मंदसौर कांड की बरसी: किसानों की दुर्दशा, 6 किसानों की मौत और अब आंदोलनों का दौर

1 जून 2017 को मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई शहरों में कर्ज़माफी समेत कई मांगों को लेकर किसान सड़कों पर उतर आए थे, पुलिस की गोली में कन्हैयालाल पाटीदार और बबलू पाटीदार समेत 6 किसानों की मौत हो गई थी। इस घटना ने देशभर में किसानों के गुस्से में घी की तरह काम किया।

मंदसौर कांड की बरसी: किसानों की दुर्दशा, 6 किसानों की मौत और अब आंदोलनों का दौरमंदसौर गोली कांड के बाद मध्य प्रदेश में किसानों ने किया था आंदोलन। फोटो: गाँव कनेक्शन

मंदसौर (मध्य प्रदेश)। अरहर और प्याज की खेती में घाटा खाए किसान, अपनी फसलों का उचित मूल्य और कर्ज़माफी के लिए पिछले साल 6 जून को प्रदर्शन कर रहे थे। इन्हीं किसानों में एक थे, कन्हैयालाल पाटीदार, जिनकी पुलिस की गोली से मौत हो गई थी। आज उनके गांव चिल्लौड पिपलिया में उनकी प्रतिमा का अनवारण होगा, किसानों ने उन्हें शहीद का दर्जा दिया है।

1 जून 2017 को मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई शहरों में कर्ज़माफी समेत कई मांगों को लेकर किसान सड़कों पर उतर आए थे, शहरों के लिए दूध और सब्जियों की सप्लाई रोक दी थी। आंदोलन ने मंदसौर और नीमच में विकाराल रूप ले लिया, पुलिस की गोली में कन्हैयालाल पाटीदार और बबलू पाटीदार समेत 6 किसानों की मौत हो गई थी। इस घटना ने देशभर में किसानों के गुस्से में घी की तरह काम किया। पिछले 15 वर्षों से (2017 तक) मध्य प्रदेश में सत्ता संभाल रहे शिवराज सिंह की सरकार कमोबेस घुटने पर आ गई थी। शिवराज ने कई वादे कर किसानों को शांत कराया, लेकिन इस घटना के बाद बनी किसान संघर्ष समन्वय समिति ने पूरे देश में किसानों को लेकर किसान मुक्ति यात्रा शुरू कर दी। समिति ने एमपी और तमिलनाडु से लेकर दो दर्जन से राज्यों कई हजार किलोमीटर की यात्रा की। योगेंद्र यादव, बीएम सिंह, डा, सुनीलम, सांसद राजू शेट्टी समेत कई बड़े चेहरों वाली इस समिति ने मंदसौर कांड की बरसी पर पूरे देश में किसान स्मृति दिवस मनाने का ऐलान किया। समिति की तरफ से मंदसौर के चिल्लौड पिपलिया गांव में मृतक किसान कन्हैयालाल पाटीदार की मूर्ति लगाई जा रही है।

किसान मुक्ति यात्रा और एक फोटोग्राफर की डायरी (भाग-1)


मंदसौर कांड के बाद विभिन्न किसान संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। फोटो: गांव कनेक्शन

अखिल भारतीय किसान समन्वय और किसान संघर्ष समिति से जुड़े पूर्व विधायक डा. सुनीलम ने कहा, शिवराज सरकार लगातार किसानों से वादाखिलाफी कर रही है, पहले निहत्थे किसानों पर गोली चलवाई और अब उसके एक साल बीतने पर भी हत्या करने वाले पुलिसकर्मियों पर एक भी मुकदमा दर्ज़ नहीं हुआ है। न ही उन आंदोलन में शामिल रहे किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए गए हैं। जबकि खुद सीएम ने तीन-तीन बार वादा किया था।उन्होंने कहा, देश के 192 संगठन दोबारा ऐसा जलियावाला बाग कांड न हो इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसीलिए हम लोग सिर्फ मंदसौर ही नहीं पूरे देश में किसान स्मृति दिवस मना रहे हैं।6 जून 2017 को मंदसौर में हिंसा के बाद किसानों की मौत पर दुख जताते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ का मुआवजा, परिवार के एक शख्स को नौकरी और घायलों के इलाज मुआवजे का वादा किया था। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के किसानों के अपील की थी कि वो शांत रहे, प्रदेश सरकार उनकी बेहतरी के सबकुछ करेगी, लेकिन चुनावी साल में शिवराज के सितारों की चाल गलत नजर आ रही है। पिछले वर्ष के आंदोलन के दौरान प्याज 2 रुपए किलो बिक रहा था तो इस बार लहसुन और टमाटर के किसान परेशान हुए, प्याज की कीमत 50 पैसे तक पहुंच गई।


शिवराज सिंह ने किसानों के लिए भावांतर योजना शुरू की, लेकिन उसका हश्र बताता है कि किसान पुत्र के प्रदेश में कुछ गड़बड़ है। एमपी में जिस दिन से भावांतर योजना लागू हुई, मंडियों में फसलों के दाम गिर गए। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार मंडियों में अपनी फसल की बिक्री का इंतजार करते-करते पिछले कुछ महीनों में 4 किसानों की मौत हुई है, जबकि कर्ज और घाटे के चलते कई किसानों ने आत्महत्या की है।एक तरफ जहां किसान संघर्ष समन्वय समिति मंदसौर कांड पर स्मृति दिवस मना रही है। वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय किसान संघ की अगुवाई में 130 से ज्यादा संगठनों ने मिलकर देश के कई राज्यों में गांव बंद यानि किसानों की हड़ताल कर रखी हैं। शहरों को सब्जी और दूध की सप्लाई बाधित की जा रही है। इस बंद का असर भी सबसे ज्याद मध्य प्रदेश में है। शिवराज और बीजेपी दोनों किसान की हड़ताल और बंद के पीछे कांग्रेस का हाथ बता रहे हैं। अक्टूबर 2018 में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होंने हैं। लगातार तीन बार से सत्ता संभाल रहे शिवराज के बारे में कहा जाता है 'किसान पुत्र' हैं, जमीनी राजनीति करके उन्होंने कांग्रेस से एमपी की सत्ता छीन ली थी। इस किसान पुत्र ने प्रदेश की खेती और किसानों को कई सौगातें भी दी।

किसान मुक्ति यात्रा (भाग-3) : किसान नेताओं की गिरफ्तारी और अफीम की सब्जी

किसान संघर्ष समन्वय समिति ने पूरे देश में किसानों को लेकर किसान मुक्ति यात्रा शुरू कर दी। फोटो: गांव कनेक्शन

शिवराज ने मध्य प्रदेश को खेती का नंबर एक राज्य बनाया। पंजाब और हरियाणा से ज्यादा गेहूं पैदा किया। पूरे देश में जब खेती की विकासदर 2 फीसदी का आंकड़ा नहीं छू पा रही थी, मध्य प्रदेश दहाई के अंक (10फीसदी) में अपनी सफलता की कहानी गढ़ रहा था। यूपी में गेहूं इस बार 1745 रुपए में बिका है लेकिन शिवराज के मध्य प्रदेश में गेहूं का रेट 2000 रुपए रहा है। क्योंकि शिवराज सरकार उस पर बोनस देती है।पांच बार देश का सबसे बड़ा कृषि पुरस्कार "कृषि कर्मण' पाने वाले प्रदेश में अगर किसान लगातार दूसरे साल सड़क पर उतरता है। अपनी उपज की सप्लाई रोकता है तो सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा।" शिवराज का तिलिस्म टूट गया है। खेती में नंबर एक और किसानों के मसीहा वाली तो बातें थीं, उनसे पर्दा हट गया है। जब देश के कई राज्यों में किसानों का कर्ज़ा माफ हो सकता है तो मध्य प्रदेश में क्यों नहीं ?" गांव बंद आंदोलन के प्रदेश में अगुवा आम किसान यूनियन के केदार शंकर सिरोही कहते हैं।मध्य प्रदेश के किसान काफी प्रगतिशील कहे जाते हैं। ये भी कहा जाता है कि यहां घरों का सबसे होनहार लड़का खेती की बागडोर संभालता है। चना, गेहूं, प्याज, सोयाबीन, आलू समेत कई फसलों के उत्पादन में मध्य प्रदेश ने रिकार्ड बनाए हैं। लेकिन मंडियों में बैंगन से लेकर, प्याज और सोयाबीन तक जिस रेट पर किसान बेचने पर मजबूर होता है, उसकी तस्वीरें और खबरें जो सोशल मीडिया में वायरल होती हैं, वो भावांतर योजना को कठघरे में खड़ा करती हैं। पिछले साल आंदोलन के बाद शिवराज सरकार ने तय किया था, मंडी के रेट जो चीजें कम पर बिकेंगी सरकार अपनी तरफ से उनके नुकसान की भरपाई करेगी, यानि भाव में जो अंतर होगा वो सरकार देगी, लेकिन भावांतर लागू होते हीकई चीजों के दाम मंडियों में काफी तेजी से कम हुए, हालात ये हुए कि किसानों की लागत नहीं निकल पाई। जबकि किसान अपनी लागत पर डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य मांग रहे थे।


आर-पार की लड़ाई के लिए जागृत करने के इरादे से किसान मुक्ति यात्रा निकाली गई थी। फोटो: गांव कनेक्शन

तो क्या चुनावी मुद्दा और राजनीति का केंद्र बनेंगे किसान ?

पिछले दिनों में मध्य प्रदेश में खेती के हाल और किसानों के आंदोलन के बार में बात करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह ने कहा, "शिवराज सिंह जमीनी आदमी हैं, बिजली, सिंचाई समेत कई अच्छी योजनाएं किसानों की दीं, लेकिन भावांतर और किसान फसल बीमा योजना जैसी योजनाओं का लाभ जनता को नहीं मिला। भावांतर का फायदा बिचौलियों और कारोबारियों ने उठाया, वोटबैंक के चलते सरकार उनपर नकेल नहीं कस पाई, यही समस्या की जड़ बन गई।"शिवराज की योजनाओं का असर था कि उनके शासनकाल में गेहूं का उत्पादन करीब 4 गुना बढ़ा। प्रदेश की मंडियां दूसरे कई राज्यों से अव्वल है। छोटी जोत वाले किसानों के इस प्रदेश में शिवराज ने सिंचाई की सुविधा जनसुलभ को दिलाई, खेत तालाब योजना भी खूब फलीफूली। योजनाओं, सुविधाओं, किसानों की मेहनत के बलबूते खूब उत्पादन हुआ। यही खूब उत्पादन किसान और शिवराज के लिए नासूर बन गया। प्याज, सोयाबीन और चने से लेकर अरहर तक जो किसानों के खेत में खूब पैदा हुई, उसके बिकने में लाले लग गए। 6 किसानों की मौत के बाद सरकार ने प्याज की सरकारी खरीद (8 रुपए ) पर कराई, लेकिन इस साल एक किसान ने 50 किलो प्याज बेचकर सिर्फ 5 रुपए कमाए।

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