अगर आप बच्चा गोद लेने की सोच रहें हैं, तो यह नियम जरुर पढ़ लें 

अगर आप बच्चा गोद लेने की सोच रहें हैं, तो यह नियम जरुर पढ़ लें प्रतीकात्मक तस्वीर 

लखनऊ। देश के सबसे कम उम्र के सिंगल फादर आदित्य तिवारी बताते हैं ,'जब मैंने सितंबर 2014 में बिन्नी को गोद लेने का फैसला किया, तब नियम यह था कि अगर कोई अविवाहित शख्स किसी बच्चे को कानूनी तौर पर गोद लेना चाहता है, तो उसकी उम्र कम से कम 30 साल होनी चाहिये। बाद में सरकार ने नियम में बदलाव किया और यह उम्र घटाकर 25 साल कर दी गयी। तब जाकर मैं बिन्नी को गोद ले सका।'

आदित्य तिवारी समाज के लिए एक उदाहरण हैं, जिन्हें देश में सबसे कम उम्र का सिंगल फादर कहा जाता है। इंदौर के रहने वाले आदित्य तिवारी ने साल 2016 में बिन्नी नाम के एक विशेष आवश्यकताओं वाले (दिव्यांग) बच्चे को गोद ले कर पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया।

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क्या हैं भारत में स्पेशल बच्चे को गोद लेने के नियम

भारत में गोद लेने की प्रतीक्षा करने वाले 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे 'विशेष आवश्यकताओं' वाली श्रेणी में आते है, लेकिन देश में सबसे कम लोग इसी श्रेणी के बच्चों को गोद लेते हैं। सामाजिक दबाव के अलावा इस श्रेणी के बच्चों को गोद न लेने का एक सबसे बड़ा कारण है, इससे जुड़ी प्रक्रिया के बारे में जानकारी की कमी। हालांकि धीरे - धीरे लोग जागरूक हो रहें है। उन्हें लग रहा है कि विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों को भी अच्छे और प्यार भरे माहौल में रहने का हक़ है और उन्हें ये दिया जाना चाहिए। हम यहां आपको बता रहा हैं दिव्यांग बच्चे को गोद लेने से जुड़े नियमों और प्रक्रिया के बारे में…

भारत में गोद लेने की प्रक्रिया में बच्चों को दो श्रेणियों में बांटा गया है - सामान्य ज़रूरतें और विशेष आवश्यकताओं वाले। विशेष जरूरतों वाले वर्ग में से कई बच्चों को स्वस्थ और सक्रिय होने के लिए आवश्यक चिकित्सकीय निदान और सहायता की आवश्यकता होती है, लेकिन यह सहायता उनके लिए उपलब्ध नहीं हो पाती जब तक कि वे किसी एक परिवार में पहुँच नहीं जाते हैं ।


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  • जो लोग बच्चा गोद लेना चाहते हैं उनके लिए विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए एक अलग श्रेणी बनाई गई है। बच्चा गोद देने वाली एजेंसियों ने इसको ठीक से वर्गीकृत नहीं किया है। अगर कोई व्यक्ति एक सामान्य बच्चे को गोद लेना चाहता है लेकिन उसे ऐसा बच्चा दे दिया जाता है जो दिव्यांग हो तो वह उसके पास अधिकार होता है कि वह उसे अस्वीकार कर सके। इसके लिए केंद्रीय दत्तक संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) में शिकायत भी दर्ज की जा सकती है। ऐसे में वो दिव्यांग बच्चा उस समय को खो देता है जिसमें उसे शायद कोई दूसरा परिवार अपना सकता था।
  • माता पिता बनने वाले इच्छुक लोग केंद्रीय अथॉरिटी में आवेदन करके अपनी पसंद जैसे कि- बच्चे का लिंग, उम्र, स्थान और स्वास्थ्य के बारे में पता कर सकते हैं। जो लोग 'विशेष आवश्यकताओं' वाले बच्चे को गोद लेना चाहते हैं वो स्वास्थ्य पर सटीक चुनाव करें ।
  • एक सामाजिक कार्यकर्ता घर को चेक करने के बाद, माता-पिता की इच्छा और अपनाने की क्षमता का मूल्यांकन करता है। ऐसे माता-पिता के लिए कोई प्रतीक्षा अवधि नहीं होती है, जो विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चे चाहते हैं क्योंकि ऐसे उपलब्ध बच्चों की संख्या सोर्स: बीबीसी हिंदी
    संभावित माता-पिता की संख्या से अधिक रहती है ।
  • विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए एक अतिरिक्त सहायक सुविधा होती है
    कि अगर संभावित माता-पिता अपनी पसंद के रूप में 'सामान्य' स्वास्थ्य का चयन करते हैं, तो वे उन बच्चों की सूची देख सकते हैं जो गोद लेने की प्रतीक्षा में होते हैं। इसका मतलब यह है कि जो लोग शुरू में विशेष जरूरतों वाले बच्चों से अनजान थे, वे अपने दिमाग को बदल सकते हैं और एक विशेष जरूरत के बच्चे को स्वीकार कर सकते हैं।
  • एक बच्चे को स्वीकार करने के बाद, माता-पिता एक 'पालक देखभाल समझौते' के तहत अपने बच्चे को घर लाते हैं। बच्चे के लिए जिम्मेदार गोद लेने वाली एजेंसी सुनवाई का अनुरोध करती है और अंतिम अदालत का आदेश प्रक्रिया को पूरा करता है।


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क्यों गोद लेते हैं बच्चा

बच्चा गोद लेने में ज्यादातर ऐसे जोड़े होते हैं जिसमें पत्नी किसी कारणवश गर्भ धारण नहीं कर पाती लेकिन आजकल कुछ लोगों की सोच इससे हटकर भी है।

कुछ लोग परिवार को पूरा करने के लिए बच्चा एडॉप्ट कर रहे हैं। अगर लड़का है तो लड़की को गोद लेकर फैमिली कंप्लीट। ऐसा करने का एक कारण पति – पत्नी दोनों का कामकाजी होना भी है। दोबारा प्रैग्नेंसी और बच्चे की देखभाल जिन्हें काफी कठिन लगती है, उन्हें यह ऑप्शन बेहतर लगता है।

वहीं कुछ लोग शादी के बंधन में नहीं बंधना चाहते लेकिन माता या पिता होने का सुख पाना चाहते हैं ऐसे में वह सिंगल मदर या फादर बन बच्चे को गोद ले सकते हैं।

बच्चे के कानूनी हक

  • जब किसी बच्चे को किसी और को गोद दिया जाता है तो बच्चे के नाम पर जो भी प्रॉपर्टी है, वह भी उसके साथ चली जाती है।
  • बच्चे के नाम कोई प्रॉपर्टी न हो और उसे गोद दिया जाए, तो गोद देने वाले के यहां से उसके सभी कानूनी हक खत्म हो जाते हैं और जिसने उसे गोद लिया है, वहां उसे तमाम कानूनी हक मिल जाते है।


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