धान की MSP में 65 रुपए की बढ़ोतरी, जानें क्‍या है किसानों का कहना

धान की MSP में 65 रुपए की बढ़ोतरी, जानें क्‍या है किसानों का कहना

लखनऊ। मोदी सरकार ने बुधवार को फसल वर्ष 2019-20 के लिये धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 65 रुपये बढ़ाकर 1,815 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया। गांव कनेक्‍शन ने इस फैसले के बाद अलग-अलग राज्‍यों के किसानों से बात की और जाना कि वो इस बढ़ोतरी को लेकर क्‍या सोचते हैं। साथ ही वो कौन से मुद्दे हैं जो उनकी खेती को प्रभावित करते हैं और सरकार को इस ओर भी सोचना चाहिए।

उत्‍तर प्रदेश के किसान की सुनें

गांव कनेक्‍शन से फोन पर बात करते हुए उत्‍तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के पिपराइच ब्‍लॉक के गांव रमवापुर के रहने वाले किसान अजय प्रताप मिश्र (33 साल) कहते हैं, ''यह फैसला अच्‍छा है। मोदी सरकार के आने के बाद से ही धान के एमएसपी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले साल ही 200 रुपए बढ़े थे, इस बार 65 और बढ़ गए हैं। खरीद भी सही हो रही है। इससे किसान को फायदा होगा।''

किसान अजय प्रताप मिश्रकिसान अजय प्रताप मिश्र

अजय प्रताप बताते हैं, ''हमारे गांव में एक मंदिर है, वहां गांव के लोग इकट्ठा होते हैं। कल जब यह फैसला हुआ तो इसकी ही चर्चा हो रही थी। लोग इस फैसले से खुश थे।''

झारखंड के इस महिला किसान की सुनें

अजय प्रताप की तरह ही झारखंड के रांची जिले के बामनी गांव की रहने वाली किसान लक्ष्‍मी देवी भी सरकार के इस फैसले से खुश हैं, लेकिन वो इस बढ़ोतरी को कम बताती हैं। वो कहती हैं, ''खेती में जितनी मेहतन है उस हिसाब से यह बढ़ोतरी कुछ भी नहीं। मेरे इलाके में पानी की बहुत दिक्‍कत है। धान में पानी बहुत लगता है। एक छोटी नदी है, जिसपर हम आश्र‍ित हैं, लेकिन वो जनवरी-फरवरी तक ही सूख जाती है। धान के सीजन में इससे भी फायदा नहीं। ऐसे में इस खेती में मेहतन भी लग रही है और पानी के लिए लागत भी लग रही है। अभी तो जो बढ़ा है वो ठीक है, लेकिन सरकार को किसानों के लिए और सोचना चाहिए।''

पंजाब के किसान का क्‍या है कहना?

धान की एमएसपी में हुई बढ़ोतरी पर पंजाब के फाजिल्‍का जिले के बेगावाली गांव के रहने वाले किसान नृपेंद्र सिंह कहते हैं, ''धान की एमएसपी में सिर्फ 65 रुपए की बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरा समान है। हां, ये राहत जरूर है, लेकिन किसान इससे पूरी तरह संतुष्‍ट नहीं है। मेरा सुझाव है कि एमएसपी रेट जो तय किए गए उसी पर धान की खरीद हो, अगर कहीं कोई इससे कम पर खरीदता है तो उसपर मुकदमा होना चाहिए। क्‍योंकि एमएसपी बढ़ जाती है, लेकिन किसानों को मिलती नहीं है।''

नृपेंद्र पिछले साल अपने साथ हुई एक घटना को याद करते हुए बताते हैं, ''किसान के पास कोई मशीन नहीं होती जिससे वो धान की नमी नाप सके। खरीद केंद्र पर धान में नमी की बात कहकर ही धान खरीदने से मना कर देते हैं। पिछले साल मैंने अपने खेत से धान की कटाई करने के बाद उसे लोड कर मंडी खरीद केंद्र पहुंचा। अब वहां जब पहुंचा तो उस रोज कोई नहीं आया। ऐसे में रात भर धान वहीं खुले में रहा और ठंड की वजह से धान में नमी हो गई। सुबह जब धान खरीद केंद्र पर मौजूद कर्मचारी आए तो उन्‍होंने धान को देखा और बोले- 'धान में नमी है, आप इसे यहीं फैला दें।' हमने वैसा ही किया। अब उस रोज धान वहीं फैला रहा, सूखता रहा। अगली रोज फिर अधिकारी आए और नमी की बात कही।

किसान नृपेंद्र सिंहकिसान नृपेंद्र सिंह

नृपेंद्र कहते हैं, ''ये भी नहीं कि ऐसा सिर्फ मेरे साथ हआ। यह और किसानों के साथ भी हुआ। मेरा धान 9 दिन बाद लिया गया। तबतक मैं अपने धान के साथ वहीं पड़ा रहा। कई किसान तो पहले ही बाहर औने पौने दाम में बेच कर निकल गए। यह हाल है। सरकार को इस ओर भी ध्‍यान देना चाहिए।''

राजस्‍थान के किसान की बात सुनें

वहीं, राजस्‍थान के हनुमानगढ़ जिले के पीलीबंगा गांव के रहने वाले किसान चरणप्रीत सिंह कहते हैं, ''65 रुपए की बढ़ोतरी से हमारा कुछ भला नहीं होना है। सरकार अगर हमारी पानी की समस्‍या को दूर कर दे तो वैसे ही भला हो जाए। फिर हमें 65 रुपए की भी जरूरत नहीं होगी।'' चरणप्रीत बताते हैं, 'उनके क्षेत्र में घग्‍घर नदी है जिसका पानी हरियाणा में इस्‍तेमाल हो जाता है और उन तक नहीं पहुंच पाता। राजस्‍थान सरकार भी इस ओर ध्‍यान नहीं देती। ऐसे में खेती में पानी की दिक्‍कत बहुत बढ़ गई है।'

चरणप्रीत कहते हैं, हमारे क्षेत्र में 300 फीट पर पानी आ रहा है, वो भी खारा। इसी से हम खेती कर रहे, पीने के लिए भी इस्‍तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में हमारी मांग तो बस इतनी है कि सरकार धान में चाहे जितनी भी बढ़ोतरी कर दे, लेकिन खेती में पानी के लिए जितना हम अभी खर्च कर रहे हैं, उसकी पूर्ति नहीं हो पाएगी। अब हाल यह है कि एक बीघे में 15 से 20 लीटर डीजल लग जाता है, एक बार पानी चलाने में। ऐसे में इसका खर्च तो बहुत अधिक हो रहा है। सरकार बस हमारी पानी की समस्‍या का हल कर दे, 65 रुपए न भी बढ़ाए तो चलेगा।


यह है किसानों की राय बढ़ी हुई एमएसपी को लेकर, फिलहाल बढ़े हुए एमएसपी से ज्‍यादातर किसान खुश नजर आ रहे हैं। हां, उनकी कुछ समस्‍याएं हैं, जिसका निवारण वो सरकार से चाहते हैं, जिनके बारे में वो बता रहे हैं।

इन फसलों की एमएसपी में हुई बढ़ोतरी

धान- 1815 (3.7% वृद्ध‍ि)

धान ग्रेड ए- 1835 (3.7% वृद्ध‍ि)

ज्‍वार हाई ब्रिड- 2550 (4.9% वृद्ध‍ि)

ज्‍वार मालदानी- 2570 (4.9% वृद्ध‍ि)

बाजरा- 2000 कुंटल (2.6% वृद्ध‍ि)

रागी- 3150 (8.7% वृद्ध‍ि)

मक्‍का- 1760 (3.5% वृद्ध‍ि)

तूर अरहर- 5800 (2.2% वृद्ध‍ि)

मूंग- 7050 उड़द- 5700

मुंगफली- 5090 (4.1% वृद्ध‍ि)

सूरजमुखी बीज- 5650 (4.9% वृद्ध‍ि)

सोयाबीन पीला- 3710 (9.1% वृद्ध‍ि)

तिल- 6485 (3.8% वृद्ध‍ि)

राम तिल- 5940 (1.1% वृद्ध‍ि)

कपास मध्‍यम रेशा- 5255 (2.0% वृद्ध‍ि)

कपास लंबा रेशा- 5550 (1.8% वृद्ध‍ि)


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