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बिहार में जान लेता बुखार: मुजफ्फरपुर के अस्पतालों की ये तस्वीरें विचलित करती हैं

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   15 Jun 2019 5:37 AM GMT

बिहार में जान लेता बुखार: मुजफ्फरपुर के अस्पतालों की ये तस्वीरें विचलित करती हैं

मुजफ्फरपुर (बिहार)। गोद में बीमार बच्चा, आंखों में आंसू, डॉक्टर से गुजारिश, किसी को ढांढस बंधाते रिश्तेदार... बिहार के मुजफ्फरपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में ये मंजर आम है। पहले बने संदिग्ध बुखार से अब तक 70 बच्चों की जान जा चुकी है। मेडिकल कॉलेज के साथ निजी अस्पतालों में भी मातम है।

दिल्ली से करीब 1100 किलोमीटर दूर बिहार के मुजफ्फरपुर एक पखवाड़ा पहले उस वक्त सुर्खियों में आया जब यहां एक के बाद कई बच्चों की मौतें शुरु हुईं। 50 से पीड़ित बच्चे ज्यादा सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती है। स्थानीय लोगों में कोई इसे चमकी कहती है तो कोई दिमागी बुखारी। पढ़े लिखे लोग जापानी इंसेफेलाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) भी कहते हैं लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक अभी तक इसकी पुख्ता पहचान नहीं हो पाई है। मेडिकल भाषा वो इसे हाइपोग्लेशिमिया कह रहे हैं। लेकिन इन सबसे से दूर माता-पिता के लिए ये जानलेवा बुखार है।

अस्‍पताल में इलाज के लिए भर्ती एक बच्‍ची फोन पर अपने पापा से बात करते हुए।


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अस्पतालों में भीड़ है, बुखार पीड़ित बच्चों के लिए अलग से वार्ड बनाए गए हैं। लेकिन हर बेड़ पर एक दो बच्चे हैं और बच्चों को निहारते उनके माता-पिता। रसीली लीची के इस शहर के अस्‍पतालों में मातम छाया हुआ है। हर शख्‍स अपने कलेज के टुकड़ें को गले से लगाए रोता दिखता है। अस्‍पताल में जितनी बार डॉक्‍टर बच्‍चों की जांच करने आते हैं, परिजनों उन्‍हें एक उम्‍मीद की नजर देखते हैं। देखें वहां की श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH) और केजरीवाल अस्पताल का मंजर... (सभी फोटो- चंद्रकांत मिश्रा)

जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं मासूम...


अस्‍पताल में ही रह रहा परिवार, अकेले बच्‍चें को नहीं छोड़ पा रही हैं मां।


बिहार के मुजफ्फरपुर में बीमार बच्चों के आने का सिलसिला जारी है। जो बच्चे भर्ती हैं, उनके परिजन दूसरों की हालत देख भी परेशान हैं।

बच्‍चों की हालत देख सिहर जा रहा है कलेजा...
















मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कालेज में सबसे ज्यादा बच्चे भर्ती है। चमकी बुखार कहो जाने वाली संदिग्ध बीमारी से पीड़ित बच्चे जिस वार्ड में भर्ती हैं, वहां कोई एक दूसरे से ज्यादा बात नहीं करता है। मौत के साए में चल रहे इलाज से माता-पिता सदमे में हैं।

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