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बजट 2019: देश में बढ़ाया जाएगा दूध उत्पादन लेकिन संकट में डेयरी किसान

संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने डेयरी कामों को बढ़ावा देने और दूध उत्पादन बढ़ाने की बात कही। देश के डेयरी व्यवसाय से जुड़े करीब सात करोड़ से ज्यादा किसानों को दूध के सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे वह इस व्यवसाय से धीरे-धीरे मुंह मोड़ रहे हैं।

Diti BajpaiDiti Bajpai   5 July 2019 1:26 PM GMT

बजट 2019: देश में बढ़ाया जाएगा दूध उत्पादन लेकिन संकट में डेयरी किसान

लखनऊ। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में गाँव, गरीब और किसान को केंद्र बिंदु रखकर बजट पेश किया। इस बजट में देश में दूध उत्पादन बढ़ाने और डेयरी कामों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। वहीं मत्स्य पालन को कृषि से जोड़ा गया है।

मछली पालन को कृषि में जोड़ने से लखनऊ जिले से 45 किलोमीटर दूर मॉल ब्लॉक के नरसिंह खेड़ा गांव में रहने वाले बाबूलाल काफी खुश है। बाबूलाल कहते हैं,"मछली पालन को कृषि में जोड़ने का सरकार का अच्छा फैसला है लेकिन इस व्यवसाय में बहुत सुधार की जरूरत है। अभी हम पानी खरीद के तालाब में भर रहे है और प्राइवेट सेंटर से बीज खरीदना पड़ता है, जिससे लागत बहुत लगती है।"

बाबूलाल के पास 5 बिसवा में दो तालाब बने हुए है, जिसमें वह मांगुर, ग्रास रोहू मछ्ली का पालन कर रहे हैं। बाबूलाल पानी की समस्या के बारे में बताते हैं, "पानी के लिए 100 रुपए प्रति घंटे के हिसाब से रुपए देने पड़ते है गांव में ट्यूबबेल तक की सुविधा नहीं है।"

सबसे बड़े जल संकट से गुजर रहा है भारत

वर्ष 2018 में आई नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भारत इतिहास में जल संकट के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। गांव कनेक्शन के 19 राज्यों में 18000 लोगों से बात की गई जिसमें पानी की समस्या को लेकर लोगों ने अपना दर्द बयां किया था।

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डेयरी के काम को दिया जाएगा बढ़ावा

संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने डेयरी कामों को बढ़ावा देने और दूध उत्पादन बढ़ाने की बात कही। देश के डेयरी व्यवसाय से जुड़े करीब सात करोड़ से ज्यादा किसानों को दूध के सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे वह इस व्यवसाय से धीरे-धीरे मुंह मोड़ रहे हैं। लखनऊ जिले के माल ब्लाक के मसीडारतन गांव में रहने वाले डेयरी संचालक सौरभ सिंह बताते हैं, "जो बजट पेश किया है वो अच्छा है। जो समस्याएं झेलते आ रहे है उसका समाधान हो। जो दूध हमसे 20 से 30 रुपये में खरीदा जाता है वो 50 रुपए में बिकता है। चारा भूसा महँगा होने से एक पशु की में जितनी लागत लगती है उतना उसका आधा भी नहीं निकल पाता है। अभी भूसे की कीमत 750 रुपये प्रति कुंतल है।"


अपने सुझाव देते हुए सौरभ आगे कहते हैं, दूध की अगर एमएसपी तय हो जाए तो किसानों को काफी फायदा होगा। इससे किसान को औने पौने दाम में बेचना नहीं पड़ेगा और बिचौलियों से भी राहत मिल जाएगी।

दूग्ध का न्यूनतम समर्थन मूल्य हो तय

देश में 23 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय है अगर दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होता है तो किसानों को इससे फायदा मिलेगा। पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री डॉ संजीव कुमार बालियान ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में जानकारी दी थी कि पिछले कई वर्षों से देश में दूध का उत्पादन बढ़ा है लेकिन दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि दूध बहुत जल्दी खराब होने वाला पदार्थ है इसलिए डेयरी विभाग का देश में दूध के लिए एमएसपी निर्धारित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है वर्ष 2018 की बात करें तो देश में 176.3 मिलियन टन दूध का उत्पादन हुआ विश्व के कुल दूध उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 20 फ़ीसदी है। लेकिन इसके व्यापार से जुड़े किसान सही कीमत के लिए तरस रहे हैं।

दूध में उपलब्ध फैट और एसएनएफ के आधार पर ही दूध की कीमत तय होती है। को ऑपरेटिव की तरह दूध के जो दाम तय किए जाते हैं वह 6.5 फ़ीसदी फैट और 9.5 फ़ीसदी एसएनएफ के होते हैं। इसके बाद जिस मात्रा में फैट कम हो जाता है उसी तरह कीमत में कमी आ जाती है।

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जो किसान बाजार में दूध बेच देते हैं यानी जो ग्राहक तक सीधे दूध को पहुंचाते हैं उन्हें तो काफी फायदा हो जाता है लेकिन जो ऐसा जो लोग ऐसा नहीं कर पाते उन्हें मजबूरन दूध को तमाम निजी डेयरियों कंपनियों के केंद्रों पर औने पौने दाम पर बेचना पड़ता है अगर दूध के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य तय हो तो किसान को बेचने में इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा।

डेयरी व्यवसाय में पशु का स्वास्थ्य सही होना सबसे जरूरी होता है।लेकिन लचे सरकारी तंत्र और संसाधनों की उपलब्धता ना होने से छोटे पशुपालकों को अपने पशुओं का इलाज मजबूरन प्राइवेट में कराना पड़ता है लखनऊ जिले के नरसिंह खेड़ा गांव में रहने वाले रामप्रताप बताते हैं, "अभी दो दिन पहले हमारी गाय बीमार हुई प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया 500 रुपये खर्च हुए। गांव में सरकारी डॉक्टर आते नही पशु को 10 किमी दूर अस्पताल ले जा नहीं सकते।"

सरकार बजट तो दे देती है, काम हो रहा है कि नहीं उसपर ध्यान नहीं देती

रामप्रताप आगे बताते हैं,"सरकार बजट तो दे देती है लेकिन इसके साथ गांव में काम हो रहा है कि नहीं यह भी देखे।अगर हर ग्राम पंचायत में एक सरकारी डॉक्टर आ जाए तो किसान का पैसा बचेगा। दूध का दाम मिलता नही ऊपर से पशु की दवा पानी का खर्चा अलग से होता है।"

वर्ष 2017 में सांसद हुकुमदेव नारायण यादव की अध्यक्षता में कृषि संबंधी समिति ने रिपोर्ट पेश में पशुचिकित्सकों की कमी, सही समय पर उपचार और दवाई ना मिलने से बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत का जिक्र किया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इससे सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान गरीब छोटे और सीमांत किसानों को होता है।

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वहीं बाराबंकी जिले के त्रिवेदीगंज ब्लॉक में रहने वाले डेयरी संचालक सतीश सिंह बताते है, "दूध का सही दाम न मिलना तो समस्या है ही लेकिन डेयरी को शुरू करने में जो उपकरण लगते हैं। सरकार ने उसके किसी भी प्रकार की कोई सुविधा नहीं है दी। यह बजट में होना चाहिए था। साथ ही देश जो चारे की समस्या से जूझ रहा है उसके लिए प्रयास करना चाहिए।"

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