144 लाख लोगों को रोजगार दे रही खादी

144 लाख लोगों को रोजगार दे रही खादीखादी भी मिला रही है फैशन के साथ कदमताल

नई दिल्ली। फैशन के साथ कदमताल करते हुए खादी भी अब तेजी से जहां घर-घर में अपनी पहचान फिर से बना रही हैं, वहीं बड़ी संख्या में इससे लोगों को रोजगार मिल रहा है। आजादी के आंदोलन में महात्मा गांधी के साथ स्वदेशी आंदोलन का हिस्सा रही खादी पिछले कुछ दशक में अपनी चमक खो रही थी लेकिन अब तेजी से आगे बढ़ रही है। खादी बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन वर्षों में खादी और ग्राम उद्योगों में रोजगार में 13 लाख लोगों का इजाफा हुआ है। इस क्षेत्र में कुल 144 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है।

सुक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग भारत सरकार के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार गिरिराज सिंह ने बताया '' वित्‍त वर्ष 2016-17 में खादी उत्‍पादों की बिक्री करीब 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 2005 करोड़ रुपए के स्‍तर पर पहुंच गई जबकि इससे पिछले साल यह 1510 करोड़ रुपए रही थी।''

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हाल में खादी और ग्राम उद्योग आयोग ने एक बयान जारी करके बताया है कि वर्ष 2016-17 में खादी उत्‍पादों की बिक्री में जबरदस्‍त उछाल दर्ज किया गया। सरकारों, कंपनियों, स्‍कूल-कालेजों और राज्‍य सरकारों की तरफ से भारी-भरकम ऑर्डर मिल रहे हैं। 2018-19 के अंत तक 5000 करोड़ रुपए की बिक्री का लक्ष्‍य तय किया गया है।

इस समय देश में 1.42 लाख बुनकर और 8.62 लाख कातने वाले कारीगर हैं। एक अनुमान के अनुसार 9.60 लाख चरखों और 1.51 लाख करघों में खादी बन रही है।

खादी ग्रामोउद्योग भवन, 24 रीगल बिल्डिंग, कनाट सर्कस नई दिल्ली खादी और ग्रामोउद्योग आयोग भारत सरकार का सबसे बड़ा शोरूम है। यहां पर खादी भंडार और खादी बिक्री केन्‍द्र पर खरीदारी के लिए आए लोगों की भीड़ उमड़ी रहती है। देशभर में खादी के जितनी दुकानें और शोरूम हैं सब जगह की यही स्थिति है।

आज खुरदरे खादी वस्‍त्र के साथ-साथ हाथ के कते हाई काउंट धागे से बने वस्‍त्रों की बड़ी मांग है और खादी का फैशन जोर पकड़ता जा रहा है। अब खादी जबरदस्‍त '' फैशन स्‍टेटमेंट '' यानी फैशनेबल लोगों की पहचान बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

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सुक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार के अंतगर्त आने वाले खादी और ग्रामोउद्योग को आगे बढ़ाने के लिए भी सरकार लगातार काम कर रही है। विभिन्न प्रदेश सरकारों के साथ मिलकर भी खादी को बढ़ावा देने के लिए काम किया जा रहा है।

केंद्रीय सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम मंत्री ने बताया था कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद अक्‍तूबर 2014 से मार्च 2015 तक खादी की बिक्री में 17.55 प्रतिशत की जबरदस्‍त बढ़ोतरी हुई। सार्वजनिक उद्यमों और कंपनियों जैसे दिल्‍ली पुलिस, एयर इंडिया, एनटीपीसी, प्रधानमंत्री कार्यालय, ओएनजीसी और रेलवे से बड़ी तादाद में खादी का एकमुश्‍त सप्‍लाई के लिए बल्‍क ऑर्डर मिले हैं।

देश में खादी को बढ़ावा देने के लिए 1957 में खादी और ग्राम उद्योग आयोग की स्‍थापना की गई थी। देश में खादी उद्यागे को बढ़ाने के लिए नए आदर्श चर्खा कार्यक्रम के तहत बेहतरीन कच्‍चे माल की उपलब्‍धता सुनिश्चित करने के लिए खादी और ग्राम उद्योग आयोग ने कुट्टूर (केरल), चित्रदुर्ग (कर्नाटक), सिहोर (मध्‍य प्रदेश), एटा और राय बरेली (उत्‍तर प्रदेश) और हाजीपुर (बिहार) में छह सेंट्रल सिल्‍वर प्‍लांट्स स्‍थापित किए हैं।

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खादी एक ऐसा कपड़ा है जो हाथ से काते गये धागे से ही बनाया जाता है। इसे बनाने में सूत, ऊन और रेशम का इस्‍तेमाल किया जाता है। धागे में घुमाव की दिशा से खादी की पहचान की जा सकती है। खादी के धागे में घुमाव की दिशा अंग्रेजी के ''S'' अक्षर की तरह होती है जिसे आम तौर पर बांयी ओर का या घड़ी की सूइयों की विपरीत दिशा का घुमाव माना जाता है।

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