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मध्य प्रदेश: पीला मोजेक रोग ने बढ़ायी किसानों की मुश्किलें, बर्बाद हो गई सोयाबीन की फसल

किसानों की मुश्किलें हैं कि कम ही नहीं हो रहीं हैं, कोरोना वायरस के बाद अब पीला मोजेक वायरस से मध्य प्रदेश के कई जिलों में सोयाबीन की फसल बर्बाद हो गई। इसके बाद बारिश ने मक्का की फसल बर्बाद कर दी।

मध्य प्रदेश: पीला मोजेक रोग ने बढ़ायी किसानों की मुश्किलें, बर्बाद हो गई सोयाबीन की फसल

कार्तिक सराठे, कम्युनिटी जर्नलिस्ट

भोपाल (मध्य प्रदेश)। "परिवार की आय का मुख्य जरिया खेती ही है। हम भी खेती करते हैं और हमारे चाचा भी। हमने सोयाबीन की फसल बोई थी और चाचा ने मक्के की। सोयाबीन की फसल वायरस ने खराब कर दी, और मक्के की फसल बारिश से नष्ट हो गई। पटवारी साहब आए थे, सर्वे कर ले गए हैं, पता नहीं उसका मुआवजा कब मिलेगा।"

ये कहना है मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग 50 किमी. दूर स्थित गांव बरबटपुर के किसान शेर सिंह का। पीली पड़कर सूख चुकी सोयाबीन की फसल दिखाते हुए शेर सिंह कहते हैं, "आप ही बताओ साहब, एक भी फली दिख रही है आपको इसमें ? अब हमें नहीं पता कि पटवारी साहब ने कितने प्रतिशत नुकसान रिकॉर्ड में दर्ज किया है। हमारे हिसाब से तो 100% फसल बर्बाद हुई है।

वो आगे कहते हैं, "फसल खराब होने के चलते मजदूरी करनी पड़ी। क्योंकि बच्चों की फीस और भूख तो मुआवजे का इंतजार नहीं कर सकती। अब तो बुआई भी खत्म हो गई, तो मजदूरी भी मिलनी बंद हो गई है।"

सोयाबीन की बुआई करने वाला गांव का हर कुछ ऐसी ही कहानी सुना रहा है। दरअसल, मध्यप्रदेश के किसानों को इस बार उम्मीद थी कि मौसम अनुकूल होने से फसल अच्छी होगी। इस आस में किसानों ने सोयाबीन की ज्यादा बुआई की। लेकिन सोयाबीन की फसल येलो मोजैक वायरस की चपेट में आ गई। और उम्मीदों पर पानी फिर गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में 53 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती की जाती है। देश भर में होने वाली सोयाबीन की फसल का लगभग 55-60% मध्यप्रदेश में ही होता है।

रायसेन जिले की गौहरगंज तहसील में बसे इसी गांव के एक और किसान हैं धर्मेन्द्र सिंह। वे कहते हैं, "फसल पीली पड़ी तो हमें लगा कि कीटनाशक से सही हो जाएगी। लाकर छिड़काव किया। फिर भी कुछ असर नहीं हुआ तो सैम्पल दवा की दुकान पर दिखाने ले गए। आखिर में विक्रेता ने ही कह दिया कि इस फसल में कीटनाशक डाल कर अपना समय और पैसा बर्बाद मत करो। फसल की जांच भी कराई, तो वहां बैठे साहब ने कहा कि तुम्हारी फसल को इल्ली जड़ से खत्म कर रही है। अब इसका कुछ नहीं होगा। सर्वे तो हुआ है, पर पटवारी साहब कितना नुकसान दर्ज करके ले गए हैं हमें नहीं पता।"

कृषि मंत्री भी फसल की हालत देखने खेतों में पहुंचे

पिछले महीने मध्यप्रदेश सरकार में कृषि मंत्री कमल पटेल ने फसल के नुकसान की सूचना मिलने के बाद भोपाल जिले की बैरसिया तहसील के कुछ खेतों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि फसल में 100% तक का नुकसान दिख रहा है। मालवा, निमाड़ और महाकोशल से भी फसल खराब होने की खूब सूचनाएं आ रही हैं।


क्या कहते हैं सरकारी अधिकारी

मध्यप्रदेश कृषि विभाग में संयुक्त संचालक जी.एस. चौहान के कहते हैं, "सोयाबीन की फसल को येलो मोजैक वायरस के चलते नुकसान हुआ है, इसके सर्वे का काम राजस्व विभाग कर रहा है। नुकसान का डेटा राजस्व विभाग सर्वे के बाद ही जारी करेगा। कृषि विभाग के पास फिलहाल ऐसा कोई डेटा नहीं है।"

तहसील में सर्वे कर रहे एक शासकीय अधिकारी ने बताया कि, एक केंद्रीय दल आया था। हमने सर्वे करके रिपोर्ट सौंप दी। 70-80% नुकसान दर्ज किया गया है। पहले डिमांड भेजी जाएगी। फिर बजट आएगा। अब इस प्रक्रिया में कितना समय लगता है, ये कहा नहीं जा सकता।

थोड़ी सतर्कता किसानों को इस नुकसान से बचा सकती है

मध्यप्रदेश किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के पूर्व संचालक जीएस कौशल के कहते हैं, "अगर किसान थोड़ी सतर्कता बरतें, तो सोयाबीन की फसल को होने वाले इस नुकसान से बचा जा सकता है। येलो मोजैक वायरस व्हाइट फ्लाई ( सफेद मक्ख) से पनपता है। हम वायरस को तो नहीं रोक सकते, लेकिन व्हाइट फ्लाई को रोकने के कई तरीके हैं। किसान को बुआई के समय ही इन तरीकों पर अमल करना होता है।"

एक बार अगर फसल वायरस की चपेट में आ गई। तो फिर उसे रोकना लगभग नामुमकिन हो जाता है। अब चूंकि ये वायरस है, तो जाहिर है ये एक फसल से दूसरी फसल तक भी वाइट फ्लाई के जरिए पहुंच जाता है। यही वजह है कि इलाके कि एक फसल खराब होने पर धीर-धीरे करके वायरस हर फसल तक पहुंच जाता है। बेहतर होगा कि किसान बुआई के समय ही व्हाइट फ्लाई को रोकने का इंतजाम करें।

फसल बीमा योजना का पैसा भी नहीं आया

सोयाबीन की फसल का नुकसान झेल रहे किसानों की मुश्किलें थोड़ी कम हो सकती हैं। अगर इस साल मिलने वाली फसल बीमा योजना की राशि उनके खाते में आ जाए। जबकि सरकारी दावों की मानें तो, किसानों को पैसा मिल चुका है। 18 सितंबर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उज्जैन के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उसी दिन ट्वीट करके लिखा था कि - "आज ही प्रदेश के 22 लाख किसानों के खाते में फसल बीमा योजना के 4688 रुपए करुंगा"। जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

चिकलौद कलां गांव के किसान ओमप्रकाश मीणा कहते हैं, "न तो इस साल की फसल बीमा राशि आई है, न ही पिछले साल की। बैंक में जाकर पता करने वाले सवाल के जवाब में वे कहते हैं, सब कर लिया साहब। हमें पता है, जब पैसा आता है तो मोबाइल में मैसेज आ जाता है।"



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