मध्यप्रदेश : और उग्र हुआ किसान आंदोलन, पढ़िए पूरा अपडेट

मध्यप्रदेश  :  और उग्र हुआ किसान आंदोलन, पढ़िए पूरा अपडेटमध्य प्रदेश के मंदसौर में हिंसक हुआ किसान आंदोलन, बस जलाए। 

मंदसौर/भोपाल (इनपुट, एजेंसी)। मध्य प्रदेश के मंदसौर में बुधवार को कर्फ्यू के बावजूद आंदोलनकारी किसान शांत होने का नाम नहीं ले रहे हैं। मंदसौर से भड़की आग ने और जिलों को भी अपने चपेट में ले लिया है।

मंदसौर शहर व पिपलिया मंडी में लागू कर्फ्यू बुधवार को भी जारी रहा। इसके बावजूद आंदोलनकारियों ने एक कारखाने और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया है। एक तरफ गोलीबारी में मारे गए लोगों के परिजनों और किसानों ने बरखेड़ा पंत पर चक्काजाम कर दिया। गोलीबारी में मारे गए छात्र अभिषेक पाटीदार के शव को सड़क पर रखकर किसान प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलनकारियों ने मृतक किसानों को शहीद का दर्जा देने की मांग की। चक्काजाम में शामिल दिनेश पाटीदार ने कहा, "पुलिस ने जानबूझकर गोली चलाई। किसान अपनी मांगों को लेकर सड़क पर थे और पुलिस ने बर्बर कार्रवाई की।"

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मध्य प्रदेश के मंदसौर में पुलिस के वाहन में भी लगा दी गई आग।

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बता दें कि राज्य में फसल के उचित दाम और कर्ज माफी को लेकर किसान एक जून से हड़ताल पर हैं। 10 जून तक चलने वाली हड़ताल के छठे दिन मंगलवार को किसान पिपलिया मंडी में सड़क पर उतरकर आए थे। इसी दौरान पुलिस से उनकी झड़प हो गई और पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने किसानों पर गोलीबारी शुरू कर दी। गोलीबारी में पांच किसानों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए।किसानों की मौत के बाद आंदोलन अधिक उग्र हो उठा। प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को 30 से ज्यादा वाहन फूंक डाले। प्रशासन ने हिंसा के मद्देनजर मंदसौर व पिपलिया मंडी में कर्फ्यू लगा दिया।

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मंदसौर (आईएएनएस)। मंदसौर में भीड़ में प्रदर्शनकारियों का समझाने पहुंचे जिलाधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह की पिटाई कर दी और पुलिस अधीक्षक ओपी त्रिपाठी के साथ भी बदसलूकी की। पुलिस की गोलीबारी में मंगलवार को पांच लोग मारे गए थे, जिनमें एक छात्र अभिषेक पाटीदार भी था। उसके शव के साथ ग्रामीण और किसान बरखेड़ा पंत गांव की सड़क पर चक्का जाम किए रहे।

भोपाल में सीएम शिवराज सिंह का पुतला जलाते किसान व दूसरे पार्टियों के सदस्य।

जिलाधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह व पुलिस अधीक्षक ओ. पी. त्रिपाठी मौके पर पहुंचे और चक्काजाम कर रहे लोगों को समझाने की कोशिश की, मगर भीड़ ने उन्हें घेर लिया। हालात बिगड़ते देख दोनों अफसरों ने वहां से निकलने की कोशिश की। वे भीड़ के बीच से भाग रहे थे तभी पीछे से लोगों ने जिलाधिकारी के सिर पर थप्पड़ जड़ दिए। वहीं पुलिस अधीक्षक से भी बदसलूकी की गई। दोनों अधिकारी किसी तरह सुरक्षित बच निकलने में सफल हुए।

मंदसौर में भीड़ ने जिलाधिकारी को पीटा

देवास (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मंदसौर सेहिंसा की आग राज्य के अन्य हिस्सों में फैलने लगी है। किसानों ने बुधवार को देवास में हाट पिपलिया थाने पर धावा बोल दिया और वहां खड़े जब्ती के वाहनों को आग लगा दी। आंदोलनकारियों ने भोपाल-इंदौर के बीच चलने वाली दो बसों सहित 10 से अधिक वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, किसान जुलूस के रूप में हाट पिपलिया थाने पहुंचे, जहां उन्होंने उपद्रव मचाया और परिसर में रखे जब्ती के वाहनों को आग के हवाले कर दिया।

इसके बाद आंदोलनकारी किसान नेवली फाटा की ओर बढ़े, जहां उन्होंने वाहनों में तोड़फोड़ की। पुलिस ने कहा कि इस दौरान किसानों ने वहां से गुजर रही दो यात्री बसों को रोककर उनमें आग लगा दी। लेकिन इस घटना में कोई यात्री हताहत नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त आंदोलनकारियों ने वहां से गुजर रहे 10 से अधिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया और पथराव भी किया।

दूध की आवश्यकता हड़ताल मुक्त, किसान खुद बेचेंगे सब्जियां

राज्य में जनजीवन अस्त-व्यस्त होने की दशा में आम किसान यूनियन और भारतीय किसान यूनियन समेत कई संगठनों ने बुधवार को बैठक की। आम किसान यूनियन के राम इनानिया बताते हैं, “लोगों को असुविधा के होने के चलते बैठक में यह फैसला लिया गया है कि दो दिन तक दूध की आवश्यकता को देखते हुए हड़ताल मुक्त कर दिया गया है। इसके अलावा सब्जी उत्पादक सीधे लोगों को सब्जी बेचेंगे, न कि मंडी में नीलाम करेंगे।“

दंगा-रोधी पुलिस बल के 1100 जवानों को मंदसौर भेजा गया

नई दिल्ली (भाषा)। केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के मंदसौर में शांति बहाल करने के लिए दंगा-रोधी पुलिस बल के 1100 जवानों को भेजा है। केंद्र सरकार ने हिंसा पर और हिंसा-प्रभावित क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाये गये कदमों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि द्रुत कार्य बल (आरएएफ) के करीब 600 जवान पहले ही स्थानीय प्रशासन की मदद के लिए मंदसौर पहुंच चुके हैं। राज्य सरकार के अनुरोध पर गृह मंत्रालय आरएएफ के 500 और जवानों को मंदसौर भेज रहा है।

किसान नेताओं का दावा, पांच नहीं, आठ लोग मारे गए

इंदौर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के किसान नेताओं ने दावा किया है कि मंदसौर में मंगलवार को किसानों द्वारा विरोध प्रदर्शन के बीच सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी में पांच नहीं, आठ किसानों की मौत हुई है और सरकार मौत का आंकड़ा छिपाने में लगी है। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने दमनात्मक कार्रवाई न रुकने पर जेल भरो आंदोलन और हर गाँव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्रतीकात्मक 'शवयात्रा' निकालने का ऐलान किया है।

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राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ, आम किसान यूनियन, भारतीय किसान यूनियन समेत अन्य संगठनों के नेताओं ने बुधवार को यहां संयुक्त पत्रकार वार्ता की। इस मौके पर राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ने मंदसौर की घटना के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, "वहां गोलीबारी में पांच नहीं, आठ किसानों की मौत हुई है। सरकार मौतों का आंकड़ा छिपाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है।"

आम किसान यूनियन के संस्थापक सदस्य केदार सिरोही ने कहा, "राज्य में सरकार किसानों को असामाजिक तत्व बताकर दोहरा प्रहार कर रही है। एक तरफ उन पर दमनात्मक कार्रवाई जारी है, वहीं किसानों को बदनाम भी कर रही है।" सिरोही ने कहा, "सरकार द्वारा किसानों पर जारी दमनात्मक कार्रवाई नहीं रुकी तो पूरे प्रदेश में जेल भरो आंदोलन चलाया जाएगा और राज्य के सभी 53 हजार गाँव में मुख्यमंत्री चौहान की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली जाएगी।" बता दें कि आंदोलनरत किसानों पर मंगलवार को मंदसौर में गोलीबारी

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