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कोरोना संकट में राजस्थान और मध्य प्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश तक पहुंची टिड्डियां, बर्बाद कर देंगी फसलें

Divendra SinghDivendra Singh   23 May 2020 4:37 AM GMT

कोरोना संकट में राजस्थान और मध्य प्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश तक पहुंची टिड्डियां, बर्बाद कर देंगी फसलें

कोरोना संकट में किसानों की मुसीबत कम नहीं हो रही हैं। राजस्थान के कई जिलों में फसलों को बर्बाद करने बाद मध्य प्रदेश के रास्ते टिड्डियां उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड तक पहुंच गई हैं।

पिछले कुछ ही दिनों में राजस्थान के 17 जिलों में टिड्डियां फैल चुकी हैं। विशेषज्ञों की माने तो अभी टिड्डिया और ज्यादा संख्या में भारत आएंगी और बड़ा नुकसान कर सकती हैं। राजस्थान में 11 अप्रैल से अब 38 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल को टिड्डियों ने प्रभावित किया है।

हवा के रुख के साथ राजस्थान से होते हुए फिर मध्य प्रदेश और अब उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड के कई जिलों तक टिड्डियां पहुंच गईं हैं।

टिड्डी नियंत्रण संगठन (एलडब्ल्यूओ) के उपनिदेशक डॉ. केएल गुर्जर बताते हैं, "राजस्थान के रास्ते टिड्डियां भारत में आयीं हैं, जो तेज हवाओं के साथ मध्य प्रदेश के मंदसौर, नीमच, उज्जैन तक पहुंच गईं हैं, अनुमान है कि हवाओं के साथ ही ये उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक पहुंच रही हैं। हमारी ऑर्गनाइजेशन लगातार टिड्डियों पर नजर रखे रहती है, अब तक 29,814 हेक्टेयर भूमि पर हम केमिकल स्प्रे कर चुके हैं। इस बार अभी तक टिड्डियों के आठ स्वार्म (एक टिड्डी स्वार्म में लाखों की संख्या में टिड्डी होते हैं) आ चुके हैं।"

मध्य प्रदेश में टिड्डियों के झुंड पर किया गया कीटनाशकों का छिड़काव

गुर्जर आगे बताते हैं, "जलवायु स्थितियों के चलते इस बार समय से पहले ही ईरान और बलूचिस्तान में इमेच्योर टिड्डी भारत की तरफ माइग्रेट कर चुकी है। इसीलिए इतनी संख्या में टिड्डी आए हैं। हमें आंकड़े बता रहे हैं कि ईरान और पाकिस्तान में संख्या घट रही है। एक महीने तो ये रहेगा, उसके बाद संख्या में गिरावट होगी। फिलहाल राजस्थान में जो टिड्डी आ रही हैं वे पिंक (टिड्डियों के बच्चे) हैं। अगले 10 दिन में ये पीले यानी वयस्क होंगे। इसीलिए प्रजनन के लिए शायद ये वापस रेगिस्तानी इलाकों की तरफ वापस आएंगी।"

संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन ने भी आशंका जताई है कि इस बार टिड्डियों का हमला बीते हमले से तीन गुना ज्यादा हो सकता है। इससे पहले मई 2019 से फरवरी 2020 तक 12 जिलों में टिड्डियों का हमला हुआ था। सबसे ज्यादा प्रभावित सात जिलों में करीब 2.25 लाख हेक्टेयर पर एक हजार करोड़ रुपए की फसल का नुकसान किया। इस समय खेत में मूंग, उड़द, सब्जियों और चारा की फसलें हैं, जिसे टिड्डियां सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं।


कृषि विभाग, मध्य प्रदेश के उप निदेशक अवनीश चतुर्वेदी कहते हैं, "मध्य प्रदेश में अभी तक उज्जैन, मुरैना, नीमच, रतलाम, खरगौन, श्योपुर जिलों में टिड्डियों का दल देख गया है। टिड्डियों का झुंड एक-दो किमी से लेकर 10-12 किमी तक लंबा हो सकता है। दिन के उजाले में ये एक दिन में 100-150 किमी तक का सफर कर सकते हैं। जहां पहुंचते हैं फसलों को पूरी तरह से बर्बाद कर देते हैं।"

टिड्डी जब अकेली होती है तो उतनी खतरनाक नहीं होती है, लेकिन झुंड में रहने पर बहुत खतरनाक और आक्रामक हो जाती है। फसलों का एक बार में सफाया कर देती है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है कि आपकी फसल पर किसी ने बड़ी सी चादर बिछा दी हो। टिड्डियां फसलों के फूल, फल, पत्ते, तने, बीज और पेड़ की छाल सब कुछ खा जाती हैं।

वो आगे कहते हैं, "ट्रैक्टर चालित स्प्रे पंप और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों से कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है। टिड्डी दल के नियंत्रण के लिए सभी जिलों में जिला स्तर पर निगरानी दल गठित करने के निर्देश जारी किए गए हैं, साथ ही अनुभाग स्तर पर निगरानी गठित करते हुए टिड्डी के लिए समस्त आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था के लिए निर्देश दिए गए हैं।"

पिछली बार 1993 के बाद सबसे बड़ा टिड्डी हमला था

भारत सरकार के टिड्डी नियंत्रण एवं अनुसंधान विभाग के अनुसार, टिड्डियों का अब तक का सबसे बड़ा हमला 1993 में हुआ था। इस साल करीब 172 बार टिड्डियों के झुंडों ने फसलों और वनस्पति को नुकसान पहुंचाया। विभाग ने 1993 में करीब 3.10 लाख हेक्टेयर भूमि का उपचारित किया था। इससे पहले 1964 से लेकर 1989 तक अलग-अलग साल में 270 बार टिड्डी दलों ने भारत का रुख किया था। इसमें 1968 में 167 बार टिड्डी दल राजस्थान और गुजरात में आए थे। मई 2019 से फरवरी 2020 तक दो हजार से ज्यादा टिड्डी स्वार्म भारत में घुसे थे। 11 अप्रैल से अब तक 8 स्वार्म आ चुके हैं। हालांकि इस बार अब तक टिड्डियों को आना जारी है इसीलिए स्वार्म की संख्या कितनी पहुंचेगी इसकी कोई सही आंकलन नहीं किया गया है।


भुखमरी की कगार तक पहुंचा सकती हैं टिड्डियां

टिड्डी हमेशा से इंसानों के लिए अभिशाप की तरह ही रही हैं। लाखों की संख्या में एक दल में रहने के कारण इनके खाने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है। कई हेक्टेयर फसलों को टिड्डी दल एक दिन में ही खत्म कर देते हैं। औसतन टिड्डियों का एक छोटा झुंड एक दिन में दस हाथियों, 25 ऊंट या 2500 व्यक्तियों के बराबर खा सकता है। टिड्डी पत्ते, फूल, बीज, तने और उगते हुए पौधों को खाती है। टिड्डियों का प्रकोप कई साल तक भी रहता है। ज्यादा मात्रा में खाने के कारण टिड्डी पूरे फसल चक्र को ही बर्बाद कर देते हैं। जिसके कारण उत्पादन कम होता है और भुखमरी तक की स्थिति आ जाती है।

शोर मचाकर या तेज ध्वनि यंत्रों से भगा सकते हैं

टिड्डी दल का प्रकोप होने पर तत्काल स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग से संपर्क कर जानकारी दी जाए। किसान टोली बनाकर विभिन्न तरह के पारंपरिक उपाय जैसे शोर मचाकर, अधिक ध्वनि वाले यंत्रों को बजाकर या पौधों की डालों से अपने खेत से टिड्डी दलों को भगा सकते हैं।

स्प्रे कर टिड्डी दल को भगाया जा सकता है

यदि किसी क्षेत्र में शाम को टिड्डी दल का प्रकोप हो गया हो, तो सुबह तीन से सुबह नौ बजे तक कीटनाशी दवाओं का उचित अनुपात में पानी मिलाकर छिड़काव किया जाए। टिड्डी दल के आक्रमण के समय यदि कीटनाशी दवा उपलब्ध नहीं हो तो, ट्रैक्टर चलित पॉवर-स्प्रे द्वारा तेज बौछार से भी दल को भगाया जा सकता है।

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