक सुरक्षा के तहत मिलने वाली सहायता राशि और कर्मचारी भविष्य निधि की मांगें शामिल हैं।


हड़ताल तोड़ने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, "आप सभी अनुबंधकर्मियों की समस्याओं के निदान के लिए सरकार ने पहले ही एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर रखी है। झारखण्डवासियों की यह झारखण्डी सरकार सभी की पीड़ाओं और संवेदनाओं को प्राथमिकता पर रखकर कार्य कर रही है और आगे भी करेगी।"

कोरोना काल में मनरेगा कर्मियों की इस हड़ताल से राज्य के गांवों में मनरेगा के चल रहे कार्यों पर सीधा प्रभाव पड़ा। झारखण्ड में प्रवासी मजदूरों के रोजगार के लिए मनरेगा के तहत नीलम्बर-पीताम्बर जल समृद्धि योजना, बिरसा हरित ग्राम योजना और वीर शहीद पोटो खेल विकास योजना शुरू की गयी थी। इसके अलावा झारखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में छह लाख से ज्यादा मजदूरों को मनरेगा में रोजगार मिलता है। ऐसे में इस हड़ताल से मजदूरों के रोजगार पर भी असर पड़ा।

तीन मांगों पर बनी सहमति

काम के दौरान घायल होने पर 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद, जबकि कार्य अवधि में मौत होने पर पांच लाख रुपये की सहायता राशि परिजनों को दी जायेगी।

कर्मचारी भविष्य निधि का भी लाभ मिलेगा जिसके लिए कर्मचारी का भी अंशदान जोड़ा जाएगा।

किसी कर्मचारी को हटाने से पहले उससे स्पष्टीकरण पूछा जाएगा जो एक महीने के भीतर मंडलीय आयुक्त के पास लिखित अपील कर सकेगा।

झारखण्ड में संविदा पर काम कर रहे मनरेगा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को समर्थन करते हुए 26 और 27 अगस्त को अखिल भारतीय मनरेगा कर्मी महासंघ की ओर से भी देश में दो दिवसीय कलम बंद हड़ताल की गई थी। स्थायी नौकरी और सामाजिक सुरक्षा की मांगों को लेकर इस दो दिनी हड़ताल में देश भर के करीब साढ़े चार लाख मनरेगा कर्मियों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

वहीं झारखंड की अब अनिश्चितकालीन हड़ताल खत्म होने पर अखिल भारतीय मनरेगा कर्मी महासंघ के राष्ट्रीय महासचिव चिदानंद कश्यप 'गाँव कनेक्शन' से कहते हैं, "दो साल पहले बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने भी ऐसे ही हड़ताल कर रहे मनरेगा कर्मियों को आश्वासन दिया था और कमेटी गठित की थी। मगर बाद में मनरेगा कर्मियों के लिए कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया था। झारखण्ड सरकार को राज्य के मनरेगा कर्मचारी संघ को लिखित तौर पर आश्वासन देना चाहिए और उनकी सभी मांगों को पूरा करना चाहिए।"

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