कर्नाटक चुनाव: बोपैया बने रहेंगे प्रोटम स्पीकर, जानिए कैसे तय होता है किसकी बनेगी सरकार

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाला वादा निभा चुके बीएस येदियुरप्पा के सामने आज एक और अग्निपरीक्षा है। येदियुरप्पा को आज शाम 4 बजे बहुमत साबित करना है।

कर्नाटक चुनाव: बोपैया बने रहेंगे प्रोटम स्पीकर, जानिए कैसे तय होता है किसकी बनेगी सरकार

कर्नाटक में बहुमत परीक्षण से पहले कांग्रेस और जेडीएस को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति पर बड़ा फैसला लेते हुए दोनों दलों की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट के फैसले के बाद अब केजी बोपैया ही प्रोटेम स्पीकर रहेंगे और वो ही आज शाम 4 बजे बहुमत परीक्षण कराएंगे। हालांकि शक्ति परीक्षण की पारदर्शिता को बनाने रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया का लाइव प्रसारण करने का भी आदेश दिया है।
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाला वादा निभा चुके बीएस येदियुरप्पा के सामने आज एक और अग्निपरीक्षा है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद येदियुरप्पा को आज शाम 4 बजे कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बहुमत साबित करना है.
कर्नाटक विधान सभा में बहुमत का आंकड़ा 112 है। बीजेपी की येदुरप्पा सरकार आज 112 विधायकों के समर्थन का जुगाड़ कर लेती है तो येदुरप्पा सरकार बच जाएगी वरना सीएम को इस्तीफा देना पड़ सकता है। कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस-जेडीएस की याचिका पर आज कर्नाटक विधानसभा में बहुमत परीक्षण कराने का आदेश दिया है।




राज्यपाल ने बोपैया को दिलाई प्रोटेम स्पीकर की शपथ
बता दें कि कर्नाटक के राज्यपाल ने विधानसभा में शनिवार को शक्ति परीक्षण कराने के लिए भाजपा के वरिष्ठ विधायक केजी बोपैया को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया है। विराजपेट से विधायक बोपैया सदन के स्पीकर रह चुके हैं। कांग्रेस-जद (एस) राज्यपाल के इस फैसले के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए।

बहुमत परीक्षण क्या होता है?
जब किसी विधानसभा में किसी एक पार्टी या गठबंधन को चुनावों में बहुमत हासिल नहीं होता है तब राज्यपाल अपने विवेक के अनुसार सबसे बड़े दल या सबसे बड़े गठबंधन को जिसके पास सबसे ज्यादा विधायकों का समर्थन प्राप्त होता है, उसे सरकार बनाने का न्योता देते हैं और जब उन्हें इस बात का शक होता है कि सरकार को बहुमत प्राप्त नहीं है। तब एक समय-सीमा के तहत सदन में बहुमत साबित करने को कहते हैं। बहुमत परीक्षण के दिन सरकार की तरफ से सदन में विश्वास मत प्रस्ताव रखा जाता है, फिर इस पर चर्चा होती है। पक्ष और विपक्ष के नेता इस पर चर्चा करते हैं।
क्या हैं विकल्प
कर्नाटक विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल करने के लिए येदियुरप्पा के सामने चंद विकल्प ही मौजूद हैं। पहला विकल्प ये है कि पार्टी लाइन से अलग होकर कांग्रेस या जेडीएस के 7 विधायक विश्वास प्रस्ताव के समर्थन में वोट दे दें, जिससे बीजेपी का आंकड़ा 104 से बढ़कर 111 हो जाए। दूसरा विकल्प है कि विपक्ष के 14 विधायक मतदान से गैरहाजिर रहें, जिससे सदन की संख्या 221 से घटकर 207 हो जाएगी और तब बहुमत के लिए बीजेपी को सिर्फ 104 विधायकों की ही जरुरत पड़ेगी, जो कि उसके पास मौजूद हैं।
वोटिंग का है प्रावधान
सदन में चर्चा के बाद स्पीकर या प्रोटेम स्पीकर उपस्थित विधायकों से गुप्त मतदान या ध्वनिमत से विश्वास मत के समर्थन और विरोध में वोटिंग कराते हैं। अगर विश्वास मत प्रस्ताव के समर्थन में ज्यादा विधायकों ने वोट किया या हाथ उठाकर अपना समर्थन जताया या आवाज से समर्थन जताया तब माना जाता है कि सरकार को सदन का विश्वास प्राप्त है यानी बहुमत हासिल है। लेकिन जब विरोध में ज्यादा वोट पड़ते हैं तब माना जाता है कि सरकार के पास बहुमत नहीं है और नतीजतन सरकार गिर जाती है।
साभार: एजेंसी

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