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दो महीने में 350 से ज्यादा हाथियों की मौत, क्यों मर रहे ये बेजुबान, यह किसी को नहीं पता

Mithilesh DharMithilesh Dhar   2 July 2020 5:22 PM GMT

more than 350 elephants dead in northern Botswanaज्यादातर हाथियों के शव मुंह के बगल पड़े मिले हैं. (फोटो-https://www.theguardian.com/)

अफ्रीकी देश बोत्सवाना में पिछले दो महीने में 350 से ज्यादा हाथियों की मौत हो चुकी है। मौत के कारणों का पता नहीं लग पा रहा है। हाथियों के शव ओकावांगो डेल्टा के उत्तरी हिस्से में पाए गये हैं। अफ्रीका में सबसे ज्यादा हाथी इसी क्षेत्र में पाए जाते हैं। सैटेलाइट से मिली तस्वीरों के बाद मामला सामने आया।

दी गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार हाथियों के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं और उनके दांत भी सही-सलामत हैं। ऐसे में ये कहना कि इन्हें शिकारियों ने मारा है, अभी जल्दबाजी होगा, हालांकि अफ्रीकन देश ज़िम्बाब्वे में शिकारी सायनाइड देकर जानवरों के शिकार करते हैं, ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।

लगभग 25 लाख की आबादी वाले देश बोत्सवाना के इस क्षेत्र में हाथियों की संख्या लगभग 15,000 है जो देश में पाए जाने वाले हाथियों की संख्या का 10 फीसदी है। यहां आने वाले पर्यटकों से जो कमाई होती है वह बोत्सवाना की कुल जीडीपी का 10 से 12 फीसदी होता है। हीरे के बाद देश की सबसे ज्यादा कमाई इसी क्षेत्र से होती है।


हाथियों की मौत की जानकारी सबसे पहले वन्यजीव संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था एलिफेंट विदआउट बॉर्डर्स (ईडब्ल्यूबी) की ओर से दी गयी। ईडब्ल्यूबी का कहना है कि उस इलाके में हाथी तीन महीने से मर रहे हैं।

2018 में भी बोत्सवाना में 90 हाथियों में शव मिले थे। तब इनकी हत्या दांतों के लिए की गई थी।

ओकावांगो डेल्टा में मई महीने में लगभग 169 के शव मिले थे। जून के मध्य तक यह संख्या दोगुनी हो गयी। हाथियों के ज्यादातर शव पानी के छोटे गड्ढों के आसपास मिले हैं।


ब्रिटेन के नेशनल पार्क रेस्क्यू के कंजर्वेशन डायरेक्टर डॉ. नियाल मैक्केन ने दी गार्जियन को बताया, "हाथियों की मौत बड़ी संख्या में हुई है। इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था। मैं और मेरे साथियों ने मई से अब तक 350 हाथियों की मौत की पहचान की है। सरकार मौत के कारणों का पता लगा रही है, लेकिन अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं हो पाया है। वैज्ञानिकों ने सरकार से हाथियों की जांच करने का आग्रह किया है ताकि ये साफ हो सकते कि इनसे इंसानों के लिए कोई खतरा नहीं है और न ही इंसानों से कोई संक्रमण इनमें पहुंचा।"

नियाल मैक्केन ने यह भी आशंका व्यक्त की है कि कि कुछ लोग हाथियों के न्यूरोलॉजिकल सिस्टम पर हमला कर रहे हैं।


कुछ दूसरे इंग्लिश समाचार वेबसाइटस के अनुसार स्थानीय लोगों ने बताया कि हाथी पहले गड्ढों के चारों ओर घूम रहे थे। इसके बाद चक्कर खाकर गिर गये। इस बारे में डॉ। नियाल मैक्केन कह्ते हैं, "शवों को देखकर लगता है कि कुछ हाथियों की मौत झटके से हुई है, क्योंकि हाथियों का मुंह जमीन की ओर था। कुछ की मौत चलते-फिरते हुई है। ऐसा क्यों हुआ, यह बता पाना अभी मुश्किल है।"

बोत्सवाना वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट के एक्टिंग डायरेक्टर डॉ. सिरिल ताओलो ने गार्जियन को बताया, "हम हाथियों की मौत से वाकिफ हैं, 350 में से 280 जानवरों की पुष्टि हुई है। हम अन्य जानवरों का पता लगा रहे हैं। कोविड-19 के कारण हाथियों की जांच धीमी गति से हो रही है, क्योंकि जांच के लिए सैम्पल दूसरे देश भेजा गया है।"

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बोत्सवाना में किसान हाथी को अपना दुश्मन मानते हैं। यही कारण है कि यहां के राष्ट्रपति मोकेगविसी मसासी ने पिछले साल (2019) ही हाथियों के शिकार पर पांच साल से लगा बैन हटा दिया। पूर्व राष्ट्रपति इयान खान ने शिकार पर बैन लगाया हुआ था।

शिकार पर बैन के कारण ही हाथियों की संख्या 80,000 से बढ़कर लगभग डेढ़ लाख पहुँच गयी। डॉ. नियाल मैक्केन कहते हैं कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि देश अपने धरोहरों की रक्षा नहीं कर पा रहा है।

वर्ल्ड एलिफेंट डे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में अब सिर्फ चार लाख हाथी ही बचे हैं। वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF ) के मुताबिक, पूरे अफ्रीका में कुल 37 देशों में हाथी पाए जाते हैं और इनकी संख्या बहुत तेजी से घट रही है।

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