मिलिए इस 'बर्डमैन' से, आवाज सुनकर पहचानते हैं पक्षियों का देश

अलीगढ़ के इसहाक मोहम्मद पक्षियों की आवाज सुनकर उनका देश बता देते हैं।

अलीगढ़। अभी तक आपने जंगलों में रहने वाले मोंगली की कहानी सुनी होगी लेकिन हम आपकों 'बर्डमैन' मिलाते हैं जो असल ज़िंदगी में पिछले 20 वर्षों से पक्षियों के साथ रह रहे हैं। इनका हुनर यह है कि पक्षियों की आवाज सुनकर ही बता देते हैं कि वह किस देश से आई और किस नस्ल की है।

''मुझे इस पक्षी विहार में रहते हुए 20 साल हो गए। करीब 100 से 120 की संख्या में पक्षी यहां आते है मेरा इन लोगों से इतना लगाव है कि आवाज सुनते ही पहचान लेते है कि वो कहां से आई है।'' चेहरे पर हल्की सी मुस्कान लिए शेखा झील पक्षी विहार में नेचर गाइड इसहाक मोहम्मद ने बताया।

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की 200 साल से अधिक पुरानी शेखा झील, विदेश से आने वाले 166 प्रवासी मेहमान परिंदों की पसंद का ख़ास आवास है। 25 हेक्टेयर के रकबे वाली शेखा झील, अलीगढ़ जिला मुख्यालय से 20 कि.मी दूर छरेरा रोड पर स्थित है।

सर्दियों के मौसम में यह पक्षी विहार विदेशी पक्षियों का ठिकाना होता है खासकर साइबेरियन पक्षियों का। नवंबर से लेकर फरवरी तक झील पक्षियों से गुलजार रहती है। देश-विदेश से आने वाले पक्षियों से इसहाक का एक दोस्ती का नाता है। इसहाक बतातें हैं, ''जैसे इंसानों में शाकाहारी और मांसाहारी होते है वैसे ही पक्षियों में भी शाकाहारी और मांसाहारी होते हैं। हमारे भारत में जो हंस की प्रजाति है ग्रलेग गूस यह शुद्ध शाकाहारी होती है। यह हरी घास खेतों में गेंहू खाती है। यह चाइना ,एशिया जैसे देशों से आती है। इसके अलावा भारत की चिड़िया जिसको मूरहन कहते है ये भी शाकाहारी होती है।''

मांसाहारी पक्षियों के बारे में इसहाक बताते हैं, ''आउटर और स्नेक बर्ड मांसाहारी चिड़िया होती हैं ये मुख्य रूप से मछली और कीड़े मकोड़े खाती हैं। पक्षियों में शाकाहारी और माँसाहारी पता लगाने का बहुत आसान तरीका भी है। अगर पक्षी शाकाहारी है तो उसकी बीट (मल) हाथी के मल जैसी होगी और अगर बीट बिल्कुल सफ़ेद हुई तो वो शाकाहारी होगी। '' बात को जारी रखते हुए इसहाक आगे कहते हैं कि अगर चिड़िया शाकाहरी और मांसाहारी दोनों है तो उसकी बीट काली होगी।

विदशों से यहां तक आने में घट जाता है पक्षियों का वजन-

वर्ष 2003 से इसहाक इन पक्षियों के साथ अपना समय निकलाते हैं। इसहाक बताते हैं, ''जब विदेशों से पक्षी अक्टूबर के महीने में आते हैं तो यहां तक आने में इनका वज़न एक किलो से डेढ़ किलो तक कम हो जाता है और जब यह मार्च के महीने में अपने देश वापस जाने की तैयारी करती है तो कई दिन पहले से अपना वज़न बढ़ाना शुरू करती है। वह अपनी चर्बी को बढ़ाती है ताकि हज़ारों किलोमीटर की दूरी तय करने में उनको कोई दिक्कत ना आयें।''

इस झील में आते हैं यह पक्षी-

सारस, मुरैन पनकौआ (लंबी गर्दन), जलकौआ (छोटा कौआ), ब्लैक आइविश, बड़ा बगुला (सांप जैसी गर्दन), स्काट बिल, जल मुर्गा, पिनटेल, कॉमन टेल, ब्लैक पिनटेल, डार्टर, ग्रे हीरोन, पेटेंड स्ट्रोक, ग्रेट कोरमोरेंट, पर्पल हीरोन, कॉम्ब डक, आइबिज, ब्लैक हैडेड आइबिज, ओपन बिल स्ट्रोक, स्पॉट बिल्ड डक, ब्लैक नेक्ड स्ट्रोक, व्हाइट ब्रेस्टेड वाटर हेन, कॉमन मूरहेन, लिटिल कोरमोरेंट, व्लाइट आइबिज, सोवलर, ग्रेलेग गूज आदि।


मोहम्मद फहद

गाँव कनेक्शन नेटवर्क टीम

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