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मध्य प्रदेश: पन्ना जिले में गरीबों की किस्मत चमका रहे हीरे, दो मजदूर भी बने लखपति

हीरों के लिए मध्य प्रदेश का पन्ना जिला पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है। एक बार फिर इस धरती से गरीबों की किस्मत चमक उठी है। दिवाली से पहले दो मजदूरों समेत चार लोगों को हीरे मिले हैं जिनकी कीमत लाखों में बताई जा रही है। फिलहाल प्रशासन ने इन हीरों की नीलामी के आदेश जारी कर दिए हैं।

Sachin Tulsa tripathiSachin Tulsa tripathi   20 Nov 2020 7:53 AM GMT

मध्य  प्रदेश: पन्ना जिले में गरीबों की किस्मत चमका रहे हीरे, दो मजदूर भी बने लखपतिमध्य प्रदेश के पन्ना जिले के संदीप साहू और लखन यादव समेत चार लोगों को मिले हीरे। फोटो : गाँव कनेक्शन

पन्ना (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश का पन्ना जिला हीरे (डायमंड) के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। इसी धरती ने कई गरीबों की किस्मत चमकाई है। इस बार भी हीरा मिलने से चार गरीबों की किस्मत चमक उठी है।

पन्ना जिले के बलबीर यादव, लखन यादव, दिलीप कुमार और संदीप साहू को यह हीरे मिले हैं। छोटे-बड़े आकार के मिले इन हीरों की कीमत लाखों रुपए बताई जा रही है।

खनिज विभाग की ओर से जल्द ही इन हीरों की नीलामी करायी जायेगी। फिलहाल इन हीरो के मिलने से ये गरीब परिवार के लोग काफी खुश हैं। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही उनके परिवार के लिए गरीबी के दिन मिट जायेंगे।

हीरा पाने वालों में बलवीर यादव मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में आने वाले गाँव बिलखुरा के निवासी हैं। बलबीर ने पन्ना तहसील में आने वाली कृष्णा कल्याणपुर पट्टी में सात सितम्बर 2020 को खदान का पट्टा प्राप्त किया था। बलवीर को 29 अक्टूबर 2020 को हीरा मिला था जिसे उन्होंने खनिज विभाग के हीरा कार्यालय में जमा करा दिया। बलबीर को मिला हीरा 7.02 कैरेट का है जिसकी अनुमानित कीमत 39 लाख रुपये है।

अपना हीरा दिखाते संदीप कुमार साहू। फोटो : गाँव कनेक्शन

बलबीर 'गाँव कनेक्शन' से बताते हैं, "मैं पहले ऑटो चलाता था, इसी से परिवार का दाना पानी चल रहा था, मगर लॉकडाउन ने तो जैसे किस्मत के पहिए ही जाम कर दिए। मजबूरी में किसानों के यहां थोड़ी बहुत खेती करने लगा।"

"जो रुपये मैंने बचाकर रखे थे तो सोचा क्यों न यहाँ हीरे की खदान के लिए कोशिश करूँ। तब मैंने सितम्बर माह में पट्टा लिया था। इसके बाद खुदाई शुरू कर दी और मां लक्ष्मी की ही कृपा थी कि दो महीने के अंदर ही हीरा मिल गया," बलवीर यादव बताते हैं।

बलवीर यह भी कहते हैं कि खुद की जमीन नहीं थी इसलिए दूसरों के खेत में मजदूरी करनी पड़ रही थी। मगर अब हीरा नीलामी के बाद जो पैसा मिलेगा उससे सबसे पहले जमीन ही खरीदूंगा।

पन्ना तहसील में आने वाले पहाड़ीखेरा इलाके में सर्वाधिक हीरा मिलता है। यहीं खदानें भी ज्यादा हैं।

रवि पटेल, खनिज अधिकारी, पन्ना जिला

पन्ना जिला मध्य प्रदेश के उत्तर-पूर्व में विंध्याचंल पर्वत के बीच में बसा हुआ। पन्ना जिला की सरकारी वेबसाइट के अनुसार पन्ना में मूल रूप से 13वीं शताब्दी तक की गोंड बस्ती थी। इसे महाराजा छत्रसाल बुंदेला ने राजधानी बनाया था। पन्ना उत्तर में उत्तर प्रदेश के बांदा जिला, पूर्व में सतना जिला, दक्षिण में कटनी और दमोह जिला और पश्चिम में छतरपुर जिले से घिरा हुआ है।

वर्तमान में यहां नौ तहसीलें हैं जिसमें अजयगढ़, अमानगंज, देवेन्द्रनगर, पन्ना, गुनौर, पवई, रैपुरा, शाहनगर और सिमरिया है। यहां वर्तमान में हीरा अधिकारी नहीं है इसलिए कामकाज खनिज अधिकारी को दिया गया है। यहाँ हीरों की खदान के बारे में खनिज अधिकारी रवि पटेल 'गांव कनेक्शन' से बताते हैं, "पन्ना तहसील में आने वाले पहाड़ीखेरा इलाके में सर्वाधिक हीरा मिलता है। यहीं खदानें भी ज्यादा हैं।"

दूसरी ओर पन्ना जिले के हीरा कार्यालय के मूल्यांकन अधिकारी अनुपम सिंह 'गांव कनेक्शन' से बताते हैं, "वर्ष 2020 के नौ महीनों में अब तक 72 छोटे-बड़े हीरे मिल चुके हैं। बलवीर के बाद दो नवम्बर को जरुआपुर निवासी दिलीप कुमार मिस्त्री को 7.44 कैरेट का हीरा मिला है। इसकी अनुमानित कीमत 35 लाख रुपये है। इसी दिन एनएमडीसी कॉलोनी निवासी लखन यादव को 14.18 कैरेट का हीरा मिला जिसकी अनुमानित कीमत एक करोड़ है। जबकि पांच नवम्बर को अजयगढ़ निवासी संदीप साहू को 6.92 कैरेट का हीरा मिला है जिसकी अनुमानित कीमत 25 लाख बताई गई है।"

हीरा पाने वाले दिलीप कुमार अपने पांच एकड़ जमीन पर खेती करते हैं और गाँव में कच्चे घर में अपने परिवार के साथ रहते हैं। हीरा मिलने से दिलीप और उनका परिवार भी काफी खुश है।

दिलीप कुमार 'गांव कनेक्शन' से बताते हैं, "पहले बड़े भाई भी थे, मगर उनकी अचानक मृत्यु हो गई, उनके दो बच्चे भी हैं। पूरे परिवार को खर्च मेरे ऊपर आ गया। मगर अब जब हीरा मिला है तो जो पैसा आएगा उससे घर-द्वार बनवाएंगे और कुछ बचत में रखेंगे ताकि भविष्य में काम आए।"

हीरा पाने में वालों में संदीप कुमार साहू भी हैं। संदीप की बाजार में एक छोटी से दुकान है जहाँ वो चावल बेचते हैं।

संदीप कुमार 'गांव कनेक्शन' से बताते हैं, "यह कोई पक्की दुकान नहीं है। हफ्ते में केवल दो दिन ही बाजार रहता है। इससे 400-500 रुपए कमाई हो जाती है। परिवार में छह भाई-बहन हैं हम लोग, जिस कारण परिवार चलाना मुश्किल हो रहा था। मगर अब जब हीरा बेचकर पैसे मिलेंगे तो सबसे पहले अपना घर पक्का करवाऊंगा, इसके बाद आगे के बारे में कुछ सोचेंगे।"

फिलहाल इन हीरों की नीलामी प्रक्रिया के लिए प्रशासन की ओर से लिखित आदेश जारी कर दिया गया है।

आगामी तीन दिसम्बर को हीरों को नीलामी के लिए रखा जाएगा। नीलामी में इस बार 183 नग हीरे रखे जाएंगे। इसमें 15 बड़े और 168 छोटे हीरे हैं। जिनका कुल वजन 251.83 कैरेट है और अनुमानित कीमत 2,04,92,928 रुपए है।

अनुपम सिंह, हीरा मूल्यांकन अधिकारी, पन्ना जिला


हीरा मूल्यांकन अधिकारी अनुपम सिंह 'गांव कनेक्शन' से बताते हैं, "आगामी तीन दिसम्बर को हीरों को नीलामी के लिए रखा जाएगा। नीलामी में इस बार 183 नग हीरे रखे जाएंगे। इसमें 15 बड़े और 168 छोटे हीरे हैं। जिनका कुल वजन 251.83 कैरेट है और अनुमानित कीमत 2,04,92,928 रुपए है।"

पन्ना जिले में कई लोग हीरे की खदान का पट्टा लेते आये हैं। मगर कम ही लोग हैं जिन्हें बाद में खुदाई में हीरे मिलते हैं। खदान के पट्टे के लिए प्रशासन की ओर समय-समय पर प्रक्रिया चलती रहती है।

खदान का पट्टे की प्रक्रिया के बारे में अनुपम सिंह बताते हैं, "हीरा की ऊपरी खदान का पट्टा लेने की प्रक्रिया सरल है। 200 रुपए का चालान, तीन फोटो और आधार कार्ड जमा कर निश्चित समय अवधि के लिए खदान का पट्टा प्राप्त किया जा सकता है। पट्टा 8 बाई 8 की नाप में ही मिलेगा और अगर किसी किसान की जमीन में लेना है तो 100 रुपए के स्टाम्प पेपर में किसान से सहमति और अनुबंध दोनों करना होगा, तब खनन का पट्टा मिलेगा।"

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