मालेगांव ब्लास्ट : नौ वर्ष बाद जेल से बाहर आए कर्नल पुरोहित, सेना की गाड़ी में बैठकर हुए रवाना

मालेगांव ब्लास्ट : नौ वर्ष बाद जेल से बाहर आए कर्नल पुरोहित, सेना की गाड़ी में बैठकर हुए रवानाजेल से रिहाई के बाद सेना की गाड़ी से जाते लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित

नई दिल्ली। मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित नवी मुंबई की तालोजा जेल से रिहा हो गए हैं। कर्नल पुरोहित नौ साल से जेल में बंद थे, उनको लेने के लिए सेना के कई अधिकारी जेल में पहुंचे थे। कर्नल पुरोहित रिहाई के बाद सीधे कोलाबा में मिलिट्री इंटेलिजेंस की अपनी यूनिट में जाएंगे। वहां से सेशंस कोर्ट और फिर पुणे स्थित अपने घर। सोमवार को ही उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी, लेकिन कुछ कागजी कार्यवाही की वजह से मंगलवार को रिहाई नहीं हो सकी।

सेना की वर्दी मेरी त्वचा की परत है

इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के एक दिन बाद लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित ने कहा कि वह जल्द से जल्द सेना में फिर से शामिल होना चाहते हैं। पुरोहित ने सत्र न्यायालय के बाहर मीडिया से कहा था कि मैं अपनी वर्दी पहनना चाहता हूं। यह मेरी त्वचा की ऊपरी परत है। पुरोहित की जमानत की औपचारिकताएं अभी पूरी होना बाकी हैं। आरोप तय करने को लेकर एक सुनवाई के लिए उन्हें अदालत लाया गया। उन्होंने कहा, मेरे दो परिवार हैं- सेना और मेरा परिवार जिसमें मेरी पत्नी, मेरे दो बेटे, बहन और मां हैं। मैं उनसे मिलने के लिए बेताब हूं।

सेना ने कम नहीं होने दी इज्जत

पुरोहित ने कहा कि सेना ने मेरी इज्जत कम नहीं होने दी। उन्होंने कहा, सेना की यह परम्परा और प्रकृति रही है कि वह अपने लोगों की इज्जत कम नहीं होने देती। मैंने यह एक बार भी महसूस नहीं किया कि मैं सेना से बाहर हो जाऊंगा। उन्होंने अपनी कानूनी लड़ाई में मदद के लिए अपनी पत्नी की प्रशंसा की।

तकदीर के अलावा किसी का दोष नहीं

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह (विस्फोटक) आरडीएक्स लगाए जाने का आरोप उन पर लगाने के लिए महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे, पुरोहित ने कहा वह एक संस्थान का हिस्सा है और यदि ये दावे सच्चे होंगे तो उनके वरिष्ठ (सेना में) मामले से निपटेंगे। जब उनसे पूछा गया कि वह अपनी परेशानी के लिए किसे दोषी ठहराएंगे तो अधिकारी ने कहा अपनी तकदीर के अलावा वह किसी को दोष नहीं दे सकते।

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