किसान क्रांति यात्रा : नजरअंदाज किए जाने पर 'दिल्ली चोक' की तैयारी में किसान

किसान क्रांति यात्रा में पश्चिमी यूपी के साथ ही यूपी के कई जिलों और उत्तराखंड के किसान शामिल हैं। ये किसान 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन में दिल्ली में हुंकार भरेंगे। किसान यूनियन के मुताबिक दिल्ली पहुंचने पर पंजाब, हरियाणा के किसान भी यात्रा में शामिल हो जाएंगे।

Ranvijay SinghRanvijay Singh   30 Sep 2018 6:31 AM GMT

किसान क्रांति यात्रा : नजरअंदाज किए जाने पर दिल्ली चोक की तैयारी में किसान

मेरठ (उत्तर प्रदेश)। अपनी मांगों को लेकर हजारों किसानों का काफिला दिल्ली की ओर बढ़ रहा है। इस यात्रा में हजारों ट्रैक्टर भी हैं। किसानों ने ऐलान किया है अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो दिल्ली जाम करेंगे।

भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में हरिद्वार से चला किसानों का काफिला दिल्ली की दहलीज तक पहुंच गया है। किसान क्रांति यात्रा में पश्चिमी यूपी के साथ ही यूपी के कई जिलों और उत्तराखंड के किसान शामिल हैं। ये किसान 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन में दिल्ली में हुंकार भरेंगे। किसान यूनियन के मुताबिक दिल्ली पहुंचने पर पंजाब, हरियाणा के किसान भी यात्रा में शामिल हो जाएंगे।

गांव कनेक्शन भी इन किसानों के साथ-साथ उन्हीं के काफिले में चल रही। मेरठ में परतापुर चीनी मिल के पास डेरा जमाए बैठे किसानों ने गांव कनेक्शन से कई मुद्दों पर खुलकर बात की।

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परतापुर चीनी मिल के पास आराम पूर्वांचल के बस्ती जिले में कुस्मालहां गांव से आए किसान राकेश प्रसाद बहुत थके से नजर आए, उनका एक साथी उनके पैर भी दबा रहा था। पैर में दर्द है तो सफर क्यों के सवाल पर राजेंद्र कहते हैं, "ये सिर्फ मेरी बात नहीं है। ये सभी किसानों के लिए है। जिस हिसाब से महंगाई बढ़ रही है, उस हिसाब से फसल के दाम क्यों नहीं बढ़ रहे? किसानों के साथ ही सरकारें धोखा कर रही हैं। अब और नहीं सहना है।''


भारतीय किसान यूनियन 60 वर्ष की उम्र के बुजुर्ग किसानों को पेंशन देंने, फसल का लाभकारी मूल्य समेत कई मुद्दों को लेकर दिल्ली पहुंच कर सरकार पर संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए दबाव बनाने की तैयारी में है। इस यात्रा में किसान अपना सारा इंतजाम ट्रैक्टर पर लेकर चल रहे हैं। ट्रैक्टर-ट्राली में बारिश-धूप से बचने के इंतजाम के साथ ही मोबाइल चार्जर तक के इंतजाम हैं। ये ट्रैक्टर किसान का सामान उठाने के साथ ही राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के उस फैसले के विरोध में भी है जिसमें 10 साल से पुराने ट्रैक्टर को एनसीआर (दिल्ली-एनसीआर) से बाहर करने की बात है। किसान एक दिन में 20-25 किलोमीटर का सफर करते हैं और हाईवे के आसपास ही डेरा डालते हैं। जहां पर स्थानीय ग्रामीण और यूनियन के लोग इनके खाने-पीने का इंतजाम करते हैं। किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत का कहना हैं, हजारों किसान केंद्र सरकार की नीतियों के चलते सड़क पर हैं।'

यूनियन के जिंदा होने की उम्मीद

किसान क्रांति यात्रा के जरिए किसानों की मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाना है ही साथ ही किसान यूनियन में जान फूंकना है। वर्ष 1988 में दिल्ली के बोट पर आंदोलन कर सरकार को घुटने पर लाने वाले चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत किसान यूनियन के जरिए किसानों को राजनीति के केंद्र में लाने में लगभग सफल रहे थे। किसानों के मसीहा कहे जाने वाले बड़े चौधरी के 2011 में निधन के बाद भारतीय किसान यूनियन लगातार कमजोर होती नजर आ रहा थी।

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यूनियन के पदाधिकारियों का दावा है कि इस यात्रा ने लोगों में उत्साह भर दिया है। यूनियन से जुड़े कुछ पुराने लोग कहते हैं, सात साल में पहले बार लगा कि यूनियन में जान है। इस बार की भीड़ ऐतिहासिक है। ऐसी भीड़ हमने सिर्फ महेंद्र सिंह टिकैत के वक्त देखी थी। इस भीड़ के लिए महेंद्र सिंह टिकैत की तीसरी पीढ़ी के भी चर्चा में है। हजारों किसानों की भीड़ जुटाने का श्रेय यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत के बेटे और महेंद्र सिंह टिकैत के पोते गौरव टिकैत को दिया जा रहा है। यात्रा में आए किसानों का कहना है कि गौरव ने युवाओं को जोड़ने का काम किया है। उसकी वजह से ही आज यात्रा में इस हिसाब की भीड़ जुट पाई है।

दिल्ली चोक करने का इरादा

23 सितंबर को हरिद्वार से चला किसानों का काफिला 2 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचेगा। इससे पहले 1 अक्टूबर को ही कई राज्यों के किसान दिल्ली पहुंच जाएंगे। इनमें पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश के होंगे। किसानों का कहना है कि इस बार दिल्ली चोक हो जाएगी। इसी बीच किसानों के बीच चौधरी महेंद्र सिंह का नारा याद करते हुए एक किसान ने नारा लगाया, ''इंडिया वाले सुधर जाओ अब दिल्लीं में भारत आया है।''


योगी-मोदी की सही हैं, काम तो दूसरे बिगाड़ रहे

यात्रा के दौरान और पड़ाव रुकने पर खेती किसानी से लेकर सियासत तक खूब बातें होती हैं। यात्रा में कई राजनीतिक दलों के समर्थक भी हैं, लेकिन वो किसान के मुद्दे पर किसान यूनियन के साथ हैं। बिजनौर के राकेश पूरा कर्ज माफ नहीं किए जाने से नाराज हैं। नाराजगी जताते हुए वो कहते हैं, ''योगी और मोदी सही हैं, ये जिनसे काम लेना चाह रहे हैं ये गलत हैं। इन काम करने वालों को बदल दिया जाए तो सब सही हो जाएगा।''

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छुट्टा पशु बड़ा मुद्दा

यात्रा में आए ज्यादातर किसान छुट्टा पशुओं से परेशान नजर आए। किसानों की चर्चा में लगातार इन पशुओं का जिक्र रहा। उनके मुताबिक, इनकी वजह से फसल खराब हो रही है। आप कुछ नहीं कर सकते। उन्हें शिकायत है कि सरकार सब जानते हुए इस पर कोई काम नहीं कर रही।

ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सारे इंतजाम


बिजनौर के रहने वाले नितिन सिरोही (29 वर्ष) को मोबाइल लगातार चार्ज रखना है। उन्होंने अपने ट्रैक्टर में चार्जिंग की पूरी व्यवस्था की है। इनकी ट्राली में पंखा भी लगा है। नितिन कहते हैं, ''देश अब डिजिटल हो रहा है, बस किसान पीछे छूट गया। सरकार को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए था।'' नितिन रोजगार न मिलने को लेकर भी चिंता जताते हैं। उनके मुताबिक, योजनाएं लाने भर से काम नहीं होगा, उन्हें जमीन पर भी उतारना चाहिए।

पत्नी को पसंद है तीखा, इस लिए बना रहा खाना

यात्रा में सैकड़ों किसान अपने परिवार के साथ आए हैं। कई किसान ऐसे भी हैं जिनकी पत्नियां उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। परतापुर पड़ाव के दौरान खाना बनाते मिले महाराजगंज जिले के नौतनवा से आए चंद्रबदन बताते हैं, ''मेरी पत्नी को तीखा खाना अच्छा लगता है। यहां सब फीका मिल रहा है। इसलिए खुद ही खाना बना लिया जाता है।'' उनकी पत्नीं भी खाना बनाने में उनका सहयोग करती नजर आईं। यात्रा में शामिल ज्यादातर किसान अपने खाने की व्यवस्था करके चल रहे हैं। इसमें अनाज से लेकर गैस चूल्हा और बर्तन तक शामिल हैं।


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