कृषि उन्नति मेले में किसानों को नहीं मिली ठहरने की जगह, पेड़ के नीचे गुजारनी पड़ी रात

Anil ChaudharyAnil Chaudhary   17 March 2018 7:35 PM GMT

कृषि उन्नति मेले में किसानों को नहीं मिली ठहरने की जगह, पेड़ के नीचे गुजारनी पड़ी रातनई दिल्ली में कृषि उन्नति मेले में खुले आसमान के नीचे रात गुजारते किसान।

नई दिल्ली में चल रहे कृषि उन्नति मेले में उत्तर प्रदेश से आए करीब 50 किसानों के लिए अधिकारियों का बेपरवाह रवैया देखने को मिला, जहां किसानों के लिए ठहरने तक की व्यवस्था तक नहीं की गई।

यह स्थिति उत्तर प्रदेश के पीलीभीत के किसानों के सामने आई, जहां एक दिन से थके-हारे किसानों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर होना पड़ा। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा नई दिल्ली में कृषि उन्नति मेला-2018 में भाग लेने के लिए पीलीभीत से 45 सदस्य कृषक दल यहां पहुंचा था। किसानों की यह व्यवस्था नाबार्ड की ओर से पहल ग्रामीण सेवा समिति द्वारा की गई थी।

किसानों का यह दल 16 मार्च को बस से सुबह 4 बजे दिल्ली पहुंचा था। रात में बस के सफर में थक-हार कर ये किसान दिन भर मेले में रहने के बाद शाम को आराम करने के लिए अफसरों से ठहरने के प्रबंध के बारे में पूछताछ करते रहे, मगर अफसर उन्हें बार-बार टरकाते रहे।

यही अधिकारी बाद में इन किसानों को खुले मैदान में एक पेड़ के नीचे बैठा कर यह कह कर गायब हो गए कि हम रुकने का इंतजाम करने जा रहे हैं। रात में कृषक दल के सदस्य खुले आसमान के नीचे अधिकारियों के आने का इंतजार करते रहे, मगर चार घंटे बाद भी कोई अफसर नहीं पहुंचा। नाबार्ड की ओर से पीलीभीत से सब्जी और मशरूम उत्पादन करने वाले किसानों को मेले में भेजा गया था।

बता दें कि इसी कृषि उन्नति मेले में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई कृषि वैज्ञानिकों और किसानों को सम्मानित भी किया।

इस दल में शामिल मशरूम उत्पादक गाँव गोरिया कला निवासी राम अवतार मौर्या गाँव कनेक्शन से बातचीत में बताते हैं, “पहल ग्रामीण सेवा समिति के माध्यम से हम लोगों को नाबार्ड की ओर से इस मेले में भेजा गया। 16 मार्च को हम लोग बस द्वारा दिल्ली आ गए। जहां हमारे ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। रात में काफी देर तक हमें खुले में एक पेड़ के नीचे समय बिताना पड़ा, लेकिन रात में 11 बजे के आसपास काफी इंतजार के बाद हम किसानों मेले में हंगामा करने में मजबूर होना पड़ा“

वहीं एक और कस्बा न्यूरिया निवासी किसान रक्षपाल सिंह बताते हैं, "ठहरने की व्यवस्था हम किसानों के लिए थी ही नहीं, समिति और नाबार्ड की ओर से कम से कम किसानों के रुकने की व्यवस्था तो करनी चाहिए थी, दिन भर के थके-हारे हम लोगों को पेड़ के नीचे बैठा दिया गया, यह कहकर कि अभी व्यवस्था करते हैं। काफी देर तक किसी अधिकारी के न आने के बाद हम लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया, तब जाकर अधिकारियों ने हम लोगों के लिए ठहरने की व्यवस्था कराई।“

इस बारे में जब नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक सुभ्रम दत्ता ने गाँव कनेक्शन से बताया, "इतने बड़े मेले में 50 किसानों के रुकने की व्यवस्था करने में थोड़ा समय लगा। इस बीच कुछ किसानों ने नाराजगी जाहिर की, लेकिन ऐसा नहीं है कि उनके रुकने और खाने की व्यवस्था नहीं की गई। इतनी लंबी यात्रा करने के बाद कुछ किसान थक गए होंगे। ठहरने की व्यवस्था देर से होने के कारण उन्हें कुछ परेशानी हो सकती है, लेकिन अब सब व्यवस्था कर दी गई है।"

नाबार्ड की ओर से एनजीओ के माध्यम से सरकारी खर्चे पर किसानों को कृषि संबंधित आधुनिक जानकारी हासिल करने के लिए समय-समय पर देश में लगने वाले कृषि मेलों में भेजने की व्यवस्था करता रहता है।

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