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किसान आगबबूला : महाराष्ट्र से लेकर मध्यप्रदेश तक सड़कों पर उतर ऐसे जताया विरोध

लखनऊ। महाराष्ट्र में कर्ज माफी की मांग को लेकर आज से लाखों किसानों ने हड़ताल शुरू कर दी है। खेतों का मेहनतकश किसान सड़कों पर अपनी उपज और मेहनत को फेंक रहा है। किसानों ने कहा है कि सरकार ने उनके साथ धोखा किया है।

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पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में तमिलनाडु के किसान प्रदर्शन कर रहे थे। सरकार आैर सिस्टम के प्रति किसानों की नाराजगी बढ‍़ती जा रही है। अन्नदाता को खेत छोड़ सड‍़क पर उतरना पड़ रहा है। महाराष्ट्र में जो रहा है वो होना ही था। वहां के किसानों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से स्थिति आैर खराब हुई है। सब्जियों का सही दाम नहीं मिल रहा। महाराष्ट्र के किसानों के समर्थन में कुछ अन्य प्रदेश के किसान भी आ रहे हैं। मध्य प्रदेश के किसान संगठन भी इस हड‍़ताल को समर्थन दे रहे हैं। किसानों का आरोप है कि सरकारी की अऩदेखी के चलते खेती-किसानी घाटे का सौदा बनती जा रही है और किसान कर्ज़ में डूबता जा रहा है।

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सड़क पर दूध बहाते किसान।

आंदोलन के दौरान किसानों ने आज से बाजार में दूध और सब्जियों की आपूर्ति रोक दी है। एक दो जगह से झड़प होने की भी सूचना है। लंबे समय से कर्जमाफी की मांग कर रहे महाराष्ट्र के किसानों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से कई मुद्दों पर बातचीत के बाद बुधवार आधी रात से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने की घोषणा की थी। स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के नेता और सांसद राजू शेट्टी ने कहा है कि उन्होंने 22 से 30 मार्च तक पश्चाताप यात्रा निकाली थी। सरकार ने किसानों के साथ वादा खिलाफी की है। उन्होंने कहा है कि सरकार ने 30 हजार करोड़ का कर्ज माफ करने का किसानों से वादा किया था। लेकिन अब सरकार पीछे हट रही है। किसान ठगा महसूस कर रहे हैं।

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राजू शेट्टी ने बताया कि इस हड़ताल को 15 से 20 किसान संगठनों का समर्थन प्राप्त है। शेट्टी ने कहा कि पूरे राज्य में किसान आत्महत्या कर रहे है। सरकार किसानों की परेशानियों के प्रति असंवेदनशील है। अब आंदोलन के सिवाय कोई रास्ता नहीं है। 7 उन्होंने कहा कि एक पखवाड़े के बाद वे आंदोलन और तेज करेंगे।

सड‍़क पर फेंगी गई सब्जियां।

किसानों की हड़ताल के बाद मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे, नासिक, नागपुर जैसे बड़े शहरों को आने वाली फल, सब्जियों, दूध और खाद्यान की कमी से जूझना पड़ रहा है। उधर किसाना संगठनों के प्रतिनिधियों का कहाना है कि मुख्यमंत्री फडणवीस से मुलाकात के बावजूद उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।

मुख्‍यमंत्री से वार्ता विफल होने पर उठाया कदम

गौरतलब है कि मंगलवार को विभिन्‍न किसान संगठनों की एक राज्‍य स्‍तरीय समन्‍वय समिति 'किसान क्रांति मोर्चा' के प्रतिनिधि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से मुंबई स्थित उनके आधारिक आवास पर मिले, मगर वार्ता विफल रही। ऐसे में किसानों ने अपने हड़ताल को और स्‍थगित ना करने का फैसला लिया।

मध्य प्रदेश के हरदा के मंडी में पसरा सन्नाटा।

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आम लोगों का दैनिक जीवन हो सकता है प्रभावित

हड़ताल से आम लोगों को दैनिक जरूरत की चीजों को लेकर दिक्‍कतों का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, नासिक जिले के किसान गुजरात को भी कृषि उत्‍पाद सप्‍लाई नहीं करेंगे। एक सब्‍जी किसान धुर्वे ने बताया आज बातार में सब्जियों और फलों की आपूर्ति अच्‍छी नहीं हुई है। खरीददारों को दिक्‍कतें हो सकती हैं, वहीं हमें भी क्‍योंकि हम रोजाना कमाने वाले लोग हैं। वहीं एक दूसरे किसान ने बताया कि यहां भी कर्ज माफ कर देना चाहिए जैसा कि उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने अपने राज्‍य ने किया है। क्‍योंकि सब्जियों और फलों की कम आपूर्ति के कारण खुद ब खुद मांग के आधार पर इनकी कीमतें बढ़ जाएंगी।

पूरे पश्चिम महाराष्ट्र में किसान हड़ताल कर रहे हैं। हम अपनी फसलों के अच्छे भाव मांग रहे हैं। पिछले एक साल में टमाटर, शिमला मिर्च का रेट काफी कम हुआ। मुनाफा कम हो रहा। दूध देना बंद कर दिया।
सुरेश कवाड़े, गन्ना उत्पादक किसान, महाराष्ट्र
हरदा, होशंगाबाद, सिहोर, इंदौर में भी किसान हड़ताल पर हैं। गायों को दूध पिला दिया। मंडी में कुछ नहीं भेजा गया। आर्थिक मजबूती चाहिए। पूरे देश के किसान नाराज हैं।
केराद सिरोही, आम किसान यूनियन, मध्य प्रदेश
सब्जियों का आधा दाम मिल रहा है। फसल तुड़ाई अधिक देना पड़ रहा है। मुनाफा घटता जा रहा है। ऐसे में किसानी करने का मतलब ही क्या है।
भंवर लाल, किसान, जलगांव, महाराष्ट्र
किसानों का यह आंदोलन देशभर में फैलेगा1- अपनी उपज का उचित मूल्य और कर्जमाफी को लेकर महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के जो किसान सड़क उतरने हैं उनके साथ पूरे देश का किसान है। किसानों का यह आंदोलन पूरे देश में फैलेगा। केन्द्र और राज्य सरकारों की किसाना विरोधी नीतियों का नतीजा है कि आज अन्न उत्पादकों का सड़क पर उतरना पड़ रहा है। अभी समय है कि सरकार किसानों की समस्याओं पर ध्यान दें जिससे किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके। उत्तर प्रदेश में किसानों की स्थिति बहुत दयनीय है इसको लेकर भी यहां के किसान आंदोलन करेंगे। 
राकेश टिकैत, मुख्य प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन 
महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के किसानों ने दूध और सब्जियों को रोड पर फेंककर केद्र ओर राज्य की सरकार को यह संकेत दिया है कि किसानों की स्थिति पर ध्यान दीजिए, नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब किसान खेती-किसानी से अलग हो जाएगा। आंकड़े हर साल इस बात की गवाही दे रहे हैं बड़ी संख्या में किसान खेती-किसानी केा छोड़ रह हैं क्योंकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। जिससे किसान कर्ज में डूब रहा है।
विजय कुमार, राज्य सचिव, आल इंडिया कृषक खेत मजदूर संगठन