परिवार नियोजन की जिम्मेदारी में पुरुषों की हिस्सेदारी भी जरूरी

परिवार नियोजन की जिम्मेदारी में पुरुषों की हिस्सेदारी भी जरूरीपुरूष नसबंदी को लेकर उदासीनता क्यों।

परिवार नियोजन का महत्व समझना महिला व पुरूष दोनों की जिम्मेदारी होती है। लेकिन भारत के पुरुषों द्वारा गर्भनिरोधक साधनों के प्रयोग के आकड़े बिलकुल भी प्रभावशाली नहीं है और जब नसबंदी की बात आती है तो यह आंकड़े उससे भी बद्तर हो जाते हैं।

21 नवम्बर से 4 दिसम्बर 2017 के बीच मिशन परिवार विकास के अंतर्गत 03 या तीन से अधिक सकल प्रजनन दर वाले चयनित 57 जिलों में पुरुष नसबंदी पखवाड़े का आयोजन किया जा रहा है जिसका थीम हर जिम्मेदार पुरुष की यही है, पहचान, परिवार नियोजन में जो दे योगदान निर्धारित किया गया है।

हाल ही में किये गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस -4) के आंकड़े बताते हैं कि गर्भनिरोधक साधनों के प्रयोग की जिम्मेदारी का भार मुख्यतः महिलाओं पर ही होता है फिर चाहे वह महिला नसबंदी की बात हो या अन्य कोई भी साधन। यदि कुल आधुनिक गर्भनिरोधक साधनों की बात की जाए तो 34 % महिलाएं नसबंदी करवाती हैं जबकि मात्र 1% पुरुष ही अपने हिस्सेदारी निभाते हैं जबकि उनके लिए ये विकल्प महिलाओं के मुकाबले अधिक विश्वसनीय और आसान है।

शाहजहांपुर जिले के ददरौल ब्लॉक की आशा बहू रेखा बताती हैं, “हम घर-घर जाकर नसबंदी के बारे में पूरी जानकारी देते हैं। महिलाएं तो मान जाती हैं, लेकिन पुरुषों को समझाना बहुत मुश्किल होता है। पुरुष राजी ही नहीं होते हैं। घर के बड़े-बुजुर्ग भी नसबंदी के लिए महिलाओं को आगे कर देते हैं।”

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस -4) के मुताबिक उत्तर प्रदेश में लगभग 0.1% पुरुष नसबंदी करवाई हैं, जोकि एनएफएचएस-3 में 0.2% की तुलना में घट गयी। वही एनएफएचएस -3 (2005-06) और एनएफएचएस -4 (2015-16) में महिला नसबंदी 17.3% पर स्थिर रही। जबकि स्वास्थ्य एवं महिला कल्याण मंत्रालय के अनुसार उत्तर प्रदेश में 2013-14 में लगभग ढाई लाख महिलाओं ने नसबंदी कराई जबकि वर्ष 2012 में यह आंकड़ा लगभग दो लाख था।

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सिक्किम है इस मामले में अपवाद

सभी प्रदेशों की बात की जाए तो सिक्किम एकमात्र अपवाद है जिसमें एनएफएचएस -4 के अनुसार शहरी क्षेत्रों में 3.4% और ग्रामीण क्षेत्रों में 4.3% पुरुष नसबंदी हुई जबकि एनएफएचएस -3 में शहरी क्षेत्रों में 1.6% और ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 3.4% था।

विश्व स्तर पर भी बहुत कम देशों में नसबंदी के उच्च प्रतिशत हैं। केवल 3% पुरुष गर्भनिरोधक के आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करते हुए नसबंदी के विकल्प चुनते हैं और कम और मध्यम आय वाले देशों में यह आंकड़ा मात्र 1% है। विश्व के सिर्फ छ: देशों में महिला नसबंदी की तुलना में पुरुष नसबंदी दर उच्च है। कनाडा में सबसे अधिक 22% पुरुष नसबंदी दर्ज की गयी और न्यूजीलैंड 20% के करीब रही।

ये हैं भ्रांतियां

नसबंदी के कम होने के पीछे कई मिथक व भ्रांतियां हैं । 2014, लंदन स्कूल ऑफ हायजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिंस द्वारा किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक "कम और मध्यम आय वाले देशों में पुरुष नसबंदी के लिए प्रेरणा और बाधाएं: एक साहित्य की समीक्षा" के अनुसार सबसे आम मिथक यह था कि इससे पुरुषों के पुरुषार्थ अथवा यौन क्षमता पर असर पड़ता हैं और परिवार और समुदाय में प्रतिष्ठा पर भी प्रश्नचिन्ह लग जाता है। वास्तव में जिन्होंने नसबंदी करवाई बहुत से लोगों ने उनका मज़ाक बनाया था। इसके साथ ही कुछ महिलाओं ने इस डर से नसबंदी का विरोध किया ताकि पुरुष अन्य साथी की तलाश में न रहे।

कौन से पुरुष करवा सकते हैं

इसे वह सभी पुरुष करवा सकते हैं जो 60 वर्ष से कम उम्र से कम उम्र के हों और जिनका कम से कम एक बच्चा हो। यूं तो परिवार नियोजन के लगभग सभी साधनों के बारे में तमाम मिथक प्रचिलित हैं लेकिन सर्वाधिक भ्रांतियां पुरुष नसबंदी को लेकर हैं जिसकी वजह से लोग इस साधन को अपनाने में झिझकते हैं. इन भ्रांतियों के साथ साथ वास्तविकताओं का जाना जाना भी आवश्यक है। पुरुष नसबंदी केवल जाड़े में ही करवानी चाहिये अन्यथा संक्रमण हो सकता है। पुरुष नसबंदी किसी भी मौसम में करवा सकते हैं, इसका मौसम से कोई संबंध नहीं होता है।

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