एक तरफ 35,000 किसान, दूसरी तरफ महाराष्ट्र सरकार, क्या बातचीत से बनेगी बात?

एक तरफ 35,000 किसान, दूसरी तरफ महाराष्ट्र सरकार, क्या बातचीत से बनेगी बात?फोटो साभार: इंटरनेट

पिछले छह दिनों से नासिक से 180 किलोमीटर की पैदल मार्च करते हुए महाराष्ट्र के 35,000 किसान सोमवार को मुंबई के आजाद मैदान में पहुंच रहे हैं। अब ये किसान दोपहर में एक साथ विधानसभा का घेराव करेंगे। वहीं, इतनी बड़ी संख्या में किसानों के महामोर्चा के सामने महाराष्ट्र सरकार में हलचल बढ़ गई है।

महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार की ओर से एक कमेटी बनाई गई है, जो किसानों की मांगों पर विचार करेगी। मगर अब यह देखना होगा कि एक तरफ 35,000 किसान और दूसरी तरफ महाराष्ट्र सरकार का प्रतिनिधिमंडल, ऐसी स्थिति में क्या अब इन नाराज किसानों से सरकार की बातचीत से बात बन सकेगी?

किसानों की मांगों पर विचार के लिए फडणवीस सरकार की ओर से बनाई गई इस कमेटी में छह मंत्री शामिल हैं। इनमें गिरीश महाजन, विष्णु सवारा, एकनाथ शिंदे, सुभाष देशमुख, पांडुरंग फुडकर और चंद्रकांत पाटिल हैं। किसानों की इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने कमेटी के प्रमुख मंत्री गिरीश महाजन को किसानों से बातचीत के लिए भेजा था, तब गिरीश महाजन ने किसानों को आश्वासन दिया था कि सरकार उनकी मांगों को लेकर सकरात्मक दृष्टिकोण अपनाए है।

इस मुलाकात के बाद एक बयान में गिरीश महाजन ने कहा, “हमने किसानों से बातचीत की है और किसानों के प्रमुख और कार्यकारिणी सदस्य सोमवार को मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे, मुझे पूरी उम्मीद है कि किसानों की मांगों को लेकर एक सकारात्मक हल निकलेगा।“

दूसरी ओर आजाद मैदान में हजारों की संख्या में एकत्र हो रहे इन किसानों को राजनीतिक पार्टियों का समर्थन भी मिल चुका है। कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना समेत कई पार्टियों ने किसानों की मांगों समेत इस पैदल मार्च का समर्थन किया है। शिवसेना की ओर से एकनाथ शिंदे और आदित्य ठाकरे किसानों के लिए सामने आए। दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी किसान के समर्थन में बयान दिया है कि यह सिर्फ महाराष्ट्र के किसानों का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश के किसानों का मुद्दा है।

इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “हम किसानों से बात करेंगे और उनके मुद्दों को सुलझाएंगे। महाराष्ट्र के किसानों की मांगों को लेकर हमारी सरकार पूरी तरह से सकारात्मक है।“

किसानों की पूर्ण कर्जमाफी और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने की प्रमुख मांगों के साथ किसानों की मांग है कि कपास फसल में कीट लगने से हुए भारी नुकसान के साथ ओलावृष्टि से नुकसान पर सरकार हर एकड़ पर किसान को 40,000 रुपए मुआवजा दें। इसके अलावा किसानों के बिजली बिल माफ किए जाएं।

वहीं ऑल इंडिया किसान सभा के अध्यक्ष डॉ. अशोक धवले ने कहा, “सरकार ने किसानों का 34,000 करोड़ कर्जमाफ करने का वादा किया था, यह वादा पिछले साल किया था, मगर बीते सात महीनों में अब तक 10 प्रतिशत किसानों का कर्ज माफ नहीं किया जा सका है।“

वहीं किसान सभा के महासचिव अजीत नावले ने ‘गांव कनेक्शन’ से फोन पर बातचीत में बताया, “महाराष्ट्र सरकार ने सिर्फ किसानों के साथ विश्वासघात किया है। किसानों के नाम पर सिर्फ सरकार ने योजनाओं की घोषणा की गई, यही कारण है कि किसानों के सामने ऐसी नौबत आ चुकी है।“ उन्होंने आगे कहा, ”अब महाराष्ट्र के किसान एकजुट होकर महाराष्ट्र विधानसभा घेरेंगे और सरकार के खिलाफ आवाज उठाएंगे।“

महाराष्ट्र सरकार ने नहीं पूरा किया वादा

पिछले साल महाराष्ट्र की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसानों के लिए 34,000 करोड़ रुपए का किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी, मगर पिछले सात महीनों में 13,700 करोड़ का ही कर्ज माफ किया गया। मीडिया रिपोटर्स की मानें तो महाराष्ट्र के किसानों पर कुल 1 लाख 12 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। यही कारण है कि जून 2017 से अब तक महाराष्ट्र के 1753 किसान कर्ज के बोझ में खुशकुशी कर चुके हैं।

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