कर्नाटक: ग्रामीणों ने 150 कुत्तों को मारा, एफआईआर दर्ज

कर्नाटक: ग्रामीणों ने 150 कुत्तों को मारा, एफआईआर दर्जसाभार: द क्विंट

लखनऊ। कर्नाटक के एक गाँव में 150 आवारा कुत्तों की हत्या कर दी गई है। राज्य के पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने दावणगेरे जिले में बड़े पैमाने पर कुत्तों की कब्रों की खोज की है। जहां ग्रामीणों ने उन्हें मारने के बाद दफन कर दिया था। 27 नवंबर 2017 को दर्ज एफआईआर के मुताबिक गाँव में पंचायत कर ये फरमान जारी किया गया था कि एक कुत्ते की हत्या करने पर 150 रुपए इनाम के तौर पर दिये जाएंगे।

जिसके बाद ग्रामीणों ने इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया। पुलिस ने अभी तक 40 शव बरामद किये है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है ताकि इन आरोपों को सही साबित किया जा सके कि कुत्तों को जहर देकर मारा गया है।

आखिर कुत्तों से इतनी नफरत क्यों?

बेंगलुरू से 200 किलोमीटर दूर हनलाई तालुक के बेलगौथी गांव में 20 नवंबर को ये हत्याएं हुईं। ग्रामीणों ने आवारा कुत्तों के बारे में शिकायत की जिसके बाद ग्राम पंचायत ने कुत्तों को पकड़ने का अभियान आयोजित किया। इस अभियान में एक बड़ा मतदान हुआ। इस अभियान का आयोजन हत्याओं के एक सप्ताह पहले किया गया था।

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कुत्तों की क्रूर हत्याओं के कई वीडियो सोशल मीडिया पर जोरों से वायरल हुआ था। करुणा अनन्त प्लस एक्शन के साथ पशु अधिकार कार्यकर्ता हरीश केबी ने इस वीडियो को देखा और उस गाँव का दौरा करने का निर्णय लिया। जांच के दौरान उन्हें वहां पर कुत्तों के 10 शव बरामद हुए।

एक प्रमुख वेब पोर्टल को हरीश केबी ने बताय "कुत्तों को गांव के बाहर खुली हुई जमीन से चार से पांच किलोमीटर दूर दफन किया गया था। जब हम गाँव गए तो हमने कुछ कुत्तों के शव को खुले में भी पाया। कार्यकर्ता ने स्थानीय पुलिस में सोमवार को एफआईआर दर्ज कराई। निमाठी पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी ने कहा कि शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

प्रभारी उप-निरीक्षक हनुमन्तथप्पा ने द क्विंट को बताया "जांच चल रही है, और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा हा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि लगभग 150 कुत्तों की मौत हो गई हालांकि अभी तक 40 कुत्तों के शव ही बरामद किये जा सके हैं। अन्य जगहों की भी छानबीन की जा रही है जहां कुत्तों को दफनाया गया है। अभी तक मृत्यु के कारणों का पता नहीं लग पाया है।

साभार: द क्विंट

बतौर हनुमन्तथप्पा ने बताया कि आरोप है कि ग्राम पंचायत ने गांव के कुत्तों को मारने की योजना बनाई थी। बाद में जहर देकर उन्हें मार डाला। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट उपलब्ध होने के बाद हत्या के ब्योरे का पता लग सकेगा। इस बिंदु पर हम पुष्टि कर सकते हैं कि कुत्ते की हत्या हुई है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

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भारत में पशुओं के कानूनी अधिकार

  • भारतीय संविधान के अनुच्छे 51(A) के मुताबिक हर जीवित प्राणी के प्रति सहानुभूति रखना भारत के हर नागरिक का मूल कर्तव्य है।
  • कोई भी पशु (मुर्गी समेत) सिर्फ बूचड़खाने में ही काटा जाएगा। बीमार और गर्भ धारण कर चुके पशु को मारा नहीं जाएगा। प्रिवेंशन ऑफ क्रुएलिटी ऑन एनिमल्स एक्ट और फूड सेफ्टी रेगुलेशन में इस बात पर स्पष्ट नियम हैं।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 428 और 429 के मुताबिक किसी पशु को मारना या अपंग करना, भले ही वह आवारा क्यों न हो, दंडनीय अपराध है।
  • प्रिवेंशन ऑफ क्रूएलिटी ऑन एनिमल्स एक्ट (पीसीए) 1960 के मुताबिक किसी पशु को आवारा छोड़ने पर तीन महीने की सजा हो सकती है।
  • एंटी बर्थ कंट्रोल (2001) डॉग्स रूल नियम के तहत कुत्तों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। पालतू और आवारा। कोई भी व्यक्ति या स्थानीय प्रशासन पशु कल्याण संस्था के सहयोग से आवारा कुत्तों का बर्थ कंट्रोल ऑपरेशन कर सकती है। उन्हें मारना गैर कानूनी है।
  • जानवर को पर्याप्त भोजन,पानी और शरण देने से इनकार करना और लंबे समय तक बांधे रखना दंडनीय अपराध है। इसके लिए जुर्माना या तीन महीने की सजा या फिर दोनों हो सकते हैं।
  • स्लॉटरहाउस रूल्स 2001 के मुताबिक देश के किसी भी हिस्से में पशु बलि देना गैरकानूनी है।

हाल में ही लखनऊ में मेनका गांधी ने एक कार्यक्रम में कहा था कि पशु-पक्षियों को सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है, क्योंकि पशु-पक्षी और प्रकृति एक चेन से जुड़े है। कुत्तों को मार देने से चूहों की संख्या बढ़ जाती है जो प्लेग का कारण बनती है।

उदाहरण देते हुए मेनका ने कहा सूरत में कुत्तों की संख्या बहुत ज्यादा हो गयी थी तो उनको हटाने के लिए कुत्तों को शहर से हटा दिया गया इसके बाद वहां प्लेग बीमारी फैल गई थी, जिसकों बहुत साल बाद खत्म कर पाए थे।

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