एक ख़बर जिसने केबीसी विजेता सुशील कुमार को बना दिया था ‘कंगाल’

एक ख़बर जिसने केबीसी विजेता सुशील कुमार को बना दिया था ‘कंगाल’सुशील कुमार

लखनऊ/पटना। लगभग दो साल पहले मीडिया में ऐसी ख़बरें छा गई थीं कि कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) में पांच करोड़ रुपये जीतने वाले मोतिहारी, बिहार के सुशील कुमार कंगाल हो गए हैं। सुशील कुमार ने केबीसी में पांच करोड़ रुपये जीते थे और उसमें से टैक्स काटने के बाद 3 करोड़ 60 लाख रुपये मिले थे। जिसका उपयोग सुशील कुमार ने दो मंज़िला घर बनवाया और कुछ जगह इस पैसे को इन्वेस्ट किया। केबीसी जीत कर करोड़पति बनने के बाद सुशील कुमार की ज़िंदगी बदल गई। लोग उन्हें पहचानने लगे, उन्हें कई कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया जाता था लेकिन 2015 में आई एक ख़बर ने उनके ऊपर काफी नकारात्मक असर डाला।

वो ख़बर थी उनके कंगाल होने की

सुशील कुमार ने गाँव कनेक्शन को बताया कि 2015 में बिहार में जब विधासभा चुनाव होने वाले थे उस वक्त एक रिपोर्टर मेरा इंटरव्यू लेने आया, उसने मुझसे राजनीति से जुड़े कुछ सवाल किए और पूछा कि क्या मैं इस बार बिहार में चुनाव लड़ूंगा, जिसके लिए मैंने मना कर दिया। बातों ही बातों में उसने मुझसे पूछा कि आपने केबीसी में जो रकम जीती थी उसका क्या किया, अपने पिता जी के नाम कितनी रकम की, अपनी पत्नी के नाम कितना निवेश किया। अभी आपके पास बैंक में कितने पैसे हैं। मुझे उसके ये सवाल कुछ अच्छे नहीं लगे और मैंने गुस्से में बोल दिया कि मेरे सारे पैसे खत्म हो गए हैं। बस इसी बात को हेडिंग बनाकर उस रिपोर्टर ने ख़बर को छाप दिया। इसके बाद ये ख़बर फैल गई और लगभग हर चैनल पर इस बारे में चर्चा होने लगी कि केबीसी में 5 करोड़ रुपये जीतने वाले सुशील कुमार अब कंगाल हो गए हैं। (देखिए वीडियो)

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वो दौर मेरे लिए अच्छा नहीं था। लोगों ने मुझे कार्यक्रमों में बुलाना कम कर दिया था। कई मोटिवेशनल स्पीकर मेरा नाम लेकर कहते थे कि आपको सुशील कुमार से सीखना चाहिए कि कैसे करोड़ों रुपयों को बर्बाद किया जाता है, तो निवेश कराने वाले कहते थे कि निवेश न करने का बुरा नतीज़ा क्या होता है सुशील कुमार इसका उदाहरण हैं।

सुशील कुमार गाँव कनेक्शन से बात करते हुए बताते हैं कि उस समय मुझे इन बातों का बुरा लगता था लेकिन मैं नकारात्मकता को अपने ऊपर हावी नहीं होने देता। मुझे पता था कि कुछ दिन में लोग इन ख़बरों को भूल जाएंगे और एक बार फिर से सब ठीक हो जाएगा। वह बताते हैं कि हुआ भी ऐसा ही। अब लोग फिर से मुझे वही सम्मान देने लगे हैं जो पहले देते थे। सुशील कुमार बताते हैं कि आजकल मैं अपने एक दोस्त के साथ मिलकर कैब का बिजनेस कर रहा हूं, इसके अलावा मोतिहारी में मेरी कुछ दुकानें भी हैं।

सीख रहे हैं सितार बजाना

मैं आजकल सितार बजाना सीख रहा हूं और कुछ महीनों में आपको किसी मंच पर सितार की प्रस्तुति देते हुए भी नज़र आऊंगा। वह बताते हैं कि मैं मोतिहारी में पंडित छोटे लाल मिश्रा संगीत विद्यालय से सितार सीखता हूं और मेरे गुरु मुझे पिछले दो साल से मुफ्त में सितार सिखा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने छठ पर्व के खरना के दिन शारदा सिन्हा के गाने बहंगी लचकत जाए कि ट्यून बजाई और इसे छठी मइया को समर्पित किया। वह बताते हैं कि सितार के साथ - साथ आजकल मैं उर्दू और अंग्रेजी भी सीख रहा हूं।

100 महादलित बच्चों को लिया है गोद

सुशील कुमार को समाज सेवा करना काफी अच्छा लगता है। वह बताते हैं कि मैंने मोतिहारी के कोटवा प्रखंड के मुसहर समुदाय (महादलित) के 100 बच्चों को गोद लिया है और उनकी पढ़ाई का सारा खर्चा मैं उठा रहा हूं। इस काम के लिए मैंने दो शिक्षक नियुक्त किए हैं, जो इन बच्चों की पढ़ाई का पूरा ध्यान रखते हैं।

छठ पूजा पर अपनी बेटी के साथ सुशील कुमार

बन सकते हैं शिक्षक

सुशील कुमार ने बीएड किया है और वह अब मनोविज्ञान में पीएडी भी कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने बिहार टीईटी भी पास किया था। वह कहते हैं कि पहले जब सरकारी स्कूल के पास से निकलता था तो लगता था कि काश मैं भी यहां पढ़ाऊं। इन गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा दे पाऊं। अब मैंने टीईटी पास कर लिया है लेकिन ऐसा कोई ज़रूरी नहीं है कि मैं ये नौकरी करूं। आजकल बहुत से काम हैं जिनमें व्यस्तता रहती है जिसकी वजह से शायद उन बच्चों को अपना पूरा समय नहीं दे पाऊंगा लेकिन अगर मन गया तो हो सकता है जल्द ही किसी सरकारी स्कूल में शिक्षक बना नज़र आऊं।

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