कौन हैं कक्का जी, जिन्होंने एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नींद उड़ा दी 

कौन हैं कक्का जी, जिन्होंने एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नींद उड़ा दी शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी

भोपाल। "खेती के लिए खाद खरीदने लाइन में लगे बच्चे से जिले के कलेक्टर साहब ने कहा कि बेटा धूप में क्यों खड़े हो छांव में आ जाओ तो बालक ने जवाब दिया कि साहब किसान का बेटा जब छांव से प्रेम करेगा तो इस देश की जनता का पेट कौन पालेगा..." यह 11 साल का बच्चा था शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी इन दिनों मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी का एक ही नारा है "खुशहाली के दो आयाम, ऋण मुक्ति और पूरा दाम" किसानों के प्रमुख नेता के रूप में पहचान रखने वाले कक्का जी मध्य प्रदेश में भारतीय किसान मजदूर संघ के अध्यक्ष और संस्थापक सदस्य के रूप में किसानों की अगुवाई कर रहे है।

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जानें कक्का जी के बारे में

20 दिसम्बर 2010 को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल को 15 हजार किसानों ने अपने ट्रेक्टरों से घेर लिया था। मुख्यमंत्री निवास से लेकर शहर के सभी प्रमुख रास्तों को किसानों ने जाम कर दिया था। किसानों के बिजली और पानी जैसी 85 माँगों को लेकर उस समय आरएसएस के अनुसांगिक किसान संगठन भारतीय किसान संघ की मध्य प्रांत इकाई के अध्यक्ष के रूप में कक्का जी ने मोर्चा सम्भाला था। इसी अंदोलन ने शिव कुमार शर्मा उर्फ कक्का जी को एक नई पहचान भी दी थी।

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मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के वनखेड़ी के पास ग्राम मछेरा खुर्द में 28 मई 1952 को एक किसान परिवार में जन्मे कक्का जी ने अपनी शिक्षा जबलपुर में पूरी की पहले बीएससी की पढ़ाई के दौरान वह छात्र राजनीति में जेडीयू नेता शरद यादव के साथ कूद पड़े। जबलपुर विश्वविद्यालय से लॉ ग्रेजुएट और एमए राजनीति शास्त्र की शिक्षा प्राप्त कक्का जी छात्र राजनीति में शरद यादव के साथ जुड़े रहे।

कई बार जेल गए

लगभग 44 बार जेल यात्रा कर चुके कक्का जी बताते हैं कि जेपी आंदोलन और इमरजेंसी के दौरान वह कई बार जेल गए। जिसके बाद 1981 में वह मध्य प्रदेश सरकार कि विधि बोर्ड में विधिक सलाहकार के रूप में काम किया। लेकिन इस दौरान तत्कालीन मध्यप्रदेश के बस्तर में आदिवासियों की जमीन मुक्त करवाने के केन्द्र सरकार के कानून 70 (ख) के तहत वह कई रसूखदारों के निशाने पर आ गए जिसके बाद उनका ट्रांसफर भोपाल कर दिया गया।

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नौकरी छोड़ कूदे किसान आंदोलन में

कुछ समय नौकरी करने के बाद वह किसान आंदोलन में कूद पड़े संघ के अनुसांगिक किसान संगठन भारतीय किसान संघ में पहले महामंत्री और बाद में अध्यक्ष रहे। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले की बरेली तहसील में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली लगने से एक किसान की मौत और आगजनी के बाद कक्का जी को गिरफ्तार कर लिया गया था वह दो महीने जेल में भी रहे। उन पर 12 मुकदमे भी चल रहे हैं। कक्का जी के परिवार में उनकी पत्नी डॉ. मंजुला शर्मा जो शासकीय डिग्री कालेज में प्रिंसिपल है और दो बेटीयां निहारिका और आवंतिका हैं। निहारिका स्पोर्ट टीचर तो आवंतिका दिल्ली में इंजीनियर है।

भ्रष्ट्राचार से चिढ़

कक्का जी बताते हैं कि दिसम्बर 2010 में तीन दिनों के लिए राजधानी भोपाल का घेराव किया था उस समय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रखी गई 85 मांगों के माँग पत्र को गीता बताया था। शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कक्का जी कहते है कि शिवराज सिंह चौहान विवेकहीन और दिशाहीन हैं। वह कहते है कि शिवराज सिंह चौहान का विरोध करने पर लोग कहते हैं कि मैं उनके प्रति व्यक्तिगत हो जाता हूं लेकिन मैंने हमेशा ही अपने जीवन में शोषण, झूठ और भ्रष्ट्राचार के खिलाफ संघर्ष किया है और इन्हीं बातों से मुझे चिढ़ है।

पहले थे शिवराज सिंह के शुभचिंतक, अब विरोधी

मध्यप्रदेश में कभी बीजेपी सरकार बनवाने में प्रमुख भूमिका रखने वाले और शिवराज सिंह चौहान के शुभचिंतकों में गिने जाने वाले कक्का जी अब उनके सबसे प्रबल विरोधियों में गिने जाते हैं। शिवकुमार शर्मा किसानों के लिए बनाए गए स्वामीनाथन आयोग को लागू करने की वकालत करते हैं। 1 जून से मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में शुरू हुए किसान आंदोलन में मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन की अगुवाई शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी कर रहे है जो अब किसी पहचान के मोहताज नहीं।

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