लखनऊ की इस महिला को क्यों मिला अकादमी अभिनव किसान पुरस्कार ?

लखनऊ की इस महिला को क्यों मिला अकादमी अभिनव किसान पुरस्कार ?

लखनऊ। गांवों मे अक्सर महिलाएं कच्‍चे आम से खटाई बनाती है, फिर उसे बाजार में बेचकर अपनी आय को बढ़ाती हैं। लेकिन खटाई बनाते समय उन्नत तकनीकों का उपयोग न करने से उनकी खटाई काली पड़ जाती है, और फिर उन्हें उसे औने पौने दाम पर बिचौलियों को बेचना पड़ता है।

महिला किसानों को मूल्य संवर्धन द्वारा ज्यादा आय दिलाने और बिचौलियों से बचाने के लिए फार्मर फ़र्स्ट परियोजना के तहत केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के वैज्ञानिकों ने 30 महिलायों के समूह को लखनऊ के मोहम्मद नगर तालुकेदारी गांव में कच्चे आम के प्रसंस्करण पर प्रशिक्षण दिया था। यहां से प्रशिक्षण प्राप्त लखनऊ के मोहम्मद नगर तालुकेदारी गांव की महिला किसान श्वेता मौर्य को हैदराबाद स्थित आईसीएआर (राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी) द्वारा अभिनव किसान पुरस्कार दिया गया।

यह पुरस्कार आईसीएआर के महानिदेशक डॉ त्रिलोचन महापात्र के हाथों दिया गया। इस पुरस्कार के लिए पूरे देश से आठ किसानों का चयन किया गया था। उन आठ चयनित लोगों में एक नाम लखनऊ श्वेता मौर्य का भी था। स्वेता अब अमचूर, आम पना के साथ-साथ और भी कई उन्नत प्रकार के आचार बनाती हैं। 26 वर्षीय श्वेता पुरस्कार मिलने से बहुत खुश हैं।

वह बताती हैं कि पुरस्कार की घोषणा होने के बाद से ही आमचूर, आमपन्ना, अचार के लिए लोग मुझसे संपर्क कर रहे हैं। इसके अलावा अब उन्हें हैदराबाद और मध्य प्रदेश से भी आर्डर मिलने लगे हैं। उन्‍होंने बताया कि आने वाले वर्षों में मैं एक सफल उद्यमी बनना चाहती हूं। बागवानी संस्‍थान के वैज्ञानिक डॉ पवन गुर्जर के दिए गए प्रशिक्षण और संस्थान के निदेशक के सहयोग से ही वह यह कार्य सफलता से पूरा कर पायी हैं।

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केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के प्रशिक्षण में महिलाओं को आंधी के कारण गिरे हुये आमों के कच्चे फलों से अमचूर बनाने की उन्नत तकनीक बताई जाती है। इसके अलावा महिलाओं को अमचूर बनाने की विधि में उपयोग आने वाले उपकरण जैसे मैंगो पीलर तथा सोलर डीहाइड्रेटर उपलब्ध कराया जाता है। इससे प्रेरणा लेकर महिला किसान नए विधि से अमचूर बना रही हैं और इसको शहरी क्षेत्रों में अच्छे दाम पर बेच भी रही हैं।

फार्मर फ़र्स्ट परियोजना के अन्वेषक डॉ मनीष मिश्रा बताते है कि जिन महिलाओं को इस तकनीक से जोड़ा गया, उन्हें पारम्परिक विधि से कार्य करने वाली महिलाओं की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक आय प्राप्त हुई। मूल्य संवर्धन के अतिरिक्त संस्थान बहुत सी बागवानी संबंधित प्रौद्योगिकी में उद्यमिता विकास के लिए किसानों को सहयोग कर रही है। इस दिशा में बहुत से युवक, महिलाएं और विद्यार्थी इन तकनीकों का लाभ उठाने के लिए संस्थान से सलाह भी ले रहे हैं। कई उद्यमियों ने यहां से सलाह लेकर अपना व्यवसाय स्थापित कर लिया है।

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