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मध्य प्रदेश: हाईस्कूल में 4 विषयों की परीक्षा नहीं ली, बेस्ट ऑफ थ्री, फोर था फिर भी डेढ़ फीसदी ही ज्यादा बच्चे पास हुए

Sachin Tulsa tripathiSachin Tulsa tripathi   8 July 2020 6:44 AM GMT

मध्य प्रदेश: हाईस्कूल में 4 विषयों की परीक्षा नहीं ली, बेस्ट ऑफ थ्री, फोर था फिर भी डेढ़ फीसदी ही ज्यादा बच्चे पास हुएसतना। 17 साल बाद शासकीय उत्कृष्ठ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय वेंकट वन का कक्षा दसवीं का छात्र स्टेट मेरिट में स्थान बनाने में सफल रहा। यह विद्यालय 2003 में उत्कृष्ठ बनाया गया था। दाखिले के लिए व्यापंम प्रवेश परीक्षा भी लेता है। इससे पहले 2018 में बारहवीं का छात्र स्टेट मेरिट में आया था।

  • 2019 में 61.32 प्रतिशत मौजूदा वर्ष में 62.84 प्रतिशत रहा
  • 222,944 फेल हो गए, 108,448 पूरक भी आए

मध्य प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा मंडल ने कक्षा दसवीं का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया है। परिणामों की घोषणा के पहले तीन फार्मूले लगाए। पहला बेस्ट ऑफ थ्री और फोर, दूसरा कोरोना संक्रमण और तीसरा 20 अंक के एक्सटर्नल मार्क। इन तीन फार्मूलों के बाद भी घोषित परिणामों में बीते वर्ष की अपेक्षा इस साल मात्र 1.52 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2020 का परीक्षा परिणाम 62।84 प्रतिशत रहा जबकि वर्ष 2019 में यह 61.32 फीसदी था।

यह हाल तब गई जब कोरोना संक्रमण के कारण चार विषयों की परीक्षा नहीं ली गई। इसके अलावा बेस्ट आफ थ्री और फोर का फार्मूला भी लगाया गया। इस फार्मूले के तहत उन्ही तीन और चार विषयों को परिणाम में जोड़ा गया जिनमें छात्र छात्रा उत्तीर्ण रहे। यही नहीं 2 लाख 22 हजार 9 सौ 44 छात्र फेल भी हो गए और 1 लाख 8 हजार 4 सौ 48 छात्रों के पूरक आ गए।

इस साल माध्यमिक शिक्षा मंडल की हाईस्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा में 8 लाख 99 हजार 3 सौ 36 परी​क्षार्थियों ने नियमित परीक्षा दी। जिसमें से 8 लाख 91 हजार 8 सौ 66 के ही परिणाम घोषित किए गए। 1 हजार 4 सौ 44 पर रोक लगा दी गई तथा 26 की परीक्षा रद्द कर दी गयी, 9 लाख 1 हजार 4 सौ 27 छात्र पंजीकृत थे। इनमें से 8 हजार 91 परीक्षा में अनुपस्थित नहीं हो सके। परीक्षा का कार्यक्रम इस साल 1 मार्च से 19 मार्च तक ही चला इसके बाद 20 मार्च से लॉकडाउन घोषित कर दिया गया यही कारण था कि हिन्दी स्पेशल, अंग्रेजी स्पेशल, उर्दू स्पेशल तथा हिन्दी जनरल की परीक्षाएं नहीं हो सकीं। यहां बीते वर्ष से बेस्ट आफ फाइव लागू है चूंकि इस साल चार पेपर नहीं हुए तो हिन्दी मीडियम में बेस्ट आफ थ्री और इंग्लिश मीडियम में बेस्ट आफ फोर लगाया गया।

छात्र और छात्राओं की बात करें तो 60.09 प्रतिशत छात्र तथा 65.87 प्रतिशत छात्राएं पास हुईं। छात्राओं की अपेक्षा 43 हजार 240 ज्यादा छात्रों ने परीक्षा दी थी। कुल 4 लाख 68 हजार 288 छात्र और 4 लाख 25 हजार 48 छात्राएं परीक्षा में सम्मिलित हुईं। वर्ष 2019 और मौजूदा वर्ष के परिणामों पर नजर डालें तो छात्रों का 0.94 और छात्राओं का 2.18 फीसदी परिणाम बढ़ा। 2019 में छात्रों का परिणाम 59.15, वर्ष 2020 में 60.09 तथा छात्राओं का क्रमश 63.69 और 65.87 प्रतिशत रहा।

फेल और पूरक में छात्रों की संख्या ज्यादा

माध्यमिक शिक्षा मंडल की हाईस्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा में तीन-तीन फार्मूलों के बाद भी 2 लाख 22 हजार 9 सौ 44 छात्र फेल हो गए इसमें छात्रों की संख्या छात्राओं की अपेक्षा ज्यादा है। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) के आंकड़ों की मानें तो 1 लाख 29 हजार 1 सौ 97 छात्र और 93 हजार 7 सौ 47 छात्राएं फेल हुई हैं, जो कि छात्रों की अपेक्षा 35 हजार 4 सौ 50 कम है। इसी तरह पूरक का आंकड़ा 1 लाख 8 हजार 4 सौ 48 पहुंच गया जिसमें 57 हजार 3 सौ 54 छात्र और 51 हजार 94 छात्राएं शामिल हैं, हालांकि वर्ष 2019 और 2020 के फेल और पूरक छात्र- छात्राओं के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो 8 हजार 2 सौ 87 कम फेल हुए और 5 हजार 2 सौ 18 ज्यादा पूरक आए। वर्ष 2019 में 2 लाख 31 हजार 2 सौ 51 तथा वर्ष 2020 में 2 लाख 22 हजार 9 सौ 44 फेल हुए इसी तरह क्रमशः 1 लाख 3 हजार 2 सौ 30 और 1 लाख 8 हजार 4 सौ 48 पूरक रहे।

भिंड पूअर, बाकी जिले फिफ्टी क्रॉस

प्रदेश के 51 जिलों की ओवरआल बात करें तो इस साल 7 जिलों का प​रीक्षा परिणाम 70 प्लस, 28 का 60 प्लस, 15 का 50 प्लस और मात्र एक का 40 प्लस रहा। यह जिला भिंड है जिसका परीक्षा परिणाम 42.01 प्रतिशत रहा जो प्रदेश में पुअर कहा जा सकता है जबकि नीमच 79.13 प्रतिशत के साथ अव्वल रहा। इस क्रम में देवास 78 मंदसौर 75.53, शाजापुर 73.02, उज्जैन 71.16, दमोह 70.93, बालाघाट 70।85, खरगौन 69.51, नरसिंहपुर 68.72, इंदौर 68.32, डिंडौरी 67.91, आगर मालवा 67.75, हरदा 67.74, धार 67.21, उमरिया 66.47, छिंदवाड़ा 66.27, होशंगाबाद 65.35, विदिशा 65।31, रतलाम 65.26, राजगढ़ 65।15, बैतूल 65.12, गुना 65.07, रायसेन 65.02, बुरहानपुर 65.00, सागर 64.86, अनूपपुर 64.66, सिहोर 64.65, खंडवा 64।39, भोपाल 64.05, बड़वानी 63.23, सीधी 61.84, सिंगरौली 61.52, जबलपुर 61.52, अशोकनगर 60.49, झाबुआ 60.40, ग्वालियर 59.98, श्योपुर 59.57, सतना 59.53, पन्ना 59.16, मुरैना 57.80, शिवपुरी 57.60,शहडोल 56.96, अलीराजपुर 56.61, छतरपुर 56.45, सिवनी 56.20, टीकमगढ़ 55.81, कटनी 53.70, मंडला 51.66, रीवा 51.43, दतिया 50.87 प्रतिशत रहा।

माशिमं के आंकड़ों की मानें तो इस साल सरकारी स्कूल के परीक्षार्थियों ने बाजी मार ली है जबकि निजी विद्यालयों के पीछे रह गए। सरकारी स्कूलों के उत्तीर्ण छात्रों का प्रतिशत 63.64 और निजी का 61.65 रहा। यही परिणाम वर्ष 2019 में क्रमशः 62.05 और 60.70 प्रतिशत था। इस मामले में नीमच ने ही बाजी मारी। जिले की सरकारी स्कूल का परिणाम 82.82 और निजी का 72.93 प्रतिशत रहा।

पिछले साल रीवा संभाग का रिजल्ट बेहद निराशाजनक था। यहां की एक सैकड़ा से भी अधिक विद्यालयों का रिजल्ट 30 प्रतिशत से भी कम आया था जिस पर कई कवायदें की गयीं। परिणाम यह हुआ कि इस साल 8.98 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। संयुक्त संचालक लोक शिक्षण कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में रीवा संभाग का परिणाम 49.52 और मौजूदा वर्ष में 58.50 प्रतिशत बढ़ा, हालांकि संभाग के जिलो की बात करें तो सबसे फिसड्डी रीवा जिला रहा।


बड़ी बात तो यह है कि इस जिले के सर्वाधिक 27 छात्र प्रदेश की मेरिट लिस्ट में शामिल हैं। अन्य जिलों में सतना का परिणाम का 13.93 (2019 में 45.60, वर्ष 2020 में 59.53), सीधी का 27.84 ( 2019 में 34.00 और 2020 में 61.84) और सिंगरौली का 21.62 ( 2019 में 39.90 और 2020 में 61.52) प्रतिशत बढ़ा। संयुक्त संचालक अंजनी कुमार त्रिपाठी ने बताया कि अन्य संभागों की तुलना में रीवा संभाग के परिणाम बढ़ा है। इसके लिए कमिश्नर डॉक्टर अशोक कुमार भार्गव के मार्गदर्शन में सेवन पॉइंट प्रोग्राम बनाये गए था।

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