न्यायमूर्ति रंजन गोगोई बने भारत के मुख्य न्यायाधीश, सीजेआई के पास नहीं है खुद का मकान

देश के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के पास न तो खुद का मकान है, न ही कोई आभूषण हैं। उन्होंने शेयर बाजार में भी कोई निवेश नहीं किया है।

Arvind ShuklaArvind Shukla   3 Oct 2018 7:32 AM GMT

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न्यायमूर्ति रंजन गोगोई बने भारत के मुख्य न्यायाधीश, सीजेआई के पास नहीं है खुद का मकान

नई दिल्ली। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने भारत के 46वें मुख्य न्यायाधीश बन गए हैं। वो न्यायमूर्ति दीपक मिश्र की जगह लेगे। राष्ट्रपति भवन में एक सादे समारोह में शपथ लेने के तुरंत बाद मुख्य न्यायाधीश ने अपनी मांग के पैर छुए।

बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन के दरबार हाल में प्रधान न्यायाधीश को शपथ दिलाई। जस्टिस गोगोई का कार्यकाल करीब 13 माह का होगा वो 17 नवंबर 2019 को सेवा निवृत्त होंगे।




देश के प्रधान न्यायाधीश के बारे में जानिए

  1. जस्टिस गोगोई इस वक्त देश के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं।
  2. जस्टिस गोगोई इस पद पर पहुंचने वाले पूर्वोत्त:र भारत के पहले CJI
  3. सीजेआई रंजन गोगोई के पास अपना कोई मकान नहीं है।
  4. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक 19 महीने बाद ही सेवानिवृत्त होने वाले प्रधान न्यायाधीश के पास व्यक्तिगत संपत्ति भी काफी कम है।
  5. जस्टिस गोगोई के पास खुद का कोई आभूषण नहीं है, जो ज्वैलरी है वो उनकी पत्नी की है जो शादी के समय उपहार में मिली थी।
  6. जस्टिस गोगोई ने किसी प्रकार का कोई लोन नहीं लिया है।

  7. मार्कण्डेय काटजू को नोटिस जारी कर मचाई थी खलबली

    असम के डिब्रूगढ़ में 18 नवंबर, 1954 को जन्मे रंजन गोगोई ने साल 1978 में वकालत शुरू की थी। असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजी और लोकपाल कानून के तहत लोकपाल संस्था की स्थापना जैसे विषयों पर सख्त रूख अपनाने वाले न्यायमूर्ति गोगोई करीब 13 महीने देश के प्रधान न्यायाधीश रहेंगे।

    न्यायमूर्ति गोगोई को न्यायिक प्रक्रिया और कार्यवाही के संदर्भ में एक सख्त न्यायाधीश के रूप में जाना जाता है। निवर्तमान प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्र की कार्यशैली को लेकर 12 जनवरी को न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर के नेतृत्व में प्रेस कॉन्फ्रेन्स करने वाले चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति गोगोई भी शामिल थे। इस प्रेस कॉन्फ्रेन्स में न्यायाधीशों ने तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश पर कई आरोप लगाये थे।

    केरल में फरवरी, 2011 में एक ट्रेन में हुए सनसनीखेज सौम्या बलात्कार और हत्या के मामले में शीर्ष अदालत के निर्णय से असहमति व्यक्त करते हुए पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू ने तब सोशल मीडिया पर तल्ख़ टिप्पणियां कीं थीं। इसे लेकर न्यायमूर्ति गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने 11 नवंबर, 2016 को पूर्व सहयोगी न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू को अवमानना का नोटिस जारी करके सनसनी पैदा कर दी थी।

    यह पहला मौका था जब शीर्ष अदालत ने अपने ही पूर्व सदस्य के खिलाफ स्वत: अवमानना का नोटिस जारी किया था। न्यायमूर्ति काटजू ने बाद में अपनी टिप्पणियों के लिये न्यायालय से क्षमा मांग ली थी जिसे स्वीकार करते हुये न्यायमूर्ति गोगोई की पीठ ने मामला खत्म कर दिया था।

    इसी तरह, असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजी के मसौदे के संबंध में मीडिया से बात करने पर इस काम से जुड़े अधिकारियों को आड़े हाथ लेते हुये न्यायमूर्ति गोगोई की पीठ ने उन्हें सख्त चेतावनी दी थी।

    शीर्ष अदालत के फैसले के बावजूद लोकपाल संस्था की स्थापना और लोकपाल की नियुक्ति में हो रहे विलंब को लेकर दायर अवमानना याचिका पर भी न्यायमूर्ति गोगोई की पीठ ने सख्त रूख अपना रखा है।

    

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