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मध्य प्रदेश: मिलर्स के हिसाब से धान की बोवनी तय करने वाला आदेश विभाग ने लिया वापस, अब सभी किस्म की होगी खरीद

मध्य प्रदेश सरकार ने मिलर्स की मर्जी से धान की बोवनी तय करने का आदेश वापस ले लिया है। अब किसान मर्जी से धान की किस्म लगा सकेंगे और सरकार MSP पर उनकी खरीद भी करेगी। गांव कनेक्शन ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।

Mithilesh DharMithilesh Dhar   15 Dec 2020 4:00 PM GMT

मध्य प्रदेश: मिलर्स के हिसाब से धान की बोवनी तय करने वाला आदेश विभाग ने लिया वापस, अब सभी किस्म की होगी खरीदमिलर्स की मांग को ध्यान में रखकर मध्य प्रदेश सरकार ने लिया था फैसला। (फोटो- गांव कनेक्शन)

मध्य प्रदेश सरकार ने धान बोवनी और खरीद नीति में बदलाव कर दिया है। पुराने आदेश में कि अब राइस मिलर्स की जांच में फेल होने वाली किस्म की धान प्रदेश सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर नहीं खरीदेगी को संशोधित कर दिया गया है। अब प्रदेश के किसान अपनी मर्जी से धान बो सकेंगे और सरकार सभी किस्मों की खरीद भी करेगी। गांव कनेक्शन ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद सरकार ने चार दिन के अंदर ही फैसला वापस ले लिया।

सोमवार 14 दिसंबर को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, मध्य प्रदेश ने नया आदेश जारी करते हुए कहा, "यदि टेस्ट मिलिंग में किसी किस्म के धान से मापदंड की पूर्ति नहीं हो पाती है तो ऐसी किस्म की धान को उपार्जन में लेने से किसी भी प्रकार की रोक या मनाही होगी परंतु किसानों को यह सलाह दी जायेगी कि वह अच्छी किस्म की धान लगाएं।"

पूरा मामला समझिए

लॉकडाउन के समय सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मध्य प्रदेश के कई जिलों में खराब क्वालिटी के चावल बांटने के मामले सामने आये थे। मामला केंद्र सरकार तक पहुंचा और राज्य सरकार से जवाब मांगा गया। सितंबर 2020 में पीडीएस के तहत बांटे गये खराब गुणवत्ता वाले चावल का मामला जब सामने आया था तब प्रदेश सरकार ने राज्य में स्टॉक में रखे गये चावलों की जांच कराई थी। तब रिपोर्ट में सामने आया था कि प्रदेश पीडीएस के तहत बांटने के लिए जो चावल रखा गया है उसमें से तो 16 फीसदी चावल इंसानों के खाने लायक ही नहीं है। 52 जिलों में रखे 2.747 लाख मीट्रिक टन चावल में से 1.806 लाख मीट्रिक टन चावल ही बांटने योग्य था।

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उधर राइस मिलर्स (धान कूटने वाले व्यापारी) चावल टूटने (ब्रोकन राइस) की शिकायत भी लगातार कर रहे थे और मुख्यमंत्री से टेस्ट मिलिंग ( राइस मिल में टेस्ट) कराने की मांग कर रहे थे। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने धान की नई टेस्ट मिलिंग नीति को मंजूरी दी और 10 दिसंबर को विज्ञप्ति जारी कर प्रदेश के हर जिले में सूचना भेजी। आदेश की कॉपी नीचे देख सकते हैं-

नीति में लिखा गया कि अब मिलिंग के लिए जो धान दी जाएगी, पहले उसकी गुणवत्ता जांच होगी। जांच के बाद जो चावल गुणवत्ता के पैमाने पर खरा उतरेगा, उसे ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली में वितरित किया जाएगा और केंद्रीय पूल यानी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को भेजा जायेगा। गुणवत्ता जांच की जिम्मेदारी उन मिलर्स को दी गई जो कूटने के लिए धान खरीदते हैं।

पिछले आदेश में क्या कहा गया था, उसे आप यहां पढ़ सकते हैं


मध्य प्रदेश: मिलर्स की जांच में पास होने वाली किस्म की ही धान MSP पर खरीदेगी सरकार, आरोप- व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाई गई नई नीति

विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है था कि जांच के बाद जिस भी किस्म की धान सही नहीं पाई जायेगी, उस किस्म के बारे में किसानों को बताया जायेगा। ऐसी स्थिति में किसानों को दूसरी किस्म की धान लगानी होगी जिसके लिए उन्हें दूसरे किस्म की बीज भी दी जायेगी। अन्यथा उसके अगले साल से सरकार उनसे धान नहीं खरीदेगी। जिले के राजस्व और कृषि विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर किसानों को जागरूक करेंगे। सरकार का मानना है कि इससे पीडीएस के तहत लोगों को अच्छी क्वालिटी का चावल मिलेगा। सरकार ने अब इसमें संशोधन करते हुए लिखा है कि अब किसानों को समझाया जायेगा, लेकिन हर किस्म की धान खरीदी जायेगी।

नये आदेश की कॉपी, जिसे संशोधित किया गया


आदेश आने के बाद ही सरकार की इस नीति का विरोध यह कहकर होने लगा था कि सरकार व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा कर रही है, सरकार ने नीति में बदलाव क्यों किया? यह जानने के लिए गांव कनेक्शन ने मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन लिमिटेड के महा प्रबंधक और नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के उप सचिव उमाकांत पांडेय को फोन किया, मैसेज भी किया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक अभिजीत अग्रवाल से बात करने के लिए उनके कार्यलय के नंबर पर कई बाद फोन किया गया लेकिन उनसे भी बात नहीं हो पाई। कार्यपालन संचालक वित्त, जितेन्द्र सिंह से बात जरूर हुई लेकिन उन्होंने इस पर कुछ भी कहने से मना कर दिया।

मध्य प्रदेश में 25 नवंबर से धान की सरकारी खरीद शुरू है। गेहूं उत्पादन में पंजाब को पीछे छोड़ने के बाद सरकार ने इस साल रिकॉर्डतोड़ 40 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रदेश में इस साल 145 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई है। इसमें सोयाबीन के बाद धान का रकबा सबसे ज्यादा है।

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