भारत द्वारा पानी रोकने पर पाकिस्‍तान पर होगा कितना असर?

Ranvijay SinghRanvijay Singh   22 Feb 2019 2:14 PM GMT

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भारत द्वारा पानी रोकने पर पाकिस्‍तान पर होगा कितना असर?

लखनऊ। जम्‍मू कश्‍मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद से ही 'सिंधु जल समझौते' को खत्‍म करने की मांग उठने लगी है। इसी कड़ी में गुरुवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ट्वीट कर बताया कि भारत सरकार रावी, व्यास और सतलज नदियों का पानी (भारत के हिस्से वाला पानी) पाकिस्तान नहीं जाने देगी। इसके लिए डैम बनाया जा रहा है। हालांकि जानकारों का कहना है कि इससे पाकिस्‍तान पर खासा असर नहीं पड़ेगा, क्‍योंकि दोनों देशों के बीच हुई संधि टूटी नहीं है, बल्‍कि भारत अपने हिस्‍से का पानी इस्‍तेमाल कर रहा है।

विदेश मामलों के जानकार और पूर्व विदेश सचिव श्री शशांक ने गांव कनेक्‍शन से फोन पर बात करते हुए कहा, ''संधि के मुताबिक भारत अपने हिस्‍से का पानी इस्‍तेमाल करेगा, लेकिन इसमें समय लगेगा, इतनी जल्‍दी चीजें कहां बनती हैं।'' नितिन गडकरी के ट्वीट पर श्री शशांक कहते हैं, ''संधि के अनुसार यह अपने 20 प्रतिशत जल का पूरा इस्‍तेमाल करने की बात है। सिंधु जल समझौता तो बना ही रहेगा, उससे कोई छेड़छाड़ नहीं है। भारत अपने हिस्‍से का पानी इस्‍तेमाल करने की बात कह रहा है।''

क्‍या है सिंधु जल समझौता?

इससे पहले भी भारत-पाकिस्तान के बीच जब-जब विवाद बढ़ा है या कोई ऐसी घटना हुई है तो सिंधु जल समझौते को तोड़ने की बात उठती रही है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि 'सिंधु जल समझौता' है क्‍या? 19 सितंबर 1960 को कराची में सिंधु नदी घाटी समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे।


समझौते के तहत सिंधु नदी घाटी की नदियों को पूर्वी और पश्चिमी नदियों में विभाजित किया गया। पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास और सतलज) भारत के हिस्‍से में आईं तो पश्‍चिमी नदियां (सिंधु, झेलम और चिनाब) पाकिस्‍तान के हिस्‍से में। समझौते के मुताबिक भारत पूर्वी नदियों का पानी बेरोकटोक इस्तेमाल कर सकता है। यह पूरे पानी का करीब 20 प्रतिशत है। यानी पाकिस्‍तान को 80 प्रतिशत पानी मिलता है और भारत को 20 प्रतिशत। नितिन गडकरी इसी 20 प्रतिशत पानी को पाकिस्तान नहीं जाने देने की बात कह रहे हैं।

डैम बनाने से पाकिस्‍तान को नहीं कोई दिक्‍कत

पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय के सचिव शमैल अहमद ख्वाजा ने इस मुद्दे पर पाकिस्‍तानी अखबार डॉन से बातचीत में कहा, ''भारत के पूवी नदियों (रावी, ब्यास और सतलज) के पानी को मोड़ने से पाकिस्‍तान फिक्रमंद नहीं है। सिंधु जल समझौते के तहत ही भारत को ऐसा करने की इजाजत है।''

शमैल अहमद ख्वाजा ने कहा, ''भारत रावी नदी पर अपने हिस्से का पानी इस्‍तेमाल करने के लिए शाहपुर कंडी बांध बनाना चाहता है, इससे पाकिस्तान को कोई समस्या नहीं है। भारत का यह प्रोजेक्ट 1995 से ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। अगर अब भारत अपने पानी के इस्तेमाल के लिए इसे बनाना चाहता है तो इससे पाकिस्तान को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।'' शमैल अहमद ने कहा कि ''अगर भारत चिनाब, सिंधु और झेलम का पानी रोकता है तो इसपर पाकिस्तान निश्चित तौर पर अपना विरोध दर्ज कराएगा।''

सलमान हैदर, पूर्व विदेश सचिव

पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर ने गांव कनेक्‍शन से फोन पर बात करते हुए कहा, ''पहले भी जब-जब तनाव रहा है तो इस समझौते को लेकर बात उठी है। भारत का हक है कि वो अपने हिस्‍से का पानी इस्तेमाल करे, जोकि अभी तक नहीं कर रहा था। हम उन्‍हें (पाकिस्‍तान को) यह दिखाना चाहते हैं कि पानी पर हमारा भी हक है। जब रिश्‍ते खराब हो गए हैं और बिगड़ते जा रहे हैं तो भारत को इस समझौते को लेकर भी सोचना चाहिए। इसके मायने यह नहीं हैं कि हम समझौता तोड़ रहे हैं। अंतरर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर ऐसे समझौते बहुत अहम होते हैं। भारत की ओर से भी ऐसा कदम नहीं उठाया गया है।''

सलमान हैदर से ही मिलती जुलती बात जेएनयू के सेंटर फॉर साउथ एशियन स्‍टडीज में प्रोफेसर संजय के. भारद्वाज कहते हैं। संजय कहते हैं, ''भारत अपने पानी का भी पूरी तरह इस्‍तेमाल नहीं कर रहा है। डैम इसी पानी को इस्‍तेमाल करने के लिए बनाया जाएगा।'' संजय के. भारद्वाज कहते हैं, ''इस फैसले से पाकिस्‍तान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पकिस्‍तान जो 80 प्रतिशत पानी ले रहा है उसके साथ छेड़छाड़ हो तो उसपर असर होगा।''


सिंधु जल समझौते को खत्‍म करने और पानी रोकने के सवाल पर प्रोफेसर संजय कहते हैं, ''आप ऐसे देखें कि पाकिस्‍तान खुद अंतरर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर आतंकवाद को खत्‍म करने की बात करता है और फिर अपने देश में उसे सपोर्ट भी करता है। ऐसे में पाकिस्‍तान से समझौता कैसे करेंगे। क्‍या पाकिस्‍तान सभी अंतरर्राष्‍ट्रीय कानून मान रहा है, तो जब वो ऐसा नहीं कर रहा तो हम मजबूर क्‍यों हैं?''

संजय कहते हैं, ''पानी को मोड़ना बिल्‍कुल मुमकिन है। अगर भारत पानी को मोड़ नहीं सकता तो फिर संधि की क्‍या जरूरत थी। अगर आपने संधि की है तो इसका मतलब है कि इससे पाकिस्‍तान पर असर होगा। डैम बनाकर पानी को मोड़ा जा सकता है, लेकिन अभी हम अपने ही पानी का इस्‍‍तेमाल नहीं कर पा रहे। पूरे पानी का सवाल ही नहीं उठता।''

   

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