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मध्य प्रदेश: सतना में खुले आसमान के नीचे रखा लगभग तीन लाख कुंतल गेहूं भीगा

नियम यह है कि ओपन कैप में बोरियों की टैगिंग होने के 72 घंटे के अंदर अनाज गोदामों में पहुंच जाना चाहिए पर ऐसा नहीं हो सका और अब वह सड़ने के कगार पर है।

Shivraj singh Chauhan, wheat soaked in Rain, Procurement Center, Storage of Wheatखुले आसमान के नीचे रखा गेहूं।

सचिन तुलसा त्रिपाठी, कम्युनिटी जर्नलिस्ट

सतना (मध्य प्रदेश)। खेत के सीने पर मेहनत का हल चलाकर किसान जिस अन्न को उगाता है वह सरकारी मशीनरी की अनदेखी के चलते पानी-पानी हो गया। वजह अनाज को खुले मैदान में रखा गया तो जो बारिश में तरबतर हो गया। लापरवाही इस कदर थी कि बोरियों को सिला तक नहीं गया था।

मामला मध्य प्रदेश के सतना जिले का है। यहां के शेरगंज में बनाए गए ओपन कैप में रखा गया गेहूं शुक्रवार को हुई बारिश भी भीग गया। ओपन कैप में बिना तिरपाल के अनाज रखा गया है। यहां करीब 17 हजार कुंतल गेहूं भंडारित किया गया जो पूरी तरह से भीग चुका है। बड़ी बात तो यह है कि बोरियों को सिला भी नहीं गया था।

इसके अलावा मारफेड के अन्य तीन ओपन कैप सिजहटा, मौहारी और नागौद ओपन कैप का करीब डेढ़ लाख कुंतल गेहूं भी सड़ने के कगार में पहुंच गया। यह कोई पहली बार नहीं है जब ऐसा दृश्य सामने आया है। इस बारे में कलेक्टर अजय कटेसरिया से बात की गई तो उन्होंने निरीक्षण में व्यस्त होने की बात कहके और कुछ भी बोलने से मना कर दिया। यह हर साल की कहानी है लेकिन प्रशासन सबक नहीं ले सका। परिणाम यह है कि हर बार किसान की मेहनत इन ओपन कैप में पानी-पानी हो जाती है।

गेहूं की बारियों को सिला तक नहीं गया।

जिले में गेहूं खरीदी के लिए लॉकडाउन में 110 केन्द्र बनाए गए हैं। इनमें से 53 खुले आसमान के नीचे चल रहे हैं जिनमें करीब 4 लाख कुंतल गेहूं की खरीदी की गई। इनमें से लगभग 3 लाख कुंतल अनाज भीग चुका है। यह वह अनाज है जो गोदामों को तत्काल भेजा जाना था लेकिन परिवहनकर्ता को चावल प्रदेश से बाहर भेजने की जल्दी थी जिसे कारण ओपन कैप में ही अनाज रखा रह गया।

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नियम यह है कि ओपन कैप में बोरियों की टैगिंग होने के 72 घंटे के अंदर अनाज गोदामों में पहुंच जाना चाहिए पर ऐसा नहीं हो सका और अब वह सड़ने के कगार पर है। भीगे गेहूं के जो आंकड़े सामने आए है उनमें डाम्हा में 3818, बसुधा में 2279, नागौद मंडी में 2169, बकिया बैलो में 1554, मढ़ीकला में 1492, बदेरा में 1418, सोनवारी में 1385, तोरहटा में 1256, बठिया में 1236 और बर्ती में 1169 एमटी (मीट्रिक टन) गेहूं भीग चुका है।

बेमौसम बारिश से पूरे प्रदेश से गेहूं भीगने की खबरें आ रही हैं। ज्यादा गेहूं उत्पादक जिलों के खरीदी केंद्रों में हालात खराब है। उधर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्थितियों का जायजा लेने के लिए कमिश्नर और कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये संवाद किया।

मुख्यमंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनका नुकसान नहीं होगा और पूरा भुगतान किया जाएगा। प्रदेश में 125 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदारी हो चुकी है। 113 लाख मीट्रिक टन गेहूं का सुरक्षित भंडारण कर लिया गया है, लेकिन करीब 12 लाख मीट्रिक टन गेहूं का नहीं। यह खरीदारी केंद्रों पर ही पड़ा हुआ है। कुछ गेहूं तो अभी बोरों में भरा जाना है। इस गेहूं को बारिश से काफी नुकसान होगा।

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