24 घंटे से भूखे मजदूर ने कहा- "हम लॉकडाउन का सम्मान करते हैं, बस खाने का इंतजाम करा दीजिए"

“हम लॉकडाउन का सम्मान करते हैं, हम जानते हैं ये वतन बचाने का वक्त है, घर बचाने की बात छोड़ों, लेकिन हम जैसे मजदूरों के लिए रोटी का इंतजाम करा दीजिए, जिनके पास न काम है, न पैसे, न खाना..”

Arvind ShuklaArvind Shukla   24 March 2020 2:08 PM GMT

ये वीडियो एक दिहाड़ी मजदूर का है, जो कमाने के लिए अपने घर से हजारों किलोमीटर दूर हरियाणा के अंबाला आया था, यहां कोरोना के चलते लॉकडाउन हो गया। मजदूर के पास खाने के पैसे नहीं थे, और उसका ठेकेदार पैसे देने नहीं आया।

"मेरा नाम रवीश कुमार शर्मा है, जो उत्तर प्रदेश के फरीदाबाद (फैजाबाद में कोई गांव) का रहने वाला हूं। मैं अपने इलाके को विधायक जी को इतना ही बोलना चाहता हूं कि कल मैं 24 घंटे से भूखा था, तो मैं तीन जगह रोटी मांगने गया तो किसी ने रोटी नहीं दी।

एक बाबू जी के पास खड़ा था, उनसे बोला कि मुझे भूख की वजह से चक्कर आ रहे हैं मुझे रोटी खिला दो,

मैं माननीय विधायक जी और मुख्यमंत्री (मनोहर लाल खट्टर) जी से अनुरोध करता हूं कि हमा लोगों के लिए रोटी का इंतजाम करवा दो। सुबह हम लोग चौक पर गए (अंबाला, सब्जी मंडी के सामने) लेकिन पीसीआर (पुलिसकर्मी) ने सबको डंडे मारकर भगाए, मेरे पास 30 रुपए थे उसके मैंने पराठे खा लिए थे,

अभी मैं जो रोटी खा रहा हूं, वो एक बाबू (जिन्होंने मजदूर को खाना खिलाया) है तो सबको रोटी खिला रहा है, लेकिन बार बार उनके पास जाना भी गलत है। मैं विधायक और मुख्यमंत्री जी से अनुरोध करता हूं कि रोटी की तो व्यवस्था कर दो (रोते हुए), गाड़ी तो सुबह नगर पालिका की आनी चाहिए।

हम लोग क्या खाए, कल भूखा था, आज ठीक है, सुबह बाबू जी ने 50 रुपए दिए थे, जिसके सुबह ठेले पर पराठे खाए, लेकिन सुबह उसको भी भगा दिया, सुबह तो मैंने खा लिया, लेकिन रात में कैसे खाता।

हम आपके लॉकडाउन कर्फ्यू का सम्मान करते हैं। आदर पूर्वक, हम भी जानते हैं कि ये वतन बचाने का वक्त है, घर की बात तो छोड़ों लेकिन, हम लोगों के लिए रोटी की व्यवस्था करवा दो, आज सुबह तीन पराठे खाए थे, दोपहर में कुछ नहीं खाया। इससे बड़ी कोई बात नहीं हो सकती।

सिर्फ मैं ही नहीं, मेरे रूप में चलिए जहां 26 और हमारे साथी किराएदार हैं जो सुबह के चावल शाम को, शाम के चावल सुबह को खा रहे हैं।

हमारे लिए रोटी की व्यवस्था करवा दो.. जहां जाओ, लोग दुत्तार रहे हैं।

मैं माननीय प्रधानमंत्री जी से निवेदन करता हूं कि वो सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आदेश दें कि वो मजदूरों के लिए रोटी का इंतजाम नगर पालिका वाले करें... मजदूर की अपील यहां सुनिए


खाना खिलाने वाले ने कहा- "वो खुद्दार आदमी लगता है मांग कर नहीं खाना चाहता है.. लेकिन"

लॉक डाउन में फंसे इस मजदूर का वीडियो अंबाला में रहने वाले वाले रवींद्र मोहन ने बनाया है। रवींद्र गांव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, 22 तारीख को मैं घर पर था, तो किसी ने बाहर से आवाज दी,बाहर निकला तो सामने खड़े शख्स ने कहा कि वो मजदूर है बहुत भूखा है, 24 घंटे से कुछ नहीं खाया। मैंने उसे वहीं रोका और घर के अंदर गया सब्जी पराठे बनाकर लाया और उसे खिलाया।"

रवींद्र मोहन आगे बताते हैं, "मैंने उससे कहा कि वो जब तक बंदी है वो रोज यहां आया करना, लेकिन वो खुददार (स्वाभिमानी) है, कहा कि रोज-रोज आना अच्छी बात नहीं, मैंने कहा नहीं तुम बिना किसी टेंशन के आ जाना। मैंने उसे 50 रुपए भी दिए। दूसरे दिन जब वो शाम को खाने आया तो मैंने ये वीडियो बनाया क्योंकि उसने बताया था कि उसके किराए वाले घर में ऐसे 26 लोग और हैं जो मजदूर हैं और इन दिनों खाने का उनके पास बहुत कम या कुछ नहीं।"

रवीश के मुताबिक वो उनके साथी जिसमे कई यूपी और बिहार से हैं यहां पर घर बनाने वाले राजगीर मिस्त्री के साथ लेबर के रूप में काम करते हैं। वो ठेकेदार के जरिए काम पर जाते हैं लेकिन जरुरत के मुताबिक वो ठेकेदार से पैसे लेते हैं और घर लौटने के वक्त पूरा हिसाब करते हैं। लेकिन लॉकडाउन के बाद वो ठेकेदार नहीं आया।

रविद्र मोहन कहते हैं, पैसे होते भी तो मुश्किल है क्योंकि इनमें से ज्यादातर सुबह शाम ठेलों पर खाने खाते थे, अब तो यहां 24 तारीख स कर्फ्यू लगनी का बात है।

रविंद्र मोहन आखिर में कहते हैं, मैं ये नहीं करता है कि लोग अपने आसपास ऐसे किसी आदमी को देखकर खाना नहीं खिलाएंगे,. लेकिन लोग कोरोना के डर से आने नहीं आ रहे। लोग डरे हुए हैं। लेकिन हमें इतना भी नहीं डरना है, निश्चित दूरी बनाकर हमें संकट के वक्त गरीब लोगों की मदद करनी ही होगी।"

"जब-जब देश पर संकट आता है, लोग एक दूसरे की मदद करते हैं"

रविंद्र के बनाए इस वीडियो को चंडीगढ़ में रहने वाले कमलजीत ने अपने फेसबुक पोस्ट करते हुए लिखा,

"जब-जब देश पर संकट आता है तो देशवासी ही आगे होकर एक दूसरे की मदद करते हैं। हर एक सक्षम व्यक्ति जिसके घर में भोजन है वो अपने आस-पास नज़र दौड़ाए और केंद्र और राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करे और अपने देश को बचाएं।

ध्यान रखें अनुशासन बिल्कुल न टूटे और सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का 100% पालन हो।"

कोरोना वायरस को लेकर गांव कनेक्शटन की अपील

कोरोना की अभी दवा नहीं बनी है। ऐसे में बचाव ही इसका इलाज है। कोरोना के वायरस से संक्रमित होने से बचने के लिए भीड़-भाड़ वाले इलाके में न जाएं। साथ ही सरकार द्वारा जारी किए गए लॉकडाउन का पालन करें। वक्ते-वक्ता पर हाथ धोते रहें। सर्दी, जुखाम और बुखार होने की स्ि ल ति में डॉक्टेर से सलाह लें। कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं, सजग रहकर संक्रमण से बचने की जरूरत है।

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