कश्मीरी युवा सिर्फ़ पत्थरबाज़ नहीं...

कश्मीरी युवा सिर्फ़ पत्थरबाज़ नहीं...आज कश्मीरी युवा हर क्षेत्र में बेहतर कर रहे हैं.

लखनऊ। कश्मीर के युवाओं का जब भी ज़िक्र आता है, तो नज़र के सामने पत्थरबाजी करते लड़कों, हाथ में पाकिस्तान और आईएसआईएस का झंडा लिए तस्वीरें दिखती हैं, लेकिन कश्मीर के सभी युवा पत्थरबाज़ ही नहीं होते है।

आतंकवाद के चेहरे के पीछे की कई तस्वीरें ऐसी भी हैं जो कश्मीर की हक़ीक़त को उसके स्याह पन्नों से काफ़ी दूर लेकर जाती हैं। सिविल सर्विस हो या सेना, सिनेमा हो या साहित्य, फोटोग्राफी हो या क्रिकेट हर क्षेत्र में कश्मीर के युवा देश का नाम रौशन कर रहे हैं।

आमिर फ़ैसल 2009 के नतीजे में ऑल इंडिया रैंकिंग में पहले स्थान पर रहकर देश का नाम रौशन किया था

सिविल सर्विस में कश्मीरी युवाओं का जलवा

सिविल सर्विस में ही कश्मीर के रहने वाले आमिर फ़ैसल 2009 के नतीजे में ऑल इंडिया रैंकिंग में पहले स्थान पर रहकर देश का नाम रौशन किया था। 2015 में 10 युवाओं का चयन हुआ जिसमें सादिक़ भट ऑल इंडिया रैंकिंग में 27 स्थान पर रहे थे। साल 2016 में फिर 10 युवाओं का चयन हुआ जिसमें अथर आमिर ऑल इंडिया रैंकिंग में दूसरे स्थान पर रहे थे। इस वर्ष हाल ही में आए सिविल सर्विस के नतीजे में 14 युवाओं का चयन हुआ है। जिसमें घाटी के रहने वाले बिलाल मोहिउद्दीन भट ने ऑल इंडिया रैंकिंग में दसवां स्थान हासिल किया है।

सेना के प्रति कश्मीरियों बदलता नज़रिया

कहा जाता है कि कश्मीरी युवक भरतीय सेना को पसंद नहीं करते हैं। लगातार इस तरह की खबरें और वीडियो भी सामने आते रहते है लेकिन पिछले कुछ सालों से कश्मीरी युवा का रुझान सेना के प्रति बढ़ा है। कुछ दिनों पहले ही 19,000 के करीब लोगों ने सेना में भर्ती के लिये आवेदन किया था।

फोटोग्राफ़ी में भी अव्वल कश्मीरी युवा

फोटोग्राफरों के लिए सबसे पसंदीदा जगह कहे जाने वाले कश्मीर के साकिब माजिद की ली हुई तस्वीर अगले एक साल तक लार्ड्स के मैदान में शोभा बढ़ाएगी। इंजीनियर की पढ़ाई करने के बाद फ्रीलांसिंग फोटोग्राफी करने वाले साकिब माजिद (25वर्ष) की खींची फोटो को विस्डन-एमसीसी-2016 फोटो ऑफ द ईयर चुना गया। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। बड़े-बड़े फोटोग्राफ़रों के अलावा जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने भी इस फोटो को ट्वीट किया था।

क्रिकेटर परवेज़ रसूल

क्रिकेट में भारत की शान कश्मीरी

कश्मीर के रहने वाले परवेज़ रसूल क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। परवेज़ पहले कश्मीरी खिलाड़ी हैं, जो आईपीएल में खेल चुके हैं। परवेज़ ने अपना करियर 2014 में बांग्लादेश के खिलाफ़ मीरपुर में शुरू किया, जबकि आईपीएल में वह पुणे वॉरियर्स, सनराइज़र्स हैदराबाद और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिये खेल चुके हैं।

फुटबॉल में भारत की शान कश्मीरी

सिर्फ क्रिकेट ही नहीं फुटबॉल में भी कश्मीर के युवा पीछे नहीं है। केरला ब्लास्टर्स के लिए खेलने वाले इश्फ़ाक़ अहमद भी श्रीनगर के रहने वाले हैं। इश्फ़ाक़ की टीम डूरण्ड कप और फ़ेडरेशन कप भी जीत चुकी है। मेहराजुद्दीन वदू भी कश्मीर के ही रहने वाले हैं, जो कि संतोष ट्रॉफ़ी में जम्मू कश्मीर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

अनंतनाग के रहने वाले बशारत पीर ‘कर्फ्यूड नाइट’ नामक किताब के लेखक हैं।

‘हैदर’ और ‘कर्फ्यूड नाइट’ के लेखक हैं कश्मीरी

अनंतनाग के रहने वाले बशारत पीर ‘कर्फ्यूड नाइट’ नामक किताब के लेखक हैं। कर्फ्यूड नाइट कश्मीर में ज़िन्दगी, प्यार और युद्ध की दास्ताँ है जिसे भारत के बाहर बड़ा नाम मिला है। कर्फ्यू़ड नाइट लिखने के अलावा बशारत ने फ़िल्म ‘हैदर’ की स्क्रिप्ट भी बशारत ने ही लिखी है।

फ़ेसबुक की तर्ज़ पर काशबुक बनाने वाले ज़ेयान शफ़ीक़.

टेक्नोलॉजी में पहचान बनाते कश्मीरी

कश्मीर अब तकनीकी के क्षेत्र में भी अपनी कामयाबी की इबारत लिख रहा है। बीबीसी की एक ख़बर के अनुसार कश्मीर के रहने वाले ज़ेयान शफ़ीक़ ने फ़ेसबुक की तर्ज़ पर काशबुक बनाया है। महज़ 16 साल की उम्र में ये कारनामा करने वाले ज़ेयान 11 वीं के छात्र हैं। ज़ेयान बताते हैं कि उनको इसकी प्रेरणा तब मिली जब ख़बर उड़ी कि कश्मीर में सोशल मीडिया पर बैन लग जाएगा। ज़ेयान ने यूट्यूब से कोडिंग सीखकर काशबुक बनाया है, जो कि अपने आप में काबिल ए तारीफ़ है।

मंगलम भारत, रिपोर्टर

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