दो कदम पीछे हटे और मिलाया हाथ

मायावती ने गेस्ट हाउस कांड भुलाया, तो अखिलेश ने कहा मायावती जी का सम्मान मेरा सम्मान

दो कदम पीछे हटे और मिलाया हाथ

लखनऊ। इतिहास खुद को दोहराता है, ऐसी ही एक घटना की गवाह बनी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ। साल 1993 बाबरी विध्वंश की बयार में भाजपा का विजय रथ रोकने के लिए सपा मुखिया मुलायम सिंह और बसपा के संस्थापक कांशीराम ने गठबंधन करके साथ-साथ चुनाव लड़ा और सरकार बनाई।

वहीं, रिश्तों में आई दरार और लखनऊ के गेस्ट हाउस कांड की कड़वी यादों को भूलते हुए 23 साल बाद दोनों पार्टियां फिर से बीजेपी का रथ रोकने के लिए साथ आई हैं। इस बार इस गठबंधन की गांठ कांशीराम की उत्तराधिकारी मायावती और मुलायम सिंह के पुत्र अखिलेश यादव ने किया।

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दो अलग तारीखों पर हुए दोनों गठबंधन के केन्द्र में एक ही पार्टी भाजपा रही। जिसे हराने के लिए सपा और बसपा ने अपनी कड़वी यादों को भुलाते हुए एक दूसरे का दामन साधा।

बसपा सुप्रीमो मायावती शनिवार को गठबंधन के बारे में बताते हुए कहा, "ये गठबंधन नरेंद्र मोदी और अमित शाह की नींद उड़ाने वाला है। कांग्रेस के शासन में ही भ्रष्टाचार और गरीबी बढ़ी, बीजेपी-कांग्रेस की कार्यशैली करीब-करीब एक जैसी हैं।"

लोकसभा चुनावों को देखते हुए सपा-बसपा गठबंधन की सीट बंटवारे का फार्मूले के तहत 38-38 सीटों पर सपा और बसपा लड़ेंगी और रायबरेली और अमेठी सीट पर पार्टी उम्मीदवार नहीं खड़े करेगी। बाकी की दो सीटें अन्य के लिए छोड़ी गई हैं।

वहीं, गठबंधन को मजबूती देते हुए मायावती ने कहा, "गेस्ट हाउस कांड को भूलकर देशहित में एक साथ आए हैं। यह गठबंधन स्थायी है और आगे भी चलेगा।"


पिछले लोकसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी को 2.3 करोड़ वोट मिले थे, और उसके प्रत्याशी 34 सीटों पर दूसरे नंबर पर आए थे। पर एक भी सीट नहीं जीत पाए थे। जबकि समाजवादी पार्टी को 3.4 प्रतिशत वोट मिले थे और उसने पांच सीटें जीती थीं।

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इस बार के लोकसभा चुनावों में दोनों खेमों का वोट एकजुट होने पर सीटों की गिनती की तस्वीर बदल सकती है।

दोनों पार्टियों की संयुक्त प्रेस कांफ्रेस में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, "आज के बाद मायावती जी का सम्मान मेरा सम्मान है। भाजपा के लोग हमारे कार्यकर्ताओं के बीज नफरत का बीज बो सकते हैं," आगे कहा, "समय के साथ सपा और बसपा का गठबंधन और मजबूत होगा।"


वर्ष 2017 के यूपी विधानसभा चुनावों में भाजपा को प्रदेश में 39.7 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि सपा को 21.8 और बसपा को 22.2 प्रतिशत वोट मिले। अगर सपा और बसपा का वोट शेयर जोड़ दिया जाए तो यह भाजपा से ज्यादा होता है।

गठबंधन की गांठ को और मजबूती देते हुए मायावती ने कहा, "यह गठबंधन आगे चलेगा, और अगले विधानसभा चुनाव भी हम साथ-साथ लड़ेंगे," आगे कहा, "हमारी पार्टी आगे कभी भी कांग्रेस जैसी अन्य पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ेगी, जिससे पार्टी को लाभ न मिले। मतलब वोट ट्रांसफर न हो।"

यह पूछने पर कि प्रधानमंत्री पद के लिए किसे समर्थन करेंगे तो अखिलेश यादव ने कहा, "हमें खुशी होगी कि उत्तर प्रदेश ही प्रधानमंत्री बने।"

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