किसान लॉन्ग मार्च: महाराष्ट्र सरकार ने मांगें मानी, हर दो महीने में होगा रिव्यू

महाराष्ट्र राज्य में नासिक से मुंबई शहर तक किसानों की रैली निकालने की योजना मांगे मानने पर खत्म हुई। सात दिनों में होने वाली ये रैली 21 से 27 फरवरी तक चलने वाली थी। सरकार ने किसानों की सभी मांगें मान ली हैं।

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किसान लॉन्ग मार्च: महाराष्ट्र सरकार ने मांगें मानी, हर दो महीने में होगा रिव्यू

लखनऊ। महाराष्ट्र में 50 हजार से ज़्यादा किसान राज्य और केन्द्र सरकार के खिलाफ एक हफ्ते का लॉन्ग मार्च निकाल रहे थे। किसानों की रैली 21 फरवरी को नासिक से शुरू होकर 27 फरवरी को मुंबई में खत्म होने की योजना थी। सरकार ने किसानों की लगभग सभी मांगें लिखित रूप में मान ली हैं साथ ही कहा है कि इसके विनियमन (रेगुलेशन) के लिए हर दो महीने में एक रिव्यू मीटिंग भी की जाएगी।

किसान रैली और उनकी मांगों को जानने के लिए गाँव कनेक्शन ने बात की अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष और सीपाआई(एम) की केन्द्रीय कमेटी के सदस्य अशोक धावले से। उन्होंने फोन पर बात करते हुए बताया, "किसानों की सभी मांगें मान ली गई हैं। उन्हें लिखित पुष्टीकरण मिल गया है। पिछले साल हुए लॉन्ग मार्च को मिले समर्थन के बाद सरकार ने इस साल पहले दो दिनों में ही उनकी बातें मान लीं।"

किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धावले से गाँव कनेक्शन की बातचीत को आप यहां सुन सकते हैं-


वो बताते हैं, "महाराष्ट्र में सूखा प्रभावित क्षेत्रों, मराठवाड़ा इलाके में पानी पहुंचाने के लिए पश्चिम की तरफ बहने वाली नदियों में रिवर लिंकिंग स्कीम पर काम किया जाएगा। पीने का पानी सभी तक पहुंचाने की सुविधा की जाएगी। मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना) के तहत काम करने वाले लोगों का ध्यान, फसल बीमा के तहत राहत दी जाएगी, आदिवासियों को वन ज़मीन अगले तीन महीने में पट्टे पर दी जाएगी, निराधार और बुज़ुर्ग लोगों की पेंशन 600 रुपए प्रति महीने से बढ़ाई जाएगी।"

इन सबमें जो सबसे महत्वपूर्ण बात किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बतायी वो यह कि किसानों की सभी मांगें लागू होती हैं या नहीं इस पर नज़र रखने के लिए हर दो महीने में एक रिव्यू किया जाएगा। वो कहते हैं-

"पिछले साल लॉन्ग मार्च में मानी गईं मांगों पर केवल 10 प्रतिशत काम हो पाया क्योंकि साल भर में एक भी रिव्यू मीटिंग नहीं हुई इसलिए ये ज़रूरी है कि रिव्यू हो। रिव्यू के लिए सरकार की तरफ से मंत्री, अधिकारी और किसान सभा के नेताओं के बीच एक मीटिंग होगी और जो कुछ खामियां हैं उन्हें दूर किया जाएगा।"

"हम लोगों से मुख्यमंत्री जी भी मिले और दो मंत्री गिरीश महाजन और जयकुमार रावल से कल आखिरी मुलाकात हुई जिसमें उन्होंने हमारी मांगें लिखित रूप में मान ली हैं,"- वो आगे बताते हैं।

अशोक धावले ने अखिल भारतीय किसान सभा के फेसबुक पेज के ज़रिए किसानों की बात सामने रखी-

नासिक प्रशासन ने इस लॉन्ग मार्च के लिए इजाजत नहीं दी थी लेकिन किसान मार्च के लिए अड़े रहे, इसके लिए वह नासिक स्थित उस नाके पर पहुंच गए थे, जहां से मुंबई का रास्ता निकलता है। किसान यह मार्च सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ और अपनी मांगों को मनवाने के लिए कर रहे थे। इससे पहले पिछले साल फरवरी महीने में ही किसानों और मजदूरों ने नासिक से मुंबई तक रैली निकाली थी।

    

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