लेह में मैराथन जीतने वाली भारत की पहली लड़की से मिलिए

Shrinkhala PandeyShrinkhala Pandey   26 Oct 2017 2:48 PM GMT

लेह में  मैराथन जीतने वाली भारत की पहली लड़की से मिलिएज्योत्सना ने 111 किमी की मैराथन पूरी की।

लखनऊ। कौन कहता है कि लड़कियां पहाड़ नहीं चढ़ सकतीं, ज्यादा भाग दौड़ नहीं कर सकतीं। मिलिए देहरादून की रहने वाली 17 साल की ज्योत्सना रावत ने लेह में आयोजित ‘लेह अल्ट्रा द हाई’ 111 किमी की मैराथन पूरी की, ज्योत्सना यह दौड़ पूरी करने वालीं पहली भारतीय महिला हैं।

इस दौड़ में ज्योत्सना के पिता बीएसएफ में डिप्टी कमांडेंट यशवंत सिंह रावत ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने ज्योत्सना के साथ ही यह दौड़ पूरी की है। कक्षा 12 की छात्रा ज्योत्सना बताती हैं, ये रेस नुब्रा घाटी से शुरू होकर लेह में खत्म हुई। मैनें 17,400 फीट की ऊंचाई को 19 घंटे 46 मिनट में पूरी की है। मैं पूरे भारत की पहली ऐसी लड़की थी और दुनिया की सबसे छोटी लड़की जिसने ये प्रतियोगिता जीती।

पिता से मिली प्रेरणा

ज्योत्सना के पिता यशवंत सिंह रावत बीएसएफ में डिप्टी कमांडेंट होने के साथ एक अच्छे एथलीट भी हैं। ज्योत्सना बताती हैं, उन्होंने कई सारे मैराथन जीते हैं। मुझे रेसर बनने की प्रेरणा उनसे ही मिली। अपने बचपन को याद करते हुए वो बताती हैं, मुझे याद है जब मैं पांच साल की थी मेरे पापा दिल्ली में पोस्टेड थे। वो जब सुबह चार बजे लड़कों को प्रैक्टिस के लिए ले जाते थे तो मुझे और मेरी बड़ी बहन को भी लेकर जाते थे। धीरे धीरे हमें ये अच्छा लगने लगा।

परिवार का हमेशा सहयोग मिला

ज्योत्सना ने फरवरी में लेह में होने वाली प्रतियोगिता में अपनी जगह पक्की की थी। लेह में 30 लोगों ने हिस्सा लिया था, जिसमें ज्योत्सना अकेली लड़की थी। ज्योत्सना बताती हैं, मैं इस मामले में भाग्यशाली हूं कि मेरे परिवार का सहयोग हमेशा रहा। मुझे वो नहीं फेस करना पड़ा कि लड़की हूं तो मौका न मिले। बहुत सी लड़कियों की प्रतिभा उनके घर वाले ही मार देते हैं।

पिता ने भी लिया था बेटी के साथ रेस में भाग।

आगे अभी लक्ष्य बढ़ा है

कक्षा आठ में ज्योत्सना ने पहली बार रेस में भाग लिया था। वो बताती हैं, देहरादून में ऐसे बहुत बड़ी रेस नहीं होती है, मैराथन हुई थी जिसमें में चौथे नंबर पर आई थी। पहला स्थान पाने वाली लड़की जर्मनी की थी। मैं रोज अभ्यास करती हूं साइकिलिंग करती हूं जिसका मुझ फायदा होता है। अभी आगे और बड़ी बड़ी रेस जीतनी हैं और देश का नाम रोशन करना है।

पहली भारतीय लड़की जिसने जीती ये रेस।

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